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Pratapgarh : राजकीय सम्मान के साथ वारंट अफसर को दी गई अंतिम विदाई, पैराशूट न खुलने से शहीद हो गए थे राम कुमार

Sun, 06 Apr 2025 12:56 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, लालगंज (प्रतापगढ़)
संवाद न्यूज एजेंसी, लालगंज (प्रतापगढ़) Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 06 Apr 2025 12:56 PM IST
सार

पैराशूट न खुलने से शहीद हुए वायु सेना के वारंट अधिकारी राम कुमार तिवारी रविवार को राजकीय सम्मान और सलामी के बाद अंतिम विदाई दी गई। बेल्हा के सपूत की शव यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

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Warrant officer given final farewell with state honours, Ram Kumar was martyred as his parachute did not open
वायु सेना के वारंट अफसर राम कुमार तिवारी की अंतिम यात्रा निकाली गई। - फोटो : संवाद।

आगरा में कमांडोज को हेलीकॉप्टर से पैराशूट के साथ हाई जंप का प्रशिक्षण देने के दौरान शहीद हुए वायु सेवा के वारंट अफसर रामकुमार तिवारी का पार्थिव शरीर रविवार को पैतृक गांव पहुंचने पर चीख पुकार मच गई। दोनों बेटे व वृद्ध माता-पिता की चीत्कार देख वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखें नम हो गईं।



करीब तीन घंटे बाद पुलिस बल की ओर से सलामी देने के बाद पैतृक गांव से शहीद का पार्थिव शरीर मानिकपुर गंगा घाट अंत्येष्टि के लिए रवाना हुआ तो समूचा इलाका रामकुमार अमर रहे के नारे से गूंज उठा। वायुसेना के जवानों ने अंत्येष्टि स्थल पर शाहिद को अंतिम सलामी दी। इसके बाद चिता को बूढ़े पिता ने कांपते हाथों से मुखाग्नि दी और शहीद हमेशा के लिए पंचतत्व में विलीन हो गए।

लालगंज कोतवाली के बेलहा गंभीराबाद निवासी रामकुमार तिवारी वायुसेवा में वारंट अफसर थे। वर्तमान में आगरा में तैनाती के दौरान एनएसजी कमांडो समेत अन्य वायुसेना जवानों को हेलीकॉप्टर से पैराशूट के सहारे हाई जंप की ट्रेनिंग देते थे। शनिवार को सुबह आगरा में हेलीकॉप्टर से हाई जंप की ट्रेनिंग देते हुए रामकुमार के पैराशूट में खराबी आ गई और वह नीचे गिरकर शहीद हो गए थे।


 

Warrant officer given final farewell with state honours, Ram Kumar was martyred as his parachute did not open
मानिकपुर गंगा घाट पर अंतिम सलामी देते सेना के जवान। - फोटो : संवाद।

आगरा में सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सैन्य वाहन के साथ एंबुलेंस में शहीद का पार्थिव शरीर रविवार की सुबह आठ बजे पैतृक गांव पहुंचा। साथ आए वायु सेवा के जवानों ने एंबुलेंस से शहीद के पार्थिव शरीर को बाहर निकाला तो चीख पुकार मच गई। आगरा से साथ आईं पत्नी प्रीति, दोनों बेटे यश व कुश और भाई श्याम कुमार समेत बूढ़े पिता रमाशंकर व माता उर्मिला देवी दहाड़े मारकर रोने लगे।

करीब तीन घंटे बाद शहीद का पार्थिव शरीर फूलों से सजे वाहन पर रखा गया। करीब साढ़े बारह बजे पार्थिव शरीर मानिकपुर पहुंचा। यहां एयरफोर्स के फ्लाइट लेफ्टीनेंट आर्यन कैनटूरा की अगुवाई में जवानों ने शहीद रामकुमार को सशस्त्र सलामी दी। घाट पर सैन्य वाहन से एयरफोर्स के जवानों ने चिता स्थल तक बलिदानी साथी को कंधा दिया।

करीब सवा एक बजे शहीद के पिता रमाशंकर तिवारी ने बेटे को कांपते हाथों से मुखाग्नि दी तो लोगों की आंखें नम हो गईं। इस मौके पर ब्लॉक प्रमुख अमित प्रताप सिंह पंकज, भाजपा नेता नागेश प्रताप सिंह छोटे सरकार, प्रधान रामगुलाम सरोज, राजेश मिश्र, संयुक्त अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संदीप सिंह आदि मौजूद रहे।

Warrant officer given final farewell with state honours, Ram Kumar was martyred as his parachute did not open
राजकीय सम्मान के साथ शहीद राम कुमार तिवारी की शव यात्रा निकाली गई। - फोटो : संवाद।

अंतिम यात्रा में शामिल हुए सांसद प्रमोद, गांव में द्वार और स्मारक बनवाने की घोषणा

राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने भी शहीद वायुसेना अफसर रामकुमार तिवारी की शहादत को नमन किया। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक आराधना मिश्रा मोना की ओर से शहीद के पार्थिव शरीर पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। शनिवार की देर शाम शहीद के बलिदान की जानकारी मिलने पर प्रमोद तिवारी नई दिल्ली के अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों को निरस्त कर अमर शहीद को पुष्पांजलि देने रविवार की सुबह संग्रामगढ़ पहुंच गए। शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने बेलहा के गंभीराबाद पहुंचकर उनके परिजनों से मिलकर दुख साझा किया। सांसद ने विधायक आराधना मिश्रा मोना के साथ मिलकर बेलहा में शहीद द्वार व शहीद स्मारक के निर्माण की घोषणा की।

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Warrant officer given final farewell with state honours, Ram Kumar was martyred as his parachute did not open
शहीद की पत्नी और बच्चों को संभालते परिजन। - फोटो : संवाद।

पिता के पार्थिव शरीर को घंटों निहारते रहे यश व कुश

शहीद रामकुमार तिवारी के पार्थिव शरीर के साथ आगरा से 14 वर्षीय बड़ा बेटा यश व दस वर्षीय छोटा बेटा कुश भी आए थे। पैतृक गांव पहुंचने पर घर के बाहर अंतिम दर्शन के लिए रखे पार्थिव शरीर को दोनों अपलक निहारते रहे। मासूम बेटों को घर-परिवार के साथ वहां मौजूद सैन्य अफसरों ने सांत्वना दी।

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शहीद राम कुमार तिवारी को श्रद्धांजलि देते राज्यसभा सांसद प्रमोद कुमार तिवारी। - फोटो : संवाद।

शहीद को श्रद्धांजलि देने नहीं पहुंचे अफसर, ग्रामीणों में आक्रोश

वायुसेना के शहीद वारंट अफसर रामकुमार तिवारी के पार्थिव शरीर को कंधा और श्रद्धांजलि देने के लिए तहसील से लेकर जिले तक के एक भी अफसर नहीं पहुंचे। पुलिस व प्रशासन के अफसरों की इस संवेदनहीनता पर वायुसेना के जवानों और ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। सिर्फ एक क्षेत्रीय दरोगा और चार सिपाही कोतवाली पुलिस की ओर से दिखाई दिए। लोगों के आक्रोश की जानकारी मिलने पर एसडीएम नैनसी सिंह औपचारिकता के लिए निकलीं। इस बीच शहीद का पार्थिव शरीर अंत्येष्टि के लिए घर से निकल चुका था। एसडीएम लालगंज नैंनसी सिंह ने रास्ते में अंतिम यात्रा रोककर श्रद्धांजलि की औपचारिकता निभाई। उन्होंने शहीद के घर तक जाना उचित नहीं समझा। ग्रामीणों के चेहरे पर प्रशासन की संवेदनहीनता को लेकर आक्रोश दिखा। ब्लॉक प्रमुख इंजीनियर अमित प्रताप सिंह ने कहा कि पुलिस प्रशासन के अफसरों से ऐसी अपेक्षा कदापि नहीं थी।

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