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नहाने के दौरान तीन किशोर सई नदी में समाए, दो की मिली लाश
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नगर कोतवाली के तेलियादह के समीप सई नदी में डूबे किशोर का शव मिलने पर बिलखते परिजन।
- फोटो : PRATAPGARH
सई नदी में नहाते समय डूबने से सगे भाइयों समेत तीन की मौत
नगर कोतवाली के दहिलामऊ में हादसा, काफी मशक्कत के बाद बरामद हुई तीनों की शव
नगर पालिका के कूड़े में कबाड़ बीनने गए थे सई नदी तेलिया दह के किनारे, डटी रही पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। नगर कोतवाली के दहिलामऊ इलाके में मंगलवार को सई नदी में नहाते समय डूबने से सगे भाइयों समेत तीन लोगों की मौत हो गई। घटना से कोहराम मच गया। घंटों मशक्कत के बाद उनके शव बरामद किए जा सके। शव देख परिजन बिलखने लगे। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची।
मूलत: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जनपद के शमशेरगंज थाना क्षेत्र के किशनगंज का रहने वाला सुकुर अपने परिवार के साथ नगर कोतवाली के पूर्वी सहोदरपुर में गुड्डू के मकान में किराए पर रहता है। सुकुर का पूरा परिवार कबाड़ बीनने का काम करता है। मंगलवार की सुबह सुकुर का बड़ा बेटा हबीबुल (19) अपने छोटे भाई सहीबुल (08) के साथ कबाड़ बीनने के लिए ठेला लेकर कमरे से निकला। उसके साथ बगल का रहने वाला आकाश (16) व उसका छोटा भाई सुजीत पुत्र नासिर भी था। तीनों ठेला लेकर गायघाट रोड दहिलामऊ मारुत नगर पहुंचे। सुबह करीब नौ बजे सई नदी के किनारे नगर पालिका द्वारा गिराए गए कूड़े में कबाड़ का सामान तलाशने लगे। कुछ देर तक सामान बीनने के बाद सभी तेलिया दह के करीब मछली पकड़ने लगे। करीब साढ़े दस बजे मछली पकड़ने के बाद हबीबुल नदी में नहाने लगा। उसके पीछे आकाश भी कपड़ा उतारकर नहाने के लिए नदी में उतर गया। दोनों को नहाते देख सहीबुल भी आ गया। अचानक सहीबुल नदी में डूबने लगा। यह देख उसे बचाने के लिए उसका बड़ा भाई हबीबुल आ गया, लेकिन वह भी डूबने लगा। दोनों को डूबते देख आकाश ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन वह भी डूबने लगा। तैरना न आने के कारण तीनों डूब गए। यह देख सुजीत शोर मचाते हुए ऊपर की ओर भागा। नदी के दूसरे छोर पर बैठे लोगों ने भी शोर मचाया। जिसके बाद मारुत नगर कालोनी में काम कर रहे लोग दौड़ पड़े। काम करने वाला फूलचंद्र नदी में कूद पड़ा। उसने नदी में डूबे आकाश को बाहर निकाल लिया, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंच गई। पुलिस उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंची। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस बीच ग्रामीणों के साथ ही सिविल लाइन चौकी प्रभारी भी पहुंच गए। स्थानीय गोताखोरों की मदद से नदी में डूबे सगे भाइयों की तलाश की जाने लगी। दोपहर करीब दो बजे गोताखोर ने नदी से हबीबुल को बाहर निकाला। उसकी सांसें थम चुकी थीं। यह देख परिजन बिलखने लगे। करीब चार बजे सहीबुल को भी लोगों ने बाहर निकाला, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पिता ने सिर पर पटक ली ईंट
कबाड़ का काम करने वाले सुकुर की पांच संतानें थीं। दो बेटों के नदी में डूबने से मौत की खबर मिलने पर वह बेहोश हो गया। कुछ देर बाद होश में आया तो अपने सिर पर ईंट पटक लिया। जिससे वह खून से लथपथ हो गया। परिवार के सदस्यों ने उसे पकड़ लिया। वह फिर बेहोश हो गया।
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तेलिया दह से लेकर पूर्वी सहोदरपुर तक मचा रहा कोहराम
दो सगे भाइयों के साथ ही किशोर के सई नदी में डूबने से तीन मौतों की खबर पर तेलिया दह से लेकर पूर्वी सहोदरपुर तक कोहराम मचा रहा। हबीबुल की मां व बहन नदी के किनारे पहुंच गई। सभी रोने बिलखने लगी। महिला सिपाहियों को पकड़कर बहन रोती रहीं। उन्हें रोता देख महिला सिपाही की आंख से भी आंसू निकल आए। जिला अस्पताल में भी शव देखने के बाद लोग रोते बिलखते रहे। सुकुर के ठिकाने पर भी लोगों का जमघट लगा रहा। आकाश का परिवार घम्मू के अहाते में रहता है। वहां भी लोग रोते बिलखते रहे। नदी के किनारे पड़े बेटों के कपड़ों को देखकर मां रोती बिलखती रही। कपड़ों के पास ही शराब की बोतल भी पड़ी थी।
तीन दशक से पूर्वी सहोदरपुर में है 15 परिवारों का है ठिकाना
पश्चिम बंगाल के रहने वाले 15 परिवारों का तीन दशक से अधिक समय से पूर्वी सहोदरपुर में ठिकाना है। सुकुर के परिवार के रियाजुल ने बताया कि सालों से वे लोग किराए का मकान लेकर रहते हैं। पट्टी, अंतू व लालगंज में भी कबाड़ का काम करने वाले लोगों के परिवार के सदस्य रहते हैं। वे लोग शहर व गांवों से कबाड़ बिनकर लाते हैं। उसकी छटाई करने के बाद शहर के अख्तर कबाड़ी, सलीम व घम्मू की दुकानों पर बेच दिया करते हैं। चूंकि किराए के कमरे के बाहर खडाली जगह है। इसलिए कबाड़ का सामान रखने व छांटने में कोई दिक्कत नहीं आती। सुकुर के पिता के नाम से कांशीराम कालोनी सरोज चौराहे में कमरा आवंटित है। सभी परिवारों ने अपना आधार कार्ड यहां की ही बनवा रखा है। बच्चों को प्राइमरी विद्यालय में पढ़ने के लिए भेजते हैं।
ग्रामीणों ने दिखाई दरियदिली , मंगाई जाल, युवक खोजबीन में जुटे
कबाड़ बीनने वाले परिवार के तीन लोगों के सई नदी में डूबने की खबर से दहिलामऊ के युवक बड़ी संख्या में पहुंचे। गरीब परिवार के नाते हर कोई उनकी मदद के लिए आगे आया। पुलिस लाइन फायरब्रिगेड से समय पर न तो रस्सा पहुंचा और न ही जाल। जिसके बाद दहिलामऊ् के ग्रामीणों ने जाल मंगाई। कुछ दूसरे युवक भी नदी में डूबे लड़कों की तलाश में उतरे। जिसके चलते जल्दी कामयाबी मिल गई।
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नगर कोतवाली के दहिलामऊ में हादसा, काफी मशक्कत के बाद बरामद हुई तीनों की शव
नगर पालिका के कूड़े में कबाड़ बीनने गए थे सई नदी तेलिया दह के किनारे, डटी रही पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। नगर कोतवाली के दहिलामऊ इलाके में मंगलवार को सई नदी में नहाते समय डूबने से सगे भाइयों समेत तीन लोगों की मौत हो गई। घटना से कोहराम मच गया। घंटों मशक्कत के बाद उनके शव बरामद किए जा सके। शव देख परिजन बिलखने लगे। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची।
मूलत: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जनपद के शमशेरगंज थाना क्षेत्र के किशनगंज का रहने वाला सुकुर अपने परिवार के साथ नगर कोतवाली के पूर्वी सहोदरपुर में गुड्डू के मकान में किराए पर रहता है। सुकुर का पूरा परिवार कबाड़ बीनने का काम करता है। मंगलवार की सुबह सुकुर का बड़ा बेटा हबीबुल (19) अपने छोटे भाई सहीबुल (08) के साथ कबाड़ बीनने के लिए ठेला लेकर कमरे से निकला। उसके साथ बगल का रहने वाला आकाश (16) व उसका छोटा भाई सुजीत पुत्र नासिर भी था। तीनों ठेला लेकर गायघाट रोड दहिलामऊ मारुत नगर पहुंचे। सुबह करीब नौ बजे सई नदी के किनारे नगर पालिका द्वारा गिराए गए कूड़े में कबाड़ का सामान तलाशने लगे। कुछ देर तक सामान बीनने के बाद सभी तेलिया दह के करीब मछली पकड़ने लगे। करीब साढ़े दस बजे मछली पकड़ने के बाद हबीबुल नदी में नहाने लगा। उसके पीछे आकाश भी कपड़ा उतारकर नहाने के लिए नदी में उतर गया। दोनों को नहाते देख सहीबुल भी आ गया। अचानक सहीबुल नदी में डूबने लगा। यह देख उसे बचाने के लिए उसका बड़ा भाई हबीबुल आ गया, लेकिन वह भी डूबने लगा। दोनों को डूबते देख आकाश ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन वह भी डूबने लगा। तैरना न आने के कारण तीनों डूब गए। यह देख सुजीत शोर मचाते हुए ऊपर की ओर भागा। नदी के दूसरे छोर पर बैठे लोगों ने भी शोर मचाया। जिसके बाद मारुत नगर कालोनी में काम कर रहे लोग दौड़ पड़े। काम करने वाला फूलचंद्र नदी में कूद पड़ा। उसने नदी में डूबे आकाश को बाहर निकाल लिया, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंच गई। पुलिस उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंची। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस बीच ग्रामीणों के साथ ही सिविल लाइन चौकी प्रभारी भी पहुंच गए। स्थानीय गोताखोरों की मदद से नदी में डूबे सगे भाइयों की तलाश की जाने लगी। दोपहर करीब दो बजे गोताखोर ने नदी से हबीबुल को बाहर निकाला। उसकी सांसें थम चुकी थीं। यह देख परिजन बिलखने लगे। करीब चार बजे सहीबुल को भी लोगों ने बाहर निकाला, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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पिता ने सिर पर पटक ली ईंट
कबाड़ का काम करने वाले सुकुर की पांच संतानें थीं। दो बेटों के नदी में डूबने से मौत की खबर मिलने पर वह बेहोश हो गया। कुछ देर बाद होश में आया तो अपने सिर पर ईंट पटक लिया। जिससे वह खून से लथपथ हो गया। परिवार के सदस्यों ने उसे पकड़ लिया। वह फिर बेहोश हो गया।
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तेलिया दह से लेकर पूर्वी सहोदरपुर तक मचा रहा कोहराम
दो सगे भाइयों के साथ ही किशोर के सई नदी में डूबने से तीन मौतों की खबर पर तेलिया दह से लेकर पूर्वी सहोदरपुर तक कोहराम मचा रहा। हबीबुल की मां व बहन नदी के किनारे पहुंच गई। सभी रोने बिलखने लगी। महिला सिपाहियों को पकड़कर बहन रोती रहीं। उन्हें रोता देख महिला सिपाही की आंख से भी आंसू निकल आए। जिला अस्पताल में भी शव देखने के बाद लोग रोते बिलखते रहे। सुकुर के ठिकाने पर भी लोगों का जमघट लगा रहा। आकाश का परिवार घम्मू के अहाते में रहता है। वहां भी लोग रोते बिलखते रहे। नदी के किनारे पड़े बेटों के कपड़ों को देखकर मां रोती बिलखती रही। कपड़ों के पास ही शराब की बोतल भी पड़ी थी।
तीन दशक से पूर्वी सहोदरपुर में है 15 परिवारों का है ठिकाना
पश्चिम बंगाल के रहने वाले 15 परिवारों का तीन दशक से अधिक समय से पूर्वी सहोदरपुर में ठिकाना है। सुकुर के परिवार के रियाजुल ने बताया कि सालों से वे लोग किराए का मकान लेकर रहते हैं। पट्टी, अंतू व लालगंज में भी कबाड़ का काम करने वाले लोगों के परिवार के सदस्य रहते हैं। वे लोग शहर व गांवों से कबाड़ बिनकर लाते हैं। उसकी छटाई करने के बाद शहर के अख्तर कबाड़ी, सलीम व घम्मू की दुकानों पर बेच दिया करते हैं। चूंकि किराए के कमरे के बाहर खडाली जगह है। इसलिए कबाड़ का सामान रखने व छांटने में कोई दिक्कत नहीं आती। सुकुर के पिता के नाम से कांशीराम कालोनी सरोज चौराहे में कमरा आवंटित है। सभी परिवारों ने अपना आधार कार्ड यहां की ही बनवा रखा है। बच्चों को प्राइमरी विद्यालय में पढ़ने के लिए भेजते हैं।
ग्रामीणों ने दिखाई दरियदिली , मंगाई जाल, युवक खोजबीन में जुटे
कबाड़ बीनने वाले परिवार के तीन लोगों के सई नदी में डूबने की खबर से दहिलामऊ के युवक बड़ी संख्या में पहुंचे। गरीब परिवार के नाते हर कोई उनकी मदद के लिए आगे आया। पुलिस लाइन फायरब्रिगेड से समय पर न तो रस्सा पहुंचा और न ही जाल। जिसके बाद दहिलामऊ् के ग्रामीणों ने जाल मंगाई। कुछ दूसरे युवक भी नदी में डूबे लड़कों की तलाश में उतरे। जिसके चलते जल्दी कामयाबी मिल गई।

नगर कोतवाली के तेलियादह के समीप सई नदी में डूबने से मृत किशोर हबीबुल। फाइल फोटो- फोटो : PRATAPGARH

सई नदी में डूबने से मृत आकाश। फाइल फोटो- फोटो : PRATAPGARH