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इस बार भी शहरियों के घरों में घुसेगा नालों का पानी
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Mon, 16 Apr 2018 12:33 AM IST
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नगर पालिका की लापरवाही का खामियाजा इस बार भी शहरियों को भुगतना पड़ेगा। अधिकांश मोहल्लों में जलनिकासी की समस्या से नागरिकों को जूझना पड़ता है। गत दिनों हल्की बारिश में नया मालगोदाम रोड के निवासियों को समस्या का सामना करना पड़ा था। पालिका ने जलनिकासी की समस्या को दूर करने के लिए अभी तक कोई ठोस प्रयास शुरू तक नहीं किया है। जिससे आने वाले दिनों में शहरियों को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।
नगर पालिका के अधिकांश वार्डों में जलनिकासी की समस्या रहती है। हर मोहल्ले में कोई न कोई बस्ती जलनिकासी की समस्या से प्रभावित है। सुबह व शाम पानी सप्लाई के समय नालियों का पानी सड़कों पर बहने लगता है। शहर के पल्टन बाजार, विवेक नगर, टक्करगंज, मकंद्रूगंज वार्ड, धर्मशाला वार्ड से लेकर पश्चिमी सहोदरपुर वार्ड में जलभराव की समस्या देखने को मिलती है। इनमें से कुछ मोहल्लों का पानी इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग से होकर निकलता है।
बरसात में यह समस्या विकराल रूप ले लेती है। नालियों की चौड़ाई कम होने से पानी निकल नहीं पाता। खास बात यह है कि जो भी नाले बने हैं, उनका ढलान मानक के अनुरूप नहीं किया गया है। जिससे पानी भरने के बाद ही आगे की ओर बढ़ता है। निकाय चुनाव के दौरान अध्यक्ष व सभासद प्रत्याशियों के सामने भी नागरिकों ने जलनिकासी की समस्या उठाई थी। बोर्ड की पहली बैठक में जलनिकासी की समस्या का मुद्दा उठाया भी गया, लेकिन अभी तक इस दिशा में नगर पालिका की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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पालिका की ओर से केवल अवस्थापना निधि से नया माल गोदाम रोड के किनारे बनने वाले नाले का टेंडर निकाला गया है, लेकिन यह कब बनेगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल आने वाले दिनों में शहरियों को जलभराव व जलनिकासी की समस्या से जूझना होगा। पालिका की लापरवाही का दंश शहरियों को भुगतना पड़ेगा।
उधारी के अवर अभियंता से कब तक चलेगा काम
नगर पालिका के जेई रहे ओमप्रकाश पांडेय का पदोन्नति के बाद कई माह पहले लखनऊ स्थानांतरण हो गया। जिसके बाद लोक निर्माण विभाग के जेई को पालिका से संबंद्ध कर दिया गया। वह पालिका को बहुत कम समय दे पाते हैं। इससे सड़क, नाला व नाली से संबंधित निर्माण कार्यों का इस्टीमेट तैयार करने में दिक्कत होती है। शहर के विकास से संबंधित समस्याओं के निस्तारण जेई की जरूरत पड़ती है। जेई के न होने से तत्काल प्रकरण का निस्तारण तक नहीं हो पाता। कमोवेश नगर पंचायतों का भी यही हाल है। जहां उधारी के जेई से काम चलाया जा रहा है।
सैयाबांध की ओर नहीं निकलता शहर का पानी
इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग पर बनाया गया नाला लोगों ने पाट लिया है। जिसके चलते इस मोहल्ले में भी लोगों को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है। शहर का पानी भी पहले सैयाबांध की ओर निकल जाता था लेकिन अब पानी नहीं निकल पाता। भंगवा चुंगी पर बने प्वाइंट सकरा होने के कारण पानी निकलने में दिक्कत होती है।
पालिका रही खामोश, नालियों की चौड़ाई हो गई कम
नगर पालिका की खामोशी का फायदा शहरियों ने भी खूब उठाया। गलियों की बात छोड़िए, इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग पर नए भवन बनाने वालों ने भी मनमानी की। पुराने नालों व नालियों को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद बीच-बीच में उसकी चौड़ाई कम कर नया निर्माण कर दिया। जिससे जलनिकासी में बाधा पैदा होने की बात सामने आई है। जब शहर में जलभराव की समस्या पैदा होती है तो नालों व नालियों की याद संबंधित अधिकारियों को आने लगती है। निर्माण के दौरान पालिका के सुपरवाइजर से लेकर कर्मचारी तक खामोशी की चादर ओढ़े रहते हैं। अधिकांश मोहल्ले की गलियों में भी लोगों ने अपने तरीके से नालियों का निर्माण करा लिया है। पंजाबी मार्केट में तो बहुत से दुकानदारों ने नालियों की चौड़ाई ही खत्म कर दी है। सब्जी मंडी में नाला गायब हो गया है।
शहर की जलनिकासी के लिए प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए जलनिगम को पत्र भेजा गया था, ताकि उस प्रोजेक्ट रिपोर्ट के साथ ही समस्या के निस्तारण के लिए शासन को पत्र भेजकर बजट की व्यवस्था कराई जा सके लेकिन जलनिगम की ओर से कोई रिपोर्ट नहीं दी गई। फिर से पत्र भेजा जाएगा। चूंकि पालिका के पास शहर की जलनिकासी के लिए इंजीनियरिंग क्षमता का अभाव है।
अवधेश यादव, ईओ नगर पालिका।
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नगर पालिका के अधिकांश वार्डों में जलनिकासी की समस्या रहती है। हर मोहल्ले में कोई न कोई बस्ती जलनिकासी की समस्या से प्रभावित है। सुबह व शाम पानी सप्लाई के समय नालियों का पानी सड़कों पर बहने लगता है। शहर के पल्टन बाजार, विवेक नगर, टक्करगंज, मकंद्रूगंज वार्ड, धर्मशाला वार्ड से लेकर पश्चिमी सहोदरपुर वार्ड में जलभराव की समस्या देखने को मिलती है। इनमें से कुछ मोहल्लों का पानी इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग से होकर निकलता है।
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बरसात में यह समस्या विकराल रूप ले लेती है। नालियों की चौड़ाई कम होने से पानी निकल नहीं पाता। खास बात यह है कि जो भी नाले बने हैं, उनका ढलान मानक के अनुरूप नहीं किया गया है। जिससे पानी भरने के बाद ही आगे की ओर बढ़ता है। निकाय चुनाव के दौरान अध्यक्ष व सभासद प्रत्याशियों के सामने भी नागरिकों ने जलनिकासी की समस्या उठाई थी। बोर्ड की पहली बैठक में जलनिकासी की समस्या का मुद्दा उठाया भी गया, लेकिन अभी तक इस दिशा में नगर पालिका की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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पालिका की ओर से केवल अवस्थापना निधि से नया माल गोदाम रोड के किनारे बनने वाले नाले का टेंडर निकाला गया है, लेकिन यह कब बनेगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल आने वाले दिनों में शहरियों को जलभराव व जलनिकासी की समस्या से जूझना होगा। पालिका की लापरवाही का दंश शहरियों को भुगतना पड़ेगा।
उधारी के अवर अभियंता से कब तक चलेगा काम
नगर पालिका के जेई रहे ओमप्रकाश पांडेय का पदोन्नति के बाद कई माह पहले लखनऊ स्थानांतरण हो गया। जिसके बाद लोक निर्माण विभाग के जेई को पालिका से संबंद्ध कर दिया गया। वह पालिका को बहुत कम समय दे पाते हैं। इससे सड़क, नाला व नाली से संबंधित निर्माण कार्यों का इस्टीमेट तैयार करने में दिक्कत होती है। शहर के विकास से संबंधित समस्याओं के निस्तारण जेई की जरूरत पड़ती है। जेई के न होने से तत्काल प्रकरण का निस्तारण तक नहीं हो पाता। कमोवेश नगर पंचायतों का भी यही हाल है। जहां उधारी के जेई से काम चलाया जा रहा है।
सैयाबांध की ओर नहीं निकलता शहर का पानी
इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग पर बनाया गया नाला लोगों ने पाट लिया है। जिसके चलते इस मोहल्ले में भी लोगों को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है। शहर का पानी भी पहले सैयाबांध की ओर निकल जाता था लेकिन अब पानी नहीं निकल पाता। भंगवा चुंगी पर बने प्वाइंट सकरा होने के कारण पानी निकलने में दिक्कत होती है।
पालिका रही खामोश, नालियों की चौड़ाई हो गई कम
नगर पालिका की खामोशी का फायदा शहरियों ने भी खूब उठाया। गलियों की बात छोड़िए, इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग पर नए भवन बनाने वालों ने भी मनमानी की। पुराने नालों व नालियों को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद बीच-बीच में उसकी चौड़ाई कम कर नया निर्माण कर दिया। जिससे जलनिकासी में बाधा पैदा होने की बात सामने आई है। जब शहर में जलभराव की समस्या पैदा होती है तो नालों व नालियों की याद संबंधित अधिकारियों को आने लगती है। निर्माण के दौरान पालिका के सुपरवाइजर से लेकर कर्मचारी तक खामोशी की चादर ओढ़े रहते हैं। अधिकांश मोहल्ले की गलियों में भी लोगों ने अपने तरीके से नालियों का निर्माण करा लिया है। पंजाबी मार्केट में तो बहुत से दुकानदारों ने नालियों की चौड़ाई ही खत्म कर दी है। सब्जी मंडी में नाला गायब हो गया है।
शहर की जलनिकासी के लिए प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए जलनिगम को पत्र भेजा गया था, ताकि उस प्रोजेक्ट रिपोर्ट के साथ ही समस्या के निस्तारण के लिए शासन को पत्र भेजकर बजट की व्यवस्था कराई जा सके लेकिन जलनिगम की ओर से कोई रिपोर्ट नहीं दी गई। फिर से पत्र भेजा जाएगा। चूंकि पालिका के पास शहर की जलनिकासी के लिए इंजीनियरिंग क्षमता का अभाव है।
अवधेश यादव, ईओ नगर पालिका।