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Pratapgarh News: रामपुर खागल में बही अमृत रसधारा, अवधी भजन से कथा का शुभारंभ
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तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य ने शुक्रवार को रामपुर खागल में श्रीमद्भागवत कथा की शुरुआत अवधी में तड़पत मोर प्राण राम कब दर्शन देहौ...भजन से की। भजन के बीच भक्तों की तालियों की गड़गड़ाहट से कथा स्थल गूंज उठा। शाम चार बजे कथा शुरू हुई। दोपहर से ही दूरदराज से भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था।
कथा जैसे-जैसे आगे बढ़ी पड़ाल में भक्तों के बैठने की जगह कम पड़ गई। आस्था का हुजूम रामपुर खागल में उमड़ पड़ा। हर ओर सिर्फ भक्ति की बयार बह रही थी। शुक्रवार अयोध्या से परमहंस दास पहुंचे। जगद्गुरु रामभद्राचार्य का आशीर्वाद लिया। देरशाम तक पंडाल में बैठ कथा का श्रवण किया। शाम सात बजे तक कथा की अमृत रसधारा से रामपुर खागल सराबोर रहा। देरशाम गायिका विदयादुबे ने सांस्कृतिक संध्या में रंगारंग प्रस्तुति दी। कथा समापन पर भक्तों के लिए प्रसाद के रूप में छोला-चावल वितरित किया गया। शनिवार को कथा शाम तीन बजे से शुरू होगी।
कथा सुनाते हुए आंख से छलके आंसू
कथा के पहले स्वामी रामभद्राचार्य ने भगवान के 24 अवतारों का वर्णन किया। भगवान कृष्ण के जन्म, वासुदेव द्वारा उन्हें उनकी मां से दूर ले जाने के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। भगवान कृष्ण की मां देवकी के विरह का वर्णन करते हुए स्वामी रामभद्राचार्य की आंखों से आंसू छलक उठे। साथ ही उन्होंने कथा के महात्म का भी वर्णन किया। भागवत क्या है और उसका श्रवण करने से किस तरह लाभ प्राप्त होता है उसका वर्णन किया। बताया कि जब तक सीताराम जी हमारा आलिगन करते रहे, गले लगाते रहे तब तक हमें भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। उन्होंने अपनी माता जी के बारे में चर्चा की। रसालम की सुंदर व्याख्या की। कहा, ब्रह्मा को ब्रह्मलोक, शंकर जी को कैलाश, हमको तो सिर्फ भरतहि चाहिए। भगवान ही भागवत है उनके छह गुण हैं। ऐश्वर्या, धर्म ,यश, श्री, ज्ञान, और वैराग्य। भागवत के समस्त अध्यायों में भगवान के गुणों की व्याख्या की गई है।
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तनाव से लड़ें, भागें नहीं
स्वामी राम भद्राचार्य ने कहा कि आज लोग समस्या से भागना चाहते हैं। समस्या तो आती रहेगी। तनाव की वजह से लोग दर्द की गोली खाते हैं, नशा करते हैं और कभी-कभी तो आत्महत्या कर लेते हैं तो इससे घबराना नहीं है। सुंदरकांड का प्रतिदिन पाठ करो 49 दिनों में बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा। जगतगुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि कथा वाचक पढ़ते नहीं हैं। ऐसी दशा में कथा का सही विश्लेषण नहीं हो पता। अरबपति बनने के लिए वक्ता नहीं होना चाहिए। कथा का ज्ञान और उसका स्वरूप,उसका विश्लेषण सही ढंग से होगा तभी कथा श्रवण का सही लाभ मिलेगा।
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कथा जैसे-जैसे आगे बढ़ी पड़ाल में भक्तों के बैठने की जगह कम पड़ गई। आस्था का हुजूम रामपुर खागल में उमड़ पड़ा। हर ओर सिर्फ भक्ति की बयार बह रही थी। शुक्रवार अयोध्या से परमहंस दास पहुंचे। जगद्गुरु रामभद्राचार्य का आशीर्वाद लिया। देरशाम तक पंडाल में बैठ कथा का श्रवण किया। शाम सात बजे तक कथा की अमृत रसधारा से रामपुर खागल सराबोर रहा। देरशाम गायिका विदयादुबे ने सांस्कृतिक संध्या में रंगारंग प्रस्तुति दी। कथा समापन पर भक्तों के लिए प्रसाद के रूप में छोला-चावल वितरित किया गया। शनिवार को कथा शाम तीन बजे से शुरू होगी।
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कथा सुनाते हुए आंख से छलके आंसू
कथा के पहले स्वामी रामभद्राचार्य ने भगवान के 24 अवतारों का वर्णन किया। भगवान कृष्ण के जन्म, वासुदेव द्वारा उन्हें उनकी मां से दूर ले जाने के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। भगवान कृष्ण की मां देवकी के विरह का वर्णन करते हुए स्वामी रामभद्राचार्य की आंखों से आंसू छलक उठे। साथ ही उन्होंने कथा के महात्म का भी वर्णन किया। भागवत क्या है और उसका श्रवण करने से किस तरह लाभ प्राप्त होता है उसका वर्णन किया। बताया कि जब तक सीताराम जी हमारा आलिगन करते रहे, गले लगाते रहे तब तक हमें भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। उन्होंने अपनी माता जी के बारे में चर्चा की। रसालम की सुंदर व्याख्या की। कहा, ब्रह्मा को ब्रह्मलोक, शंकर जी को कैलाश, हमको तो सिर्फ भरतहि चाहिए। भगवान ही भागवत है उनके छह गुण हैं। ऐश्वर्या, धर्म ,यश, श्री, ज्ञान, और वैराग्य। भागवत के समस्त अध्यायों में भगवान के गुणों की व्याख्या की गई है।
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तनाव से लड़ें, भागें नहीं
स्वामी राम भद्राचार्य ने कहा कि आज लोग समस्या से भागना चाहते हैं। समस्या तो आती रहेगी। तनाव की वजह से लोग दर्द की गोली खाते हैं, नशा करते हैं और कभी-कभी तो आत्महत्या कर लेते हैं तो इससे घबराना नहीं है। सुंदरकांड का प्रतिदिन पाठ करो 49 दिनों में बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा। जगतगुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि कथा वाचक पढ़ते नहीं हैं। ऐसी दशा में कथा का सही विश्लेषण नहीं हो पता। अरबपति बनने के लिए वक्ता नहीं होना चाहिए। कथा का ज्ञान और उसका स्वरूप,उसका विश्लेषण सही ढंग से होगा तभी कथा श्रवण का सही लाभ मिलेगा।