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बेहिसाब हैं करोड़ों रुपये के विद्युत पोल
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Wed, 17 Dec 2014 11:20 PM IST
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गांवों में लोगों को बिजली कनेक्शन लेने के लिए खंभे नहीं मिल रहे हैं। जबकि हजारों खंभे बिना काम के जगह-जगह लगे हैं। और उन खंभों पर आज तक तार भी नहीं खींचा गया। वहीं, तमाम खंभे ऐसे हैं जिनका तार किन्हीं न किन्हीं कारणों से उतारा जा चुका है। ऐसे में बिजली विभाग की लापरवाही ने लोगों को परेशान कर दिया है। लोग परेशान हैं कि उन्हें पोल नहीं मिल रहा। विभाग की लापरवाही को मंडलायुक्त बीके सिंह ने गंभीरता से लिया है।
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में विद्युत विभाग ने पोल खड़ा कर दिया है। मगर उन पर बिजली का तार नहीं खींचा जा सका। ये पोल न तो विभाग के काम आ रहे और न ही ग्रामीणों के। इतना जरूर है कि उन खंभों की खरीद पर करोड़ों रुपया बेकार साबित हो रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिले में लगे खंभों का रिकार्ड विभाग के पास नहीं है। जानकारों की मानें तो विभाग के पास इसका सारा ब्योरा होना चाहिए। बताया तो यह भी जा रहा है कि हर साल खंभों की नंबरिंग पर विभाग लाखों रुपये खर्च करता है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर उन खंभों की जरूरत नहीं तो उन्हें निकालकर गोदामों में क्यों नहीं रखवाता। क्या, अफसरों को विभाग की संपत्ति की बर्बादी से कोई वास्ता नहीं है? बहरहाल, एक बात साफ है कि अनावश्क गड़े खंभे बर्बाद हो रहे हैं और जरूरतमंदों को गोदाम व अधिकारियों की परिक्रमा के बाद भी पोल नहीं मिल रहा है। विभागीय अधिकारियों की आंख में पट्टी भले बंधी हो पर मंगलवार को जनपद आए मंडलायुक्त ने इस मामले को गंभीरता से लिया। बिजली विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे फालतू गड़े खंभों को उखड़वा कर गोदाम में रखवाएं। इसकी वीडियोग्राफी कराने का भी निर्देश दिया।
एसपी मिश्र एक्सईएन विद्युत ने बताया शहर से गांव तक कितने खंभे गड़े हैं यह बता पाना मुश्किल है। क्योंकि सभी खंभों की नम्बरिंग नहीं होती। शहर के खंभों पर नम्बर पड़ता है, मगर उसका भी कोई खास रिकार्ड नहीं होता। कभी इसकी कोई जरूरत ही नहीं पड़ती। मंडलायुक्त के निर्देश का अनुपालन सख्ती से कराया जाएगा।
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शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में विद्युत विभाग ने पोल खड़ा कर दिया है। मगर उन पर बिजली का तार नहीं खींचा जा सका। ये पोल न तो विभाग के काम आ रहे और न ही ग्रामीणों के। इतना जरूर है कि उन खंभों की खरीद पर करोड़ों रुपया बेकार साबित हो रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिले में लगे खंभों का रिकार्ड विभाग के पास नहीं है। जानकारों की मानें तो विभाग के पास इसका सारा ब्योरा होना चाहिए। बताया तो यह भी जा रहा है कि हर साल खंभों की नंबरिंग पर विभाग लाखों रुपये खर्च करता है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर उन खंभों की जरूरत नहीं तो उन्हें निकालकर गोदामों में क्यों नहीं रखवाता। क्या, अफसरों को विभाग की संपत्ति की बर्बादी से कोई वास्ता नहीं है? बहरहाल, एक बात साफ है कि अनावश्क गड़े खंभे बर्बाद हो रहे हैं और जरूरतमंदों को गोदाम व अधिकारियों की परिक्रमा के बाद भी पोल नहीं मिल रहा है। विभागीय अधिकारियों की आंख में पट्टी भले बंधी हो पर मंगलवार को जनपद आए मंडलायुक्त ने इस मामले को गंभीरता से लिया। बिजली विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे फालतू गड़े खंभों को उखड़वा कर गोदाम में रखवाएं। इसकी वीडियोग्राफी कराने का भी निर्देश दिया।
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एसपी मिश्र एक्सईएन विद्युत ने बताया शहर से गांव तक कितने खंभे गड़े हैं यह बता पाना मुश्किल है। क्योंकि सभी खंभों की नम्बरिंग नहीं होती। शहर के खंभों पर नम्बर पड़ता है, मगर उसका भी कोई खास रिकार्ड नहीं होता। कभी इसकी कोई जरूरत ही नहीं पड़ती। मंडलायुक्त के निर्देश का अनुपालन सख्ती से कराया जाएगा।
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