जिले में रुक-रुककर बरसात होने के बाद भी ठेकेदारों ने सड़कों के निर्माण का सिलसिला बंद नहीं किया है। इससे सड़कों के उखड़ने का खतरा बना हुआ है। इधर, ठेकेदार आनन-फानन में कार्य कराकर भुगतान लेने की फिराक में हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से ठेकेदार अपने खेल में सफल हैं। जिले में लगभग चार दिनों से रुक-रुककर बरसात हो रही है। मगर इसके बाद भी ठेकेदार सड़कों को काली कराने में जुटे हुए हैं। सड़कों को काली करने में केमिकल इतना अधिक डाला जा रहा है कि निर्माण के समय तो काली गिट्टियां सड़क से चिपक जा रही हैं। तेज बारिश होने के बाद वाहनों का दबाव बढने पर यह गिट्टियां उखड़कर किनारे लग जाएंगी।
दरअसल, जिले में 25 जून से बरसात होती थी, मगर इस बार दस दिन पहले से बारिश शुरू हो गई। ठेकेदार भुगतान लेने के लिए किसी तरह सड़क को काली करने में जुटे हुए हैं। विभागीय अधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं। जिले में सड़कों के गड्ढे पाटने और मरम्मत कराने के लिए 2.34 करोड़ रुपये आए हुए थे। लॉकडाउन में बची धनराशि का उपयोग करने का विभागीय अधिकारियों को इशारा मिलते ही ठेकेदारों ने निर्माण कराना शुरु कर दिया। अब पानी बरस रहा है और सड़कों का निर्माण हो रहा है। गायघाट रोड, प्रतापगढ़-अमेठी राजमार्ग और राजापाल टंकी से डीआईओएस कार्यालय तक सड़क को काली करने में मशीनें लगी हुई हैं।