{"_id":"5aa4230b4f1c1bb0758b4ae2","slug":"tax-munispality","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर के 800 मकान कर के दायरे में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर के 800 मकान कर के दायरे में
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 11 Mar 2018 12:03 AM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
शहर में बनाए गए आठ सौ मकान अभी तक कर के दायरे से बाहर थे। जिन्हें अब कर देना होगा। नगर पालिका की ओर से 31 मार्च के बाद अभियान चलाया जाएगा। साथ ही व्यवसायिक भवनों पर कर का पुनर्निर्धारण होगा। इसके लिए पालिका ने टीमें गठित की हैं, ताकि पालिका आय में इजाफा किया जा सके।
नगर पालिका परिषद की ओर से शहरवासियों को बेहतर सुविधाएं और संसाधन मुहैया कराने के लिए कर वसूलने का प्राविधान है। नियमानुसार जलकर व भवन कर के रूप में वसूले जाने वाले कर का समय-समय पर पुनर्निर्धारण होते रहना चाहिए, लेकिन नगर पालिका में वर्ष 2003 के बाद भवनों के कर का पुनर्निर्धारण नहीं हो सका। 2011 में स्वत: कर प्रणाली लागू होने के कारण कर निर्धारिण जांच के बाद पालिका करने लगी। तब से यह व्यवस्था चल रही है। ऐसे में शहर में बड़े पैमाने पर भवन कर के दायरे में नहीं आ सके हैं। ऐसे भवन शहर के 25 वार्डों में हैं, लेकिन वे नगर पालिका को कर नहीं दे रहे हैं।
जिसके कारण पालिका को नुकसान उठाना पड़ रहा है। पालिका में साढ़े तेरह हजार के करीब भवन दर्ज हैं लेकिन इसकी संख्या अधिक आंकी गई है। बहुत से ऐसे मकान हैं जो कर देने से बचने के लिए नगर पालिका में मकान का पंजीकरण तक नहीं कराएं हैं। इसमे आलीशान मकान से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान भी शामिल हैं। शासन के निर्देश पर पालिका की आय बढ़ाने के लिए कर के दायरे में न आने वाले मकानों को भी पालिका में पंजीकृत करने का फैसला लिया गया है। ऐसे मकानों को पालिका चिन्हित कर चुकी है। नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी अवधेश यादव ने बताया कि ऐसे लगभग 800 मकानों को चिन्हित कर लिया गया है। गांव के सीमावर्ती इलाके वाले मोहल्लों में इसकी संख्या अधिक है। ऐसे भवनों को 31 मार्च के बाद अभियान चलाकर दायरे में लाया जाएगा, ताकि पालिका की आय में इजाफा हो सके। इसके लिए कर अधीक्षक को ऐसे भवनों की सूची तैयार करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही व्यवसायिक भवनों के टैक्स का भी पुनर्निर्धारण किया जाएगा। इससे पालिका का कोष बढ़ाया जा सकेगा।
विज्ञापन
शहर में रहने वाले लोगों को हर सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। नए भवनों का टैक्स लगेगा। यदि पक्का रास्ता नहीं है तो वहां तक जलनिकासी के साथ ही पक्के रास्ते का निर्माण होगा। पेयजल के लिए कनेक्शन नहीं है तो उसे भी लगवाया जाएगा।
नगर पालिका क्षेत्र के सीमा वाले मोहल्लों में अधिक मकान बने हैं। मकान का निर्माण कराने के बाद लोग नगर पालिका में भवन का पंजीकरण कराना भूल गए। कई भवनों में व्यवसायिक काम भी होते हैं। यहां तक कि शहर में बने मकानों को व्यापारी गोदाम के रूप में प्रयोग करते हैं।
विज्ञापन
नगर पालिका परिषद की ओर से शहरवासियों को बेहतर सुविधाएं और संसाधन मुहैया कराने के लिए कर वसूलने का प्राविधान है। नियमानुसार जलकर व भवन कर के रूप में वसूले जाने वाले कर का समय-समय पर पुनर्निर्धारण होते रहना चाहिए, लेकिन नगर पालिका में वर्ष 2003 के बाद भवनों के कर का पुनर्निर्धारण नहीं हो सका। 2011 में स्वत: कर प्रणाली लागू होने के कारण कर निर्धारिण जांच के बाद पालिका करने लगी। तब से यह व्यवस्था चल रही है। ऐसे में शहर में बड़े पैमाने पर भवन कर के दायरे में नहीं आ सके हैं। ऐसे भवन शहर के 25 वार्डों में हैं, लेकिन वे नगर पालिका को कर नहीं दे रहे हैं।
विज्ञापन
जिसके कारण पालिका को नुकसान उठाना पड़ रहा है। पालिका में साढ़े तेरह हजार के करीब भवन दर्ज हैं लेकिन इसकी संख्या अधिक आंकी गई है। बहुत से ऐसे मकान हैं जो कर देने से बचने के लिए नगर पालिका में मकान का पंजीकरण तक नहीं कराएं हैं। इसमे आलीशान मकान से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान भी शामिल हैं। शासन के निर्देश पर पालिका की आय बढ़ाने के लिए कर के दायरे में न आने वाले मकानों को भी पालिका में पंजीकृत करने का फैसला लिया गया है। ऐसे मकानों को पालिका चिन्हित कर चुकी है। नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी अवधेश यादव ने बताया कि ऐसे लगभग 800 मकानों को चिन्हित कर लिया गया है। गांव के सीमावर्ती इलाके वाले मोहल्लों में इसकी संख्या अधिक है। ऐसे भवनों को 31 मार्च के बाद अभियान चलाकर दायरे में लाया जाएगा, ताकि पालिका की आय में इजाफा हो सके। इसके लिए कर अधीक्षक को ऐसे भवनों की सूची तैयार करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही व्यवसायिक भवनों के टैक्स का भी पुनर्निर्धारण किया जाएगा। इससे पालिका का कोष बढ़ाया जा सकेगा।
विज्ञापन
शहर में रहने वाले लोगों को हर सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। नए भवनों का टैक्स लगेगा। यदि पक्का रास्ता नहीं है तो वहां तक जलनिकासी के साथ ही पक्के रास्ते का निर्माण होगा। पेयजल के लिए कनेक्शन नहीं है तो उसे भी लगवाया जाएगा।
नगर पालिका क्षेत्र के सीमा वाले मोहल्लों में अधिक मकान बने हैं। मकान का निर्माण कराने के बाद लोग नगर पालिका में भवन का पंजीकरण कराना भूल गए। कई भवनों में व्यवसायिक काम भी होते हैं। यहां तक कि शहर में बने मकानों को व्यापारी गोदाम के रूप में प्रयोग करते हैं।