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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   Six times in the book and copy commission

किताब और कापी में छह गुना कमीशन

Sun, 12 Apr 2015 11:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़ Updated Sun, 12 Apr 2015 11:24 PM IST
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निजी स्कूलों के संचालक फीस ही नहीं पुस्तकों के कमीशन से भी मालामाल हो रहे हैं। इसीलिए वे हर साल कोर्स की किताबें बदल देतें हैं ताकि भाई, बहन या दोस्त की पुस्तक दूसरे के काम न आ सके।
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जवाहर नवोदय विद्यालय नारायणपुर में कक्षा छह में हिंदी, अंग्रेजी, गणित एवं पर्यावरण अध्ययन सहित अनेक विषय पढ़ाए जाते हैं। सभी विषयों की पुस्तकों का मूल्य लगभग साढ़े तीन सौ रुपए है जबकि सीबीएसई से संबद्ध निजी स्कूलों में कक्षा चार में ही लगभग 15 किताबें पढ़ाई जाती हैं। इन पुस्तकों की कीमत 3200-4100 रुपये के बीच है। निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लागू करने के पीछे और कुछ नहीं बल्कि भारी-भरकम मिलने वाला कमीशन है। लगभग छह गुना मिलने वाले कमीशन से स्कूल संचालक मालामाल हो रहे हैं।
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सीबीएसई बोर्ड से संचालित निजी स्कूलोें की मनमानी का आलम यह है कि वह प्रतिवर्ष नए पाठ्यक्रम की पुस्तकें लागू कर रहे हैं। स्कूलोें में एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाई जा रही हैं, वहीं निजी स्कूल उसकी गाइड लाइन का मखौल उड़ा रहे हैं। प्रतापगढ़ में सीबीएसई से संबद्ध सात स्कूल हैं। इसमें नवोदय को छोड़ दिया जाए तो किसी भी स्कूल में एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू नहीं हैं। जबकि इन स्कूलों में एनसीईआरटी पुस्तकों का पढ़ाया जाना अनिवार्य है।
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स्कूल कैंपस में ही निजी प्रकाशकों की किताबें बेची जा रही हैं। अधिकांश स्कूल ऐसे हैं जहां कमीशन सेट कर दिया गया है। स्कूल में दाखिला लेते ही संचालक दुकान का पर्चा थमा देते हैं। जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रिंसिपल निरुपमा सिंह का कहना है कि सीबीएसई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ-2005) में बिना किसी दबाव के शिक्षा की बात कही गई है।
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