फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   situation still tense in kunda

प्रशासन दूसरे दिन भी करता रहा हनुमान मंदिर की निगहबानी

Thu, 13 Oct 2016 11:58 PM IST
प्रतापगढ़
प्रतापगढ़ Updated Thu, 13 Oct 2016 11:58 PM IST
विज्ञापन
situation still tense in kunda
दशहरा के लिए सुरक्षा की व्यवस्‍था कर ली गई है
शेखपुर आशिक में मोहर्रम के दिन भंडारा न होने और सकुशल ताजिया उठने के बाद दूसरे दिन भी पुलिस प्रशासन मंदिर की निगहबानी करता रहा। फिलहाल अब कोई रोक-टोक नहीं है। बाजवूद इसके गुरुवार को राजा उदय प्रताप सिंह पूजा में शामिल होने नहीं आए। यही नहीं मंदिर पर भजन कीर्तन करने वाले भी मंदिर नहीं पहुंचे। सिर्फ पुजारी ही मंदिर पहुंचे और पूजा करने के बाद प्रसाद वितरण किया।
विज्ञापन


पुलिस ने कोतवाली क्षेत्र के शेखपुर स्थित हनुमान मंदिर को मोहर्रम का ताजिया निकलने के कारण कब्जे में ले लिया था। मंदिर परिसर को चारों तरफ से पुलिस ने घेर रखा था। इसके चलते प्रतिदिन चलने वाली पूजा भी बुधवार को नहीं हो पाई थी। ताजिया गुजरने के बाद मंदिर से पुलिस हटा ली गई। बाजवूद इसके मंदिर पर पुजारी के सिवा कोई नहीं आया। पूजा करने के लिए प्रतिदिन आने वाले राजा उदय प्रताप सिंह भी गुरुवार को पूजा के लिए नहीं आए। हालांकि लोग उनके ही आने के इंतजार में रहे। उनका न आना ही कारण रहा कि पुजारी के सिवा मंदिर पर कोई अन्य व्यक्ति भी नहीं आया। हालांकि पुलिस अब इस मामले को शांत करने में लगी है। यही नहीं मंदिर से 100 मीटर दूर एक सेक्शन पीएसी के साथ एसआई मुन्नीलाल कुछ साथी दरोगाओं और सिपाहियों के साथ मौजूद रहे। शेखपुर बाजार में भी सन्नाटा ही छाया रहा। हर कोई बुधवार को हुए ताजिए को लेकर पुलिस की कार्रवाई से सहमा रहा।
विज्ञापन



भंडारे पर प्रतिबंध के बाद भी सामान्य पूजा पाठ और प्रसाद वितरण से रोके जाने को लेकर जन सामान्य में आक्रोश है। यही नहीं कोर्ट के आदेश को मानने के बाद भी उन्हें मंदिर पर न जाने देने की भी आलोचना हो रही है। हालांकि प्रशासन ने साम्प्रदायिक तनाव को रोकने के लिए ऐसा किया था। तीन साल से शेखपुर स्थित हनुमान मंदिर पर मोहर्रम के दिन ही भंडारे का आयोजन किया जाता था। दरअसल इसी दिन एक बंदर की मृत्यु इसी जगह पर हो गई थी। इसके बाद धीरे-धीरे मंदिर बना और फिर पूजा के साथ ही भंडारा होने लगा। हाइवे पर होने के बाद भी बगल में स्थित खेतों में लोग खड़े होकर भंडारे का प्रसाद लेते थे और चले जाते थे। 2015 में भंडारे के दौरान ताजिया उठाने से मना कर दिया गया। काफी मान मनौव्वल के बाद भी ताजिया नहीं उठाया गया। इससे प्रशासन ने लिखित रूप से यह आश्वासन दिया कि अगले वर्ष भंडारा नहीं होगा। प्रशासन ने धीरे-धीरे इस पर अमल किया और हाईकोर्ट के डायरेक्शन पर एसडीएम कोर्ट में भंडारे को निषिद्ध कर दिया गया। फिलहाल मामला यहीं तक नहीं रहा। भंडारे में शामिल होने वाले राजा उदय प्रताप सिंह को उनके आवास परिसर में ही रोकने का आदेश भी जारी हो गया। मंदिर पर पुलिस का कब्जा होने के कारण कोई भी व्यक्ति सामान्य पूजा के लिए भी नहीं आ पाया। माना जा रहा है कि इन दोनों आदेशों के विरोध में राजा उदय प्रताप कोर्ट जा सकते हैं। यही नहीं वह अधिकारियों से कोर्ट के माध्यम से सवाल भी खड़े कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed