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डेंगू के सात मरीज मिलने से हड़कंप
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जिला अस्पताल में बंद पड़ा डेंगू स्वाइन फ्लू वार्ड ।
- फोटो : PRATAPGARH
जिले में दो माह के भीतर डेंगू के सात मरीज मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। गांव के लोग दहशत में हैं, लेकिन स्वास्थ्य महकमा कुंभकर्णी नींद में सो रहा है। किसी भी गांव में दवाओं का छिड़काव और फागिंग नहीं कराई गई।
जागरूकता अभियान का कहीं कोई नामोनिशान नहीं है। अस्पताल में डेंगू के लिए अलग वार्ड जरूर बना है, लेकिन उसमें एक भी मरीज भर्ती नहीं किए गए। अलबत्ता, स्वास्थ्य महकमे ने शासन को यह रिपोर्ट भेजकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि ज्यादातर लोग जिले से बाहर डेंगू की चपेट में आए।
जिले में डेंगू के मरीज मिलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से बचाव के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। शासन के आदेश पर सीएचसी में पांच तो जिला अस्पताल में दस बेड का अतिरिक्त डेंगू वार्ड का निर्माण तीन साल पहले कराया गया था। मगर आज तक डेंगू वार्ड में एक भी मरीज भर्ती नहीं किए गए हैं।
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जिला अस्पताल में डेंगू की जांच की व्यवस्था है, मगर चिकित्सक से लेकर स्वास्थ्य विभाग के अफसर उस रिपोर्ट को संदिगध मानते हैं। इसके चलते मरीजों को भर्ती भी नहीं किया जाता है। संदिग्ध मरीजों को तत्काल प्रयागराज रेफर कर दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में दो माह के भीतर डेंगू के सात मामले सामने आए हैं।
रानीगंज के दूबे पट्टी निवासी सरिता दूबे पत्नी अमित सिंह, सांगीपुर के शुकुलपुर निवासी मोहम्मद आलम पुत्र मोहम्मद हसन, ढिंगौसी निवासी महेंद्र प्रसाद पुत्र आद्या प्रसाद, सराय महिमा निवासी गयासुद्दीन पुत्र मोदनुद्दीन, सोनपुर ढकवा निवासी शनि कुमार पुत्र अरविंद उपाध्याय व रामपुर बाउली निवासी इकरा पत्नी फिरोज अहमद और कुंडा के मोती का पुरवा निवासी हामिद को डेंगू की पुष्टि एसआरएन प्रयागराज और पीजीआई लखनऊ में हुई। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग नींद में है। जांच में पुष्टि के बाद रिपोर्ट सीएमओ के पास आई है।
इसमें अफसरों से सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है, लेकिन विभाग कागज पर रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दे रहा है। शासन को भेजी गई रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग ने अवगत कराया है कि ज्यादातर मरीज दूसरे शहर में रहते थे। डेंगू होने के बाद वे घर आए थे। गंभीर हालत में परिजन खुद ही मेडिकल कॉलेज लेकर चले गए।
जब भर्ती ही नहीं करना था तो क्यों बनाया डेंगू वार्ड
सपा शासनकाल में जिला अस्पताल में दस बेड तो सीएचसी में पांच-पांच बेड के डेंगू वार्ड तैयार किए गए थे। मरीजों के लिए अलग से मच्छरदानी की भी व्यवस्था की गई थी। तीन साल बीत गए, मगर जिले के एक भी सरकारी अस्पताल के डेंगू वार्ड में मरीजों को भर्ती कर इलाज नहीं किया गया है।
डेंगू के मरीजों को जांच और इलाज कराने के लिए प्रयागराज या फिर लखनऊ का चक्कर काटना पड़ता है। वार्ड में 24 घंटे ताला लटकता रहता है। वार्ड के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
डेंगू की जांच का दावा, अपनी ही रिपोर्ट पर भरोसा नहीं
स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल में डेंगू की जांच होने का दावा किया था, लेकिन हैरत वाली बात यह है कि जिला अस्पताल की पैथालॉजी रिपोर्ट पर डॉक्टरों के साथ सीएमएस और सीएमओ को भी भरोसा नहीं है। इस रिपोर्ट पर संदेह जताते हैं। दरअसल, जिला अस्पताल के पैथालॉजी में किट से डेंगू की जांच की जाती है।
जबकि प्रयागराज के एसआरएन और लखनऊ के पीजीआई में हायर सेंटर बना हुआ है। यहां आधुनिक मशीनों से डेंगू की जांच की जाती है। इससे जिला अस्पताल के पैथालॉजी में डेंगू की जांच कराने से मरीजों को किसी भी प्रकार का लाभ नहीं मिलता है।
जिला अस्पताल पैथालॉजी के सूत्रों की मानी जाए तो जुलाई से लेकर अब तक 210 मरीजों की जांच की गई। जिसमें दर्जन भर से अधिक लोगों को डेंगू की पुष्टि हुई। मरीजों को तत्काल चिकित्सकों ने प्रयागराज के लिए रेफर कर दिया।
डेंगू की चपेट में आने वाले लोगों की जो सूची मेरे पास आई है उनके घर दवा का छिड़काव करा दिया गया है। आसपास के कुछ लोगों का ब्लड लेकर जांच के लिए भेजा गया है। जिला अस्पताल में जो जांच हो रही है वह गलत नहीं है, पर किट से हुई जांच पर बहुत भरोसा करने लायक नहीं होता है, इसलिए मरीजों को एसआरएन भेजा जाता है। डॉक्टर एके श्रीवास्तव, सीएमओ।
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जागरूकता अभियान का कहीं कोई नामोनिशान नहीं है। अस्पताल में डेंगू के लिए अलग वार्ड जरूर बना है, लेकिन उसमें एक भी मरीज भर्ती नहीं किए गए। अलबत्ता, स्वास्थ्य महकमे ने शासन को यह रिपोर्ट भेजकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि ज्यादातर लोग जिले से बाहर डेंगू की चपेट में आए।
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जिले में डेंगू के मरीज मिलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से बचाव के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। शासन के आदेश पर सीएचसी में पांच तो जिला अस्पताल में दस बेड का अतिरिक्त डेंगू वार्ड का निर्माण तीन साल पहले कराया गया था। मगर आज तक डेंगू वार्ड में एक भी मरीज भर्ती नहीं किए गए हैं।
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जिला अस्पताल में डेंगू की जांच की व्यवस्था है, मगर चिकित्सक से लेकर स्वास्थ्य विभाग के अफसर उस रिपोर्ट को संदिगध मानते हैं। इसके चलते मरीजों को भर्ती भी नहीं किया जाता है। संदिग्ध मरीजों को तत्काल प्रयागराज रेफर कर दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में दो माह के भीतर डेंगू के सात मामले सामने आए हैं।
रानीगंज के दूबे पट्टी निवासी सरिता दूबे पत्नी अमित सिंह, सांगीपुर के शुकुलपुर निवासी मोहम्मद आलम पुत्र मोहम्मद हसन, ढिंगौसी निवासी महेंद्र प्रसाद पुत्र आद्या प्रसाद, सराय महिमा निवासी गयासुद्दीन पुत्र मोदनुद्दीन, सोनपुर ढकवा निवासी शनि कुमार पुत्र अरविंद उपाध्याय व रामपुर बाउली निवासी इकरा पत्नी फिरोज अहमद और कुंडा के मोती का पुरवा निवासी हामिद को डेंगू की पुष्टि एसआरएन प्रयागराज और पीजीआई लखनऊ में हुई। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग नींद में है। जांच में पुष्टि के बाद रिपोर्ट सीएमओ के पास आई है।
इसमें अफसरों से सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है, लेकिन विभाग कागज पर रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दे रहा है। शासन को भेजी गई रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग ने अवगत कराया है कि ज्यादातर मरीज दूसरे शहर में रहते थे। डेंगू होने के बाद वे घर आए थे। गंभीर हालत में परिजन खुद ही मेडिकल कॉलेज लेकर चले गए।
जब भर्ती ही नहीं करना था तो क्यों बनाया डेंगू वार्ड
सपा शासनकाल में जिला अस्पताल में दस बेड तो सीएचसी में पांच-पांच बेड के डेंगू वार्ड तैयार किए गए थे। मरीजों के लिए अलग से मच्छरदानी की भी व्यवस्था की गई थी। तीन साल बीत गए, मगर जिले के एक भी सरकारी अस्पताल के डेंगू वार्ड में मरीजों को भर्ती कर इलाज नहीं किया गया है।
डेंगू के मरीजों को जांच और इलाज कराने के लिए प्रयागराज या फिर लखनऊ का चक्कर काटना पड़ता है। वार्ड में 24 घंटे ताला लटकता रहता है। वार्ड के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
डेंगू की जांच का दावा, अपनी ही रिपोर्ट पर भरोसा नहीं
स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल में डेंगू की जांच होने का दावा किया था, लेकिन हैरत वाली बात यह है कि जिला अस्पताल की पैथालॉजी रिपोर्ट पर डॉक्टरों के साथ सीएमएस और सीएमओ को भी भरोसा नहीं है। इस रिपोर्ट पर संदेह जताते हैं। दरअसल, जिला अस्पताल के पैथालॉजी में किट से डेंगू की जांच की जाती है।
जबकि प्रयागराज के एसआरएन और लखनऊ के पीजीआई में हायर सेंटर बना हुआ है। यहां आधुनिक मशीनों से डेंगू की जांच की जाती है। इससे जिला अस्पताल के पैथालॉजी में डेंगू की जांच कराने से मरीजों को किसी भी प्रकार का लाभ नहीं मिलता है।
जिला अस्पताल पैथालॉजी के सूत्रों की मानी जाए तो जुलाई से लेकर अब तक 210 मरीजों की जांच की गई। जिसमें दर्जन भर से अधिक लोगों को डेंगू की पुष्टि हुई। मरीजों को तत्काल चिकित्सकों ने प्रयागराज के लिए रेफर कर दिया।
डेंगू की चपेट में आने वाले लोगों की जो सूची मेरे पास आई है उनके घर दवा का छिड़काव करा दिया गया है। आसपास के कुछ लोगों का ब्लड लेकर जांच के लिए भेजा गया है। जिला अस्पताल में जो जांच हो रही है वह गलत नहीं है, पर किट से हुई जांच पर बहुत भरोसा करने लायक नहीं होता है, इसलिए मरीजों को एसआरएन भेजा जाता है। डॉक्टर एके श्रीवास्तव, सीएमओ।