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Pratapgarh News: डॉक्टर-हॉस्पिटल के चक्कर में आठ दिन तड़पा मासूम फहद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Sep 2026 11:03 PM IST
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Little Fahad suffered for eight days while being shuttled between doctors and hospitals.
सात माह के मासूम अब्दुल फहद का दुनिया से जाना सिर्फ मौत नहीं, बल्कि बिगड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था की कलई खोलती हकीकत है। आठ दिन तक मासूम जिंदगी और मौत से जूझता रहा, परिजन उसे गोद में लेकर अस्पताल-दर-अस्पताल भटकते रहे। आखिर में पीजीआई लखनऊ की दहलीज पर उसकी सांसें टूट गईं।
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दिलीपपुर थाना क्षेत्र के सरखेलपुर निवासी आमिर खान के सात माह के बेटे अब्दुल फहद को 28 अगस्त की रात अचानक तेज बुखार आने के साथ दस्त शुरू हुई। आसपास के डॉक्टरों के इलाज से सुधार नहीं हुआ तो परिजन मेडिकल कॉलेज पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने वेंटिलेटर की सुविधा न होने का हवाला देकर भर्ती करने से इन्कार कर दिया और रेफर का कागज थमा दिया।
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रोते-बिलखते परिजन प्रयागराज चिल्ड्रन हॉस्पिटल पहुंचे, वहां भी वेंटिलेटर खाली न होने की बात कहकर भर्ती से इन्कार किया गया। स्वरूपरानी में भी निराशा ही हाथ लगी। थक-हार कर परिजन प्रतापगढ़ लौटे। शहर के सदर बाजार सई पुल स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल ने बच्चे को वेंटिलेटर पर भर्ती किया। दो दिन में तीन यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। तबीयत बिगड़ने पर सीटी स्कैन कराया गया तो ब्रेन हेमरेज निकला। सुधार न होने पर वहां से भी लखनऊ के लिए रेफर कर दिया गया।
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मौत की काली रात, खत्म हो गई एंबुलेंस की ऑक्सीजन
वेंटिलेटर वाली एंबुलेंस से परिजन केजीएमयू लखनऊ पहुंचे। तीन घंटे इंतजार के बाद बताया गया वेंटिलेटर खाली नहीं है। राम मनोहर लोहिया में दो घंटे गुजरे। रात करीब एक बजे पीजीआई लखनऊ पहुंचे तो गार्ड ने कहा कि डॉक्टर मैडम सो रही हैं। परिजन दो घंटे बाहर खड़े रहे। इसी दौरान सुबह करीब पांच बजे एंबुलेंस की ऑक्सीजन खत्म हो गई और ऑक्सीजन के साथ मासूम की सांसें भी थम गईं।


सीएम हेल्पलाइन से भी नहीं मिली मदद
पिता आमिर ने बताया कि बेटे को भर्ती कराने के लिए रात दो बजे से सीएम हेल्पलाइन नंबर 1076 पर 100 बार कॉल किया, लेकिन एक बार भी कॉल रिसीव नहीं हुई। समय पर प्रशासनिक मदद न मिलने से मासूम को बचाया नहीं जा सका।
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