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किराए के भवन में चलने वाले स्कूलों को नहीं मिलेगी मान्यता
Mon, 25 Feb 2019 12:27 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 25 Feb 2019 12:27 AM IST
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बेसिक शिक्षा विभाग की मान्यता अब आसानी से नहीं मिलेगी। अब उन्हीं स्कूलों को मान्यता मिलेगी, जिन्होंने स्कूल के नाम पर जमीन खरीदी होगी और मानक के अनुरूप भवन का निर्माण कराया है। शासन ने मान्यता शुल्क और एफडी की राशि भी बढ़ाकर पांच गुना कर दी है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने मान्यता पर रोक लगाने के लिए पहल की है। पहले मान्यता के लिए आवेदन शुल्क 3500 रुपये था, जो बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया है। बीएसए के पदनाम में अनुबंध होने वाली एफडी पूर्व में 15,000 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 1,50,000 कर दी गई है।
पूर्व में मान्यता के लिए आवेदन करने वाले लोग समिति के नाम जमीन खरीद लेते थे या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम जमीन का अनुबंध कराकर मान्यता हासिल कर लेते थे, मगर अब स्कूल के नाम से जमीन होने पर ही मान्यता मिलेगी। अभी तक किराए के भवन में भी स्कूल चलने पर मान्यता मिल जाती थी, मकान मालिक से स्कूल संचालक दस साल का अनुबंध करवा लेता था, मगर किराए के भवन में चलने वाले स्कूलों को मान्यता नहीं मिलेगी। स्कूल का निजी भवन होने पर ही मान्यता मिलेगी।
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अधिकारी के निरीक्षण और भवन की होगी वीडियोग्राफी
ऑफिस में बैठकर स्कूल संचालकों से मोटी रकम लेकर अब अफसर फाइल पर साइन नहीं बैठा पाएंगे। बल्कि वह स्कूल का निरीक्षण करेंगे, उसकी सीडी तैयार होने और मानक पर खरे उतरने वाले स्कूलों को ही मान्यता देने की संस्तुति कर सकेंगे।
बिना मान्यता चल रहे हैं 529 स्कूल
जिले में कक्षा एक से आठ तक बगैर मान्यता के चलने वाले स्कूलों की संख्या 529 है। इनमें अधिकांश स्कूल ऐसे भी हैं जो कक्षा एक से पांच तक की मान्यता लेकर आठ तक कक्षाएं चला रहे हैं। इनमें से 138 स्कूलों ने मान्यता के लिए आवेदन कर रखा है।
मान्यता का मानक बदल गया है। शासन ने नई गाइड लाइन जारी करके स्कूलों के मान्यता का मानक तैयार किया है। जो विद्यालय इस मानक पर खरे उतरेंगे, उन्हें ही मान्यता प्रदान की जाएगी।
अशोक कुमार सिंह, बीएसए।
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बेसिक शिक्षा विभाग ने मान्यता पर रोक लगाने के लिए पहल की है। पहले मान्यता के लिए आवेदन शुल्क 3500 रुपये था, जो बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया है। बीएसए के पदनाम में अनुबंध होने वाली एफडी पूर्व में 15,000 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 1,50,000 कर दी गई है।
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पूर्व में मान्यता के लिए आवेदन करने वाले लोग समिति के नाम जमीन खरीद लेते थे या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम जमीन का अनुबंध कराकर मान्यता हासिल कर लेते थे, मगर अब स्कूल के नाम से जमीन होने पर ही मान्यता मिलेगी। अभी तक किराए के भवन में भी स्कूल चलने पर मान्यता मिल जाती थी, मकान मालिक से स्कूल संचालक दस साल का अनुबंध करवा लेता था, मगर किराए के भवन में चलने वाले स्कूलों को मान्यता नहीं मिलेगी। स्कूल का निजी भवन होने पर ही मान्यता मिलेगी।
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अधिकारी के निरीक्षण और भवन की होगी वीडियोग्राफी
ऑफिस में बैठकर स्कूल संचालकों से मोटी रकम लेकर अब अफसर फाइल पर साइन नहीं बैठा पाएंगे। बल्कि वह स्कूल का निरीक्षण करेंगे, उसकी सीडी तैयार होने और मानक पर खरे उतरने वाले स्कूलों को ही मान्यता देने की संस्तुति कर सकेंगे।
बिना मान्यता चल रहे हैं 529 स्कूल
जिले में कक्षा एक से आठ तक बगैर मान्यता के चलने वाले स्कूलों की संख्या 529 है। इनमें अधिकांश स्कूल ऐसे भी हैं जो कक्षा एक से पांच तक की मान्यता लेकर आठ तक कक्षाएं चला रहे हैं। इनमें से 138 स्कूलों ने मान्यता के लिए आवेदन कर रखा है।
मान्यता का मानक बदल गया है। शासन ने नई गाइड लाइन जारी करके स्कूलों के मान्यता का मानक तैयार किया है। जो विद्यालय इस मानक पर खरे उतरेंगे, उन्हें ही मान्यता प्रदान की जाएगी।
अशोक कुमार सिंह, बीएसए।