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62 लाख के घपले में बाईस 22 प्रधानों पर दर्ज होगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Tue, 05 Sep 2017 11:38 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : indian express
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संड़वा चंद्रिका विकास खंड में मनरेगा के तहत सवा 62 लाख रुपये की धनराशि का बंदरबांट करने वाले 22 ग्राम पंचायतों के प्रधानों व कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज कराने का आदेश जिलाधिकारी ने बीडीओ संडवाचंद्रिका को दिया है। इस कार्रवाई की भनक लगने पर ब्लाक का माहौल गरमा उठा है। संयुक्त जांच में मनरेगा धनराशि के बंदरबांट की पोल खुली थी। मानीटरिंग करने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजने की तैयारी चल रही है।
संडवा चंद्रिका विकास खंड की 34 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की अनियमितता की शिकायत शासन में हुई थी। सीडीओ के निर्देश पर हुई संयुक्त टीम की जांच में 22 ग्राम पंचायतों में 62,27,817 रुपये के दुरुपयोग का मामला उजागर हुआ था। सबसे अधिक रसूलपुर गुलरहा ग्राम पंचायत में 13,11,311 रुपये खर्च हुए थे। इस जांच की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। रिपोर्ट मिलने के बाद सीडीओ राजकमल यादव ने कहा था कि दोषी पाए गए 22 ग्राम पंचायतों के पंचायत सचिव, ग्राम प्रधान और तकनीकी सहायकों से यह रकम वसूल की जाएगी। प्रथमदृष्टया रिकवरी की कार्रवाई की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद मंगलवार को जिलाधिकारी शरद कुमार सिंह का पत्र ब्लाक पहुंचा तो हड़कंप मच गया। उन्होेंने सरकारी धनराशि का बंदरबांट करने वाले 22 प्रधानों व कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया है। कार्रवाई की भनक लगते ही संडवाचंद्रिका ब्लाक की सियासत गरमा उठी।
सीडीओ के नेतृत्व में गठित जांच टीम ने पहली बार जांच में गौराडांड ग्राम पंचायत में नाला की खुदाई नहीं होने की रिपोर्ट दी, मगर जब अखबारों में खबर छपी तो प्रधान ने प्रत्यावेदन करके पुन: जांच करने को कहा। दूसरी बार जब जांच टीम गांव पहुंची तो उसे नाला खुदा मिला। इस प्रकार जांच टीम ने कई ग्राम पंचायतों में गड़बड़ी की रिपोर्ट दी थी, जिसे बाद में सुधारा गया।
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संडवा चंद्रिका विकास खंड की 34 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की अनियमितता की शिकायत शासन में हुई थी। सीडीओ के निर्देश पर हुई संयुक्त टीम की जांच में 22 ग्राम पंचायतों में 62,27,817 रुपये के दुरुपयोग का मामला उजागर हुआ था। सबसे अधिक रसूलपुर गुलरहा ग्राम पंचायत में 13,11,311 रुपये खर्च हुए थे। इस जांच की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। रिपोर्ट मिलने के बाद सीडीओ राजकमल यादव ने कहा था कि दोषी पाए गए 22 ग्राम पंचायतों के पंचायत सचिव, ग्राम प्रधान और तकनीकी सहायकों से यह रकम वसूल की जाएगी। प्रथमदृष्टया रिकवरी की कार्रवाई की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद मंगलवार को जिलाधिकारी शरद कुमार सिंह का पत्र ब्लाक पहुंचा तो हड़कंप मच गया। उन्होेंने सरकारी धनराशि का बंदरबांट करने वाले 22 प्रधानों व कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया है। कार्रवाई की भनक लगते ही संडवाचंद्रिका ब्लाक की सियासत गरमा उठी।
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सीडीओ के नेतृत्व में गठित जांच टीम ने पहली बार जांच में गौराडांड ग्राम पंचायत में नाला की खुदाई नहीं होने की रिपोर्ट दी, मगर जब अखबारों में खबर छपी तो प्रधान ने प्रत्यावेदन करके पुन: जांच करने को कहा। दूसरी बार जब जांच टीम गांव पहुंची तो उसे नाला खुदा मिला। इस प्रकार जांच टीम ने कई ग्राम पंचायतों में गड़बड़ी की रिपोर्ट दी थी, जिसे बाद में सुधारा गया।
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