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सैनिटाइजेशन न थर्मल स्क्रीनिंग, गायब हो गईं हेल्प डेस्क की मेज और कुर्सी
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जिले में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की रफ्तार थमने के बाद फिर भारी लापरवाही बरती जा रही है। सरकारी कार्यालयों के साथ बाजारों और मॉल में कोविड गाइड लाइन की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह लापरवाही फिर भारी पड़ सकती है। सरकारी विभागों में खुली कोविड-19 हेल्प डेस्क गायब हो गई हैं।
अधिकांश विभागों में सैनिटाइजेशन और थर्मल स्क्रीनिंग बंद कर कुर्सी, मेज भी हटा दी गई है। विभागों में बैनर तो लगे हैं, मगर न तो कर्मचारी तैनात हैं और न ही किसी को रोका जा रहा है। उधर, मंगलवार को शहर में मॉल में भी भारी लापरवाही बरती जा रही थी। न तो कोई हेल्प डेस्क बनाई गई थी और न ही भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास हो रहे थे।
मंगलवार को दोपहर 1.12 बजे अजीत नगर स्थित मॉल के गेट पर खड़ा गार्ड ग्राहकों का सामान तो चेक कर रहा था, मगर न तो उसने खुद मॉस्क लगाया था और न ही दूसरों को देने के लिए उसके पास सैनिटाइजर था। दोपहर 1.24 बजे अंबेडकर चौराहे के आगे स्थित मॉल के प्रवेश द्वार पर न तो सैनिटाइजर था और न ही थर्मल स्कैनर। उधर, विकास भवन में सबसे निचले तल पर कोविड हेल्प डेस्क बनी थी, लेकिन दोपहर 1.40 बजे कुर्सी और मेज गायब थी।
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सदर तहसील में जिस स्थान पर हेल्प डेस्क बनी थी, उस स्थान पर दोपहर 1.52 बजे बाइक खड़ी मिली। सदर ब्लाक में बनी कोविड हेल्प डेस्क गायब थी। कर्मचारियों ने बताया कि बीडीओ ने कुर्सी-मेज हटवा दिया है। कृषि भवन में कोविड हेल्प डेस्क का बैनर तो लटकता रहा, मगर कुर्सी-मेज गायब रही।
लोक निर्माण विभाग में बैनर तो लटकता रहा, मगर न तो कोई कर्मचारी था और न ही आने-जाने वालों को कोई पूछने वाला था। जबकि शासन ने साफ तौर पर कह रखा है कि सभी विभागों में कोविड हेल्प डेस्क सक्रिय रहेगी। मॉल, रेस्टोरेंट में क्षमता से पचास प्रतिशत ही लोगों को प्रवेश देने की अनुमति है, मगर कहीं इसका पालन नहीं किया जा रहा है।
कोविड हेल्प डेस्क को सक्रिय करने के लिए सभी अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। अगर लोग लापरवाही बरत रहे हैं, तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल अफसरों की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह स्वयं कोविड नियमों का पालन करें और दूसरे को करने के लिए बाध्य करें। शत्रोहन वैश्य, एडीएम
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अधिकांश विभागों में सैनिटाइजेशन और थर्मल स्क्रीनिंग बंद कर कुर्सी, मेज भी हटा दी गई है। विभागों में बैनर तो लगे हैं, मगर न तो कर्मचारी तैनात हैं और न ही किसी को रोका जा रहा है। उधर, मंगलवार को शहर में मॉल में भी भारी लापरवाही बरती जा रही थी। न तो कोई हेल्प डेस्क बनाई गई थी और न ही भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास हो रहे थे।
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मंगलवार को दोपहर 1.12 बजे अजीत नगर स्थित मॉल के गेट पर खड़ा गार्ड ग्राहकों का सामान तो चेक कर रहा था, मगर न तो उसने खुद मॉस्क लगाया था और न ही दूसरों को देने के लिए उसके पास सैनिटाइजर था। दोपहर 1.24 बजे अंबेडकर चौराहे के आगे स्थित मॉल के प्रवेश द्वार पर न तो सैनिटाइजर था और न ही थर्मल स्कैनर। उधर, विकास भवन में सबसे निचले तल पर कोविड हेल्प डेस्क बनी थी, लेकिन दोपहर 1.40 बजे कुर्सी और मेज गायब थी।
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सदर तहसील में जिस स्थान पर हेल्प डेस्क बनी थी, उस स्थान पर दोपहर 1.52 बजे बाइक खड़ी मिली। सदर ब्लाक में बनी कोविड हेल्प डेस्क गायब थी। कर्मचारियों ने बताया कि बीडीओ ने कुर्सी-मेज हटवा दिया है। कृषि भवन में कोविड हेल्प डेस्क का बैनर तो लटकता रहा, मगर कुर्सी-मेज गायब रही।
लोक निर्माण विभाग में बैनर तो लटकता रहा, मगर न तो कोई कर्मचारी था और न ही आने-जाने वालों को कोई पूछने वाला था। जबकि शासन ने साफ तौर पर कह रखा है कि सभी विभागों में कोविड हेल्प डेस्क सक्रिय रहेगी। मॉल, रेस्टोरेंट में क्षमता से पचास प्रतिशत ही लोगों को प्रवेश देने की अनुमति है, मगर कहीं इसका पालन नहीं किया जा रहा है।
कोविड हेल्प डेस्क को सक्रिय करने के लिए सभी अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। अगर लोग लापरवाही बरत रहे हैं, तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल अफसरों की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह स्वयं कोविड नियमों का पालन करें और दूसरे को करने के लिए बाध्य करें। शत्रोहन वैश्य, एडीएम

कृषि भवन कार्यालय में कोरोना जागरूकता का सिर्फ लगा बैनर हेल्प के लिए नहीं कर्मचारी।- फोटो : PRATAPGARH

विकास भवन में गेट से गायब कोविड हेल्पडेस्क।- फोटो : PRATAPGARH