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पालिका-नगर पंचायतों के वार्डों में फिर बदलेगा आरक्षण
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Fri, 14 Jul 2017 12:36 AM IST
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निकाय चुनाव की पुरानी तैयारियों को शासन ने खारिज कर दिया है। अब प्रदेश की योगी सरकार नए सिरे से नगर पालिका और नगर पंचायतों के वार्डों में आरक्षण कराएगी। संभावना जताई जा रही है कि वार्डों के परिसीमन में भी फेरबदल हो सकता है। नगर पालिका में 96 लेखपाल पिछड़ी जाति के रैपिड सर्वे का काम कर रहे हैं।
निकाय चुनाव को लेकर करीब चार माह पूर्व प्रशासन की तैयारियों को प्रदेश की योगी सरकार ने खारिज कर दिया है। पिछड़ी जाति के रैपिड सर्वे, परिसीमन व आरक्षण में शिकायतों को देखते हुए शासन ने नगर पालिका व नगर पंचायतों में हुए परिसीमन व संभावित आरक्षण को कैंसिल कर दिया। यहां तक कि पूर्व में पिछड़ी जाति के रैपिड सर्वे को भी खारिज करते हुए निर्देश दिया है कि फिर से वार्डों का रैपिड सर्वे कराया जाए। जिसमें पिछड़ी जातियों का पूरा विवरण दर्ज हो। किसी भी वार्ड में ऐसे मकान न छूटें। इसके लिए नगर पालिका में 96 लेखपालों को वार्डों के सर्वे की जिम्मेदारी दे दी गई है। छोटे बड़े वार्डों के हिसाब से लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है। बड़े वार्ड में चार लेखपाल तो छोटे वार्ड में तीन लेखपाल सर्वे के लिए लगाए गए हैं। आठ नगर पंचायतों में भी पिछड़ी जाति के सर्वे के लिए राजस्व विभाग की टीम लगाई गई है। सूत्रों की मानें तो रैपिड सर्वे के बाद सरकार वार्डो का फिर से परिसीमन करा सकती है। ताकि शिकायतों का निस्तारण हो सके। शासन वार्डों के आरक्षण में फेरबदल करा सकता है। नगर पालिका के दस वार्डों के आरक्षण में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि अभी कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं है।
नगर पालिका व नगर पंचायतों के रैपिड सर्वे का काम तेजी के साथ चल रहा है। शासन का आदेश है कि सर्वे की रिपोर्ट हर हाल में 20 जुलाई तक भेज दी जाए। ताकि उसके बाद चुनाव की तैयारियां को पूरा करने के लिए दिक्कत न हो सके।
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नगर पालिका के सर्वे को लेकर सभासदों ने अंगुली उठाई थी। जैसे ही पिछड़ी जाति के रैपिड सर्वे के बाद वार्डो का परिसीमन हुआ। नगर पालिका के अधिकांश सभासद आपत्ति जताने लगे। इसके लिए शासन के दिए गए समय पर आपत्ति भी की, लेकिन निस्तारण का कोरम पूरा कर अधिकारियों ने शासन को रिपोर्ट भेज दी। चर्चा है कि शिकायतों को देखते हुए रैपिड सर्वे फिर से कराया जा रहा है।
सर्वे में सक्रिय हुए दावेदार
नगरपालिका व नगर पंचायत के चुनाव को देखते हुए सभासद के संभावित दावेदार फिर सक्रिय हो गए हैं। सर्वे करने वाली टीम के साथ वे भी एक-एक घर दस्तक दे रहे हैं। कई प्रत्याशियों को रैपिड सर्वे की जानकारी भी नहीं है, लेकिन वे इसे आरक्षण का सर्वे मानकर लेखपालों के साथ-साथ घूम रहे हैं। ताकि कोई चूक न हो सके।
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निकाय चुनाव को लेकर करीब चार माह पूर्व प्रशासन की तैयारियों को प्रदेश की योगी सरकार ने खारिज कर दिया है। पिछड़ी जाति के रैपिड सर्वे, परिसीमन व आरक्षण में शिकायतों को देखते हुए शासन ने नगर पालिका व नगर पंचायतों में हुए परिसीमन व संभावित आरक्षण को कैंसिल कर दिया। यहां तक कि पूर्व में पिछड़ी जाति के रैपिड सर्वे को भी खारिज करते हुए निर्देश दिया है कि फिर से वार्डों का रैपिड सर्वे कराया जाए। जिसमें पिछड़ी जातियों का पूरा विवरण दर्ज हो। किसी भी वार्ड में ऐसे मकान न छूटें। इसके लिए नगर पालिका में 96 लेखपालों को वार्डों के सर्वे की जिम्मेदारी दे दी गई है। छोटे बड़े वार्डों के हिसाब से लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है। बड़े वार्ड में चार लेखपाल तो छोटे वार्ड में तीन लेखपाल सर्वे के लिए लगाए गए हैं। आठ नगर पंचायतों में भी पिछड़ी जाति के सर्वे के लिए राजस्व विभाग की टीम लगाई गई है। सूत्रों की मानें तो रैपिड सर्वे के बाद सरकार वार्डो का फिर से परिसीमन करा सकती है। ताकि शिकायतों का निस्तारण हो सके। शासन वार्डों के आरक्षण में फेरबदल करा सकता है। नगर पालिका के दस वार्डों के आरक्षण में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि अभी कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं है।
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नगर पालिका व नगर पंचायतों के रैपिड सर्वे का काम तेजी के साथ चल रहा है। शासन का आदेश है कि सर्वे की रिपोर्ट हर हाल में 20 जुलाई तक भेज दी जाए। ताकि उसके बाद चुनाव की तैयारियां को पूरा करने के लिए दिक्कत न हो सके।
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नगर पालिका के सर्वे को लेकर सभासदों ने अंगुली उठाई थी। जैसे ही पिछड़ी जाति के रैपिड सर्वे के बाद वार्डो का परिसीमन हुआ। नगर पालिका के अधिकांश सभासद आपत्ति जताने लगे। इसके लिए शासन के दिए गए समय पर आपत्ति भी की, लेकिन निस्तारण का कोरम पूरा कर अधिकारियों ने शासन को रिपोर्ट भेज दी। चर्चा है कि शिकायतों को देखते हुए रैपिड सर्वे फिर से कराया जा रहा है।
सर्वे में सक्रिय हुए दावेदार
नगरपालिका व नगर पंचायत के चुनाव को देखते हुए सभासद के संभावित दावेदार फिर सक्रिय हो गए हैं। सर्वे करने वाली टीम के साथ वे भी एक-एक घर दस्तक दे रहे हैं। कई प्रत्याशियों को रैपिड सर्वे की जानकारी भी नहीं है, लेकिन वे इसे आरक्षण का सर्वे मानकर लेखपालों के साथ-साथ घूम रहे हैं। ताकि कोई चूक न हो सके।