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प्रतापगढ़ : अस्पताल में मरे मरीज के परिजन रहे परेशान, शव वाहन से ढोते रहे सामान

Tue, 06 Sep 2022 12:49 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 06 Sep 2022 12:49 AM IST
सार

नगर कोतवाली के महुली निवासी सत्यकरन सिंह (50) काफी दिनों से बीमार थे। उन्हें राजा प्रताप बहादुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजन शव घर ले जाने के लिए परेशान थे।

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relatives of the patient who died in the hospital remained upset, carrying the goods from the
Pratapgarh News : शव वाहन से ढोया जा रहा सामान। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

डॉ. सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध राजा प्रताप बहादुर अस्पताल में मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को अस्पताल में एक मरीज की मौत होने जाने के बाद परिवार के लोगों को शव वाहन उपलब्ध कराने के बजाय उससे सामान ढोया जाता रहा। सदर विधायक के फोन करने के बाद भी शव वाहन नहीं दिया गया। 

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नगर कोतवाली के महुली निवासी सत्यकरन सिंह (50) काफी दिनों से बीमार थे। उन्हें राजा प्रताप बहादुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजन शव घर ले जाने के लिए परेशान थे। उन्होंने अस्पताल से शव वाहन की मांग की, लेकिन वाहन न होने की बात कहकर उन्हें टरका दिया गया। 
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दूसरी तरफ, अस्पताल में शव वाहन से रजाई, गद्दे और कुर्सियां ढोई जा रही थीं। मामले की जानकारी होने पर सदर विधायक राजेंद्र मौर्या ने अस्पताल के अफसरों को फोन कर शव उपलब्ध कराने के लिए कहा। इसके बाद भी अफसर लापरवाह बने रहे और सत्यकरन के परिवार को शव वाहन मुहैया नहीं कराया गया। चिकित्सकों ने बताया कि शव वाहन लालगंज गया है। लौटने के बाद उपलब्ध कराया जाएगा। 
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जबकि शासन ने अस्पताल को दो शव वाहन उपलब्ध कराए हैं। एक शव वाहन को प्राचार्य डॉ. आर्य देशदीपक ने कॉलेज बुला लिया था। उस पर गद्दा, चारपाई और कुर्सी के साथ अन्य घरेलू सामान लाद दिया गया। करीब पौन घंटे बाद लालगंज से शव वाहन आने के बाद सत्यकरन का शव घर ले जाया जा सका। 

चालक को सामान अस्पताल में बने नर्सिंग हॉस्टल तक पहुंचाने के लिए कहा गया था। शाम चार बजे तक शव वाहन पर लदे सामान को नहीं उतारा गया था। 


मैं अपने घर का काम नहीं करा रहा था। मेरे पास दो शव वाहन हैं। एक गाड़ी शव लेकर जाती है। जरूरत पड़ने पर दूसरी गाड़ी को दवा लेने के लिए लखनऊ तक भेजा जाता है। अस्पताल में डॉक्टरों के रहने के लिए शव वाहन से हॉस्टल में रजाई, गद्दे और कुर्सियां भेजी गईं। - डॉ. आर्य देशदीपक, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज

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