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रमजान में होगी रहमतों की बारिश
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Tue, 07 Jun 2016 12:16 AM IST
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जिस पाक माह रमजान का इंतजार लोग बड़ी बेसब्री से कर रहे थे वह आ ही गया। रमजान माह की आमद के साथ ही नेकियों और रहमतों का खजाना अल्लाह ने अपने बंदों के लिए खोल दिया है। जिस अमल पर लोगों को एक नेकी मिलती थी अब उसी नेकी पर सत्तर गुना सवाब हासिल होगा। लोगों की दुआएं कुबूल होंगी और उनके वालिदैन की मगफिरत भी होगी। लाखों गुनहगारों को जहन्नुम की आग से छुटकारा मिलेगा। रोजेदारों से फरिश्ते मुसाफा करेंगे और उनकी दुआओं पर आमीन कहेंगे।
चांद तारा मसजिद के पेश इमाम मौलाना इश्तियाक साहब ने बताया कि हदीश पाक में रवायत है कि माह-ए -रमजान में अल्लाह अपने बंदों पर नेकियों की बारिश करता है। ऐसी तमाम फजीलत सुनने को मिलती है। पाक रमजान माह में खुदा की इबादत में अपना ज्यादा से ज्यादा समय गुजारे। इस माह में अल्लाह अपने बंदों का इम्तहान लेते हैं। जो खुदा की रजा के लिए अपनी इच्छाओं को त्याग देते हैं ऐसे लोग सबसे करीबी होते हैं। इस माह बंदों को एक नेकी के बदले सत्तर गुना नेकी मिलेगी। रमजान में रोजा वालों के साथ ही परहेजगारों का इस्तकबाल फरिश्तें करते हैं। रोजेदारों की दुआओं में वे शामिल होते हैं और दुआ के वक्त वह आमीन बोलते हैं। रमजान माह के दौरान सुन्नते तरावीह की नमाज ए इशा के बाद अदा कराई जाती है। उन्होंने कहा कि देखने में आता है कि लोग तरावीह में कुरान पाक मुकम्मल होने के बाद नमाज से मुंह मोड़ने लगते हैं। यह सरासर गलत है, तरावीह की नमाज पूरे रमजान पढ़ना चाहिए। ऐसा न करने वाले लोगों की दुआओं पर खुदा की फजीलत कम हो जाती है। इसलिए तरावीह की नमाज पूरे रमजान माह लोगों पर वाजिब है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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चांद तारा मसजिद के पेश इमाम मौलाना इश्तियाक साहब ने बताया कि हदीश पाक में रवायत है कि माह-ए -रमजान में अल्लाह अपने बंदों पर नेकियों की बारिश करता है। ऐसी तमाम फजीलत सुनने को मिलती है। पाक रमजान माह में खुदा की इबादत में अपना ज्यादा से ज्यादा समय गुजारे। इस माह में अल्लाह अपने बंदों का इम्तहान लेते हैं। जो खुदा की रजा के लिए अपनी इच्छाओं को त्याग देते हैं ऐसे लोग सबसे करीबी होते हैं। इस माह बंदों को एक नेकी के बदले सत्तर गुना नेकी मिलेगी। रमजान में रोजा वालों के साथ ही परहेजगारों का इस्तकबाल फरिश्तें करते हैं। रोजेदारों की दुआओं में वे शामिल होते हैं और दुआ के वक्त वह आमीन बोलते हैं। रमजान माह के दौरान सुन्नते तरावीह की नमाज ए इशा के बाद अदा कराई जाती है। उन्होंने कहा कि देखने में आता है कि लोग तरावीह में कुरान पाक मुकम्मल होने के बाद नमाज से मुंह मोड़ने लगते हैं। यह सरासर गलत है, तरावीह की नमाज पूरे रमजान पढ़ना चाहिए। ऐसा न करने वाले लोगों की दुआओं पर खुदा की फजीलत कम हो जाती है। इसलिए तरावीह की नमाज पूरे रमजान माह लोगों पर वाजिब है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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