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बीएड मूल्यांकन में विवि ने किया बदलाव
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प्रतापगढ़। राज्य विश्वविद्यालय ने बीएड मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव कर दिया है। महाविद्यालयों द्वारा किए जाने वाले आंतरिक मूल्यांकन की प्रक्रिया को समाप्त कर उसे लिखित परीक्षा के आधार पर कराने का निर्णय लिया है।
प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जू भैया विश्वविद्यालय प्रयागराज द्वारा चलाए जा रहे बीएड में पहले प्रत्येक प्रश्नपत्र 100 अंक का होता था, जिसमें 70 अंक की लिखित परीक्षा होती थी और 30 अंक आंतरिक मूल्यांकन के जरिये महाविद्यालय से मिलते थे। लेकिन इस बार आंतरिक मूल्यांकन की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है। प्रश्नपत्र 70 के स्थान पर 100 अंक के होंगे। हाल ही में संपन्न हुई बीएड थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह निर्णय लिया। इसके अलावा बीएड की प्रायोगिक परीक्षा में भी बदलाव किया गया है। पहले 150-150 अंकों की प्रायोगिक परीक्षाएं होती थीं। अब प्रायोगिक परीक्षाएं 60-60 अंकों की होंगी, जिसमें आंतरिक मूल्यांकन में 40 फीसदी अंक प्रदान किए जाएंगे और सैद्धांतिक प्रश्नपत्रों के आधार पर 80 फीसदी अंक दिए जाएंगे। मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव से नाराज छात्र-छात्राओं ने कुलपति को पत्र भेजकर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि पहले की तरह आंतरिक मूल्यांकन की प्रक्रिया महाविद्यालय द्वारा कराई जाए। यह प्रक्रिया न होने से उन्हें काफी नुकसान होगा।
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प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जू भैया विश्वविद्यालय प्रयागराज द्वारा चलाए जा रहे बीएड में पहले प्रत्येक प्रश्नपत्र 100 अंक का होता था, जिसमें 70 अंक की लिखित परीक्षा होती थी और 30 अंक आंतरिक मूल्यांकन के जरिये महाविद्यालय से मिलते थे। लेकिन इस बार आंतरिक मूल्यांकन की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है। प्रश्नपत्र 70 के स्थान पर 100 अंक के होंगे। हाल ही में संपन्न हुई बीएड थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह निर्णय लिया। इसके अलावा बीएड की प्रायोगिक परीक्षा में भी बदलाव किया गया है। पहले 150-150 अंकों की प्रायोगिक परीक्षाएं होती थीं। अब प्रायोगिक परीक्षाएं 60-60 अंकों की होंगी, जिसमें आंतरिक मूल्यांकन में 40 फीसदी अंक प्रदान किए जाएंगे और सैद्धांतिक प्रश्नपत्रों के आधार पर 80 फीसदी अंक दिए जाएंगे। मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव से नाराज छात्र-छात्राओं ने कुलपति को पत्र भेजकर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि पहले की तरह आंतरिक मूल्यांकन की प्रक्रिया महाविद्यालय द्वारा कराई जाए। यह प्रक्रिया न होने से उन्हें काफी नुकसान होगा।
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