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परेशानी ः प्रायोगिक परीक्षा कराने में अध्यापकों की कमी बाधक
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Fri, 27 May 2016 11:50 PM IST
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प्रयोगात्मक परीक्षा विलंब होने से महाविद्यालय प्रशासन परेशान हो गया है। कालेजों के शिक्षक परीक्षा की तारीख की जानकारी करने के लिए विश्वविद्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय द्वारा प्रयोगात्मक परीक्षाएं विलंब से कराने से एक तरफ छात्र-छात्राएं परेशान हैं। वह हर दिन परीक्षा की तारीख जानने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। वहीं महाविद्यालय प्रशासन भी जल्द से जल्द परीक्षा कराने की जुगत में लगा हुआ है।
इसके लिए महाविद्यालय के शिक्षक विश्वविद्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि कई बार विश्वविद्यालय की ओर से परीक्षा की तारीख बताई गई। यहां तक की परीक्षक भी नियुक्त कर दिए गए। उसके बाद किसी न किसी कारण से परीक्षाएं स्थगित करा दी गई। जानकारी के अनुसार शिक्षकों की कमी के चलते विश्वविद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा कराने में विलंब कर रहा है। गृह विज्ञान, भूगोल जैसे विषयों की प्रयोगात्मक परीक्षाएं लगभग सभी महाविद्यालयों में होनी है। ऐसे में शिक्षकों की कमी परीक्षा कराने में बाधक बन रही है। जबकि अन्य प्रयोगात्मक विषयों की परीक्षाएं लगभग करा ली गई हैं। शिक्षकों की कमी के चलते कई परीक्षकाें को एक ही दिन में दो से तीन कालेजों में प्रयोगात्मक परीक्षाएं करानी होती है। छात्र-छात्राओं का कहना है कि कई बार तो परीक्षक हाजिरी लगाकर ही परीक्षार्थियों को भेज देते हैं। परीक्षार्थियों से प्रश्न पूछने तक का समय नहीं होता। वहीं महाविद्यालयों के शिक्षकों का कहना है कि परीक्षक बनाए जाने पर उन्हें परेशानी होती है। एक ही दिन में कई जगह परीक्षा कराना आफत हो जाता है।
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इसके लिए महाविद्यालय के शिक्षक विश्वविद्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि कई बार विश्वविद्यालय की ओर से परीक्षा की तारीख बताई गई। यहां तक की परीक्षक भी नियुक्त कर दिए गए। उसके बाद किसी न किसी कारण से परीक्षाएं स्थगित करा दी गई। जानकारी के अनुसार शिक्षकों की कमी के चलते विश्वविद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा कराने में विलंब कर रहा है। गृह विज्ञान, भूगोल जैसे विषयों की प्रयोगात्मक परीक्षाएं लगभग सभी महाविद्यालयों में होनी है। ऐसे में शिक्षकों की कमी परीक्षा कराने में बाधक बन रही है। जबकि अन्य प्रयोगात्मक विषयों की परीक्षाएं लगभग करा ली गई हैं। शिक्षकों की कमी के चलते कई परीक्षकाें को एक ही दिन में दो से तीन कालेजों में प्रयोगात्मक परीक्षाएं करानी होती है। छात्र-छात्राओं का कहना है कि कई बार तो परीक्षक हाजिरी लगाकर ही परीक्षार्थियों को भेज देते हैं। परीक्षार्थियों से प्रश्न पूछने तक का समय नहीं होता। वहीं महाविद्यालयों के शिक्षकों का कहना है कि परीक्षक बनाए जाने पर उन्हें परेशानी होती है। एक ही दिन में कई जगह परीक्षा कराना आफत हो जाता है।
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