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प्रतापगढ़: गेहूं पर पड़ी मार, 600 रुपये क्विंटल गिरे भाव

Sun, 13 Sep 2020 01:06 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 13 Sep 2020 01:06 AM IST
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Pratapgarh: wheat hit, 600 rupees quintal price
Pratapgarh: wheat hit, 600 rupees quintal price
कोरोना काल में जनता को सरकार गेहूं और चावल देकर मदद कर रही है, लेकिन इससे गेहूं का भंडारण करने वाले किसानों को तगड़ा झटका लगा है। गेहूं का बाजार भाव 5 से लेकर 6 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गया है। चार साल पहले सरकारी रेट से भी कम दाम पर बाजार में गेहूूं बिक रहा है। बाजार में किसान गेहूं बेचने तो आते हैं, लेकिन खरीदार गायब हैं। जिन किसानों ने आफ सीजन में गेहूं बेचने के लिए भंडारण किया था, उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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जिले में गेहूं की पैदावार सबसे अधिक है। तकरीबन सवा लाख हेक्टेअर से अधिक जमीन में गेहूं बोया जाता है। पैदावार को खरीदने के लिए 17 विकास खंडों में क्रय केंद्र लगाए जाते हैं। जिले के सभी विकास खंडों में गेहूं की पैदावार होती है। कुछ किसान गेहूं का भंडारण करते हैं और आफ सीजन में बेचकर अधिक मुनाफा कमाते हैं। फसल की मड़ाई के समय के मुकाबले आफ सीजन में गेहूं का दाम ज्यादा मिलता है।
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इसके लिए किसान गेहूं का भंडारण कर लेते हैं। लॉकडाउन से पहले गेहूं के दाम दो हजार से 21 सौ रुपये प्रति क्विंटल थे। लॉकडाउन शुरू होते ही सरकार ने प्रति कार्ड राशन तो दिया ही, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत परिवार के प्रति सदस्य के हिसाब से पांच किलो अनाज मुफ्त दिया। अगर किसी के घर में सात सदस्य हैं तो उसे परिवार को 35 किलो अनाज नि:शुल्क दिया गया। जिले के 6,84,482 के करीब परिवारों को इन योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
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हर माह 22 लाख यूनिट राशन आवंटित किया जा रहा है। इससे बाजार में गेहूं की कीमतों पर असर पड़ा है। मौजूदा समय में बाजार में अच्छे गेहूूं कीमत 15 सौ रुपये प्रति क्विंटल है। सरकार की यह दरियादिली उन किसानों को भारी पड़ रही है जिन्होंने थोड़ा ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए गेहूं का भंडारण किया था। कई कार्डधारक ऐसे हैं जो कोटे की दुकान से राशन उठाने के बाद बाजार में बेच देते हैं। राशन की दुकान का बचा गेहूं भी बाजार में आ जाता है। इससे गेहूं का दाम निरंतर गिरता चला जा रहा है।
आटा की डिमांड हुई खत्म
आटा मिल संचालक जावेद का कहना है कि पहले वह 21 सौ रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीदते थे और बाजार में आटा 24 सौ रुपये क्विंटल के हिसाब से बेचते थे। अब गेहूं 15 सौ रुपये क्विंटल बिक रहा है और आटा 1850 व 1950 रुपये प्रति क्विंटल बेच रहे हैं। आटे की डिमांड भी पहले के मुकाबले 50 प्रतिशत तक गिर गई है। उधर, कोरोना काल में गेहूं से ज्यादा चावल मुफ्त वितरित किया गया। चावल का उपभोग जनता ने ज्यादा किया। इससे रेट कम नहीं हुए।
पांच साल का गेहूं का दाम
वर्ष गेहूं का रेट
2015-16 1520 प्रति क्विंटल
2016-17 1625
2017-18 1735
2018-19 1840
2019-20 1925
( नोट: यह मूल्य मंडी समिति से लिए गए हैं। 2017-18 में सरकार की ओर से किसानों को सरकारी रेट से अलग दस रुपये की बोनस राशि भी प्रति क्विंटल के हिसाब से दी गई थी।

मुनाफा की जगह हो गया किसानों को नुकसान
जिले के उन किसानों को मुनाफा के बजाय घाटा हो गया जिन्होंने आफ सीजन में गेहूं बेचने के लिए भंडारण कर रखा था। बेलखरनाथ धाम विकासखंड के किसान सुजीत कुमार, सदर के रियासत खान, संडवाचंद्रिका के हरिशंकर ने भी गेहूं बेचने के लिए रोक रखा था। इनका कहना है कि सीजन में ही गेहूं के दाम दो हजार से अधिक थे। इस समय गेहूं के दाम 23 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक होने चाहिए थे, लेकिन दाम बहुत गिर गया है। इससे अब उन्हें नुकसान हो रहा है।
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