प्रतापगढ़ : ढाई करोड़ की खाद के गबन का आरोपी भंडार नायक गिरफ्तार, 25 हजार का था इनामी
दो माह पहले गेहूं की बुवाई के दौरान डीएपी की कमी को लेकर जिले की सहकारी समितियों पर हंगामा होने लगा था। जिले में पर्याप्त मात्रा में डीएपी की रैक आने के बाद भी खाद की कमी को लेकर हो रहे बवाल पर डीएम डॉ. नितिन बंसल ने जांच शुरू कराई।
विस्तार
पीसीएफ गोदामों से ढाई करोड़ रुपये की डीएपी के गबन के मामले में फरार चल रहे 25 हजार के इनामी भंडार नायक संतोष कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में उसने कई अहम राज उगले हैं। उसकी गिरफ्तारी के बाद खाद घोटाले में विभागीय अफसरों के साथ खाद की ढुलाई करने वाले ठेकेदारों की भी गर्दन फंस सकती है।
दो माह पहले गेहूं की बुवाई के दौरान डीएपी की कमी को लेकर जिले की सहकारी समितियों पर हंगामा होने लगा था। जिले में पर्याप्त मात्रा में डीएपी की रैक आने के बाद भी खाद की कमी को लेकर हो रहे बवाल पर डीएम डॉ. नितिन बंसल ने जांच शुरू कराई। पीसीएफ के गोदामों में जांच शुरू हुई तो तीन गोदामों से करीब ढाई करोड़ रुपये की डीएपी गायब मिली। इस पर पीसीएफ के प्रबंधक धनंजय तिवारी ने भंडार नायक संतोष कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
50 लाख से अधिक के गबन का मुकदमा दर्ज होने के कारण मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा से कराने के लिए पत्र भेजा गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद भंडार नायक संतोष फरार हो गया। बाद में मुकदमे की विवेचना क्राइम ब्रांच के हवाले कर दी गई। काफी प्रयास के बाद भी गिरफ्तारी न होने पर पुलिस ने उस पर 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया। इस बीच आरोपी भंडार नायक ने कोर्ट में अनंतिम जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, मगर उस पर सुनवाई नहीं हो सकी।
कोतवाली पुलिस लगातार उसकी खोजबीन कर रही। रविवार की रात पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, भंडार नायक से पूछताछ में पता चला है कि डीएपी के गबन में अफसर से लेकर दूसरे कर्मचारी व ठेकेदार भी शामिल हैं। सभी की भूमिका की छानबीन की जा रही है। सीओ सिटी अभय पांडेय ने बताया कि फरार भंडार नायक संतोष कुमार से पूछताछ की जा रही है।
डेढ़ साल से बाजार में बेची जा रही थी डीएपी खाद
विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों के लिए आने वाली डीएपी करीब डेढ़ साल से बाजार में बेची जा रही थी। यूरिया व डीएपी ढुलाई करने वाले वाहनों का भाड़ा चुकता करने के लिए शुरू हुआ खेल लगातार चलता रहा। धीरे-धीरे ढाई करोड़ रुपये की डीएपी बाजार में बेच दी गई। फरार भंडार नायक से पूछताछ के बाद घोटाले में अफसरों व उसके परिवार के सदस्यों की भूमिका भी सामने आ रही है।
जिले के तीन पीसीएफ गोदामों से करीब ढाई करोड़ रुपये की डीएपी गायब होने की जानकारी के बाद प्रबंधक धनंजय तिवारी ने नगर कोतवाली में भंडार नायक संतोष कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद से वह फरार चल रहा था। रविवार की रात पुलिस उसे दबोचने में कामयाब रही। पुलिस सूत्रों के अनुसार, करीब डेढ़ साल से डीएपी बाजार में बेचने का काम चल रहा था। माल ढुलाई करने वाले ठेकेदार वाहनों का किराया देने का दबाव बना रहे थे।
समितियों पर खाद पहुंचाने में हो रहीं दिक्कतों को देखते हुए संतोष ने अपने परिवार व रिश्तेदारों की मदद से कुछ ट्रक खरीदकर ट्रांसपोर्ट बना लिया। बाद में उसी ट्रांसपोर्ट से खाद की ढुलाई कराने लगा। बकाया चुकता करने के लिए गोदाम से डीएपी बाजार में भेजी जाती रही। करीब डेढ़ साल तक बाजार में डीएपी बिकने के कारण स्टॉक खत्म होता चला गया। जबकि इफको से लगातार रैक भेजी जा रही थी। इस खेल में भंडार नायक संतोष कुमार के साथ ही उसके परिवार, रिश्तेदारों संग विभागीय अधिकारियों व कुछ कर्मचारियों की भी मिलीभगत सामने आ रही है। हालांकि अभी पुलिस अधिकारी मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं हैं।