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प्रतापगढ़: शीतगृहों से नहीं निकल रहा आलू, आसमान पर पहुंचे दाम

Tue, 01 Sep 2020 01:21 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2020 01:21 AM IST
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Pratapgarh: Potato not coming out of cold houses, prices reached sky high
जिले में आलू की खपत अधिक होने और शीतगृहों में भंडारण कम होने से दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। खुले बाजार में आलू 35 से 40 रुपये किलो बिक रहा है। दाम अभी कम होने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं। आलू बाहर से नहीं मंगाया गया तो आने वाले दिनों में लोगों को और महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है।
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रबी सीजन में जिले में आलू का भरपूर उत्पादन हुआ था। शीतगृह संचालकों की मनमानी के चलते किसानों ने आलू का भंडारण करने के बजाय खेत से ही व्यापारियों के हाथ बेच दिया। व्यापारियों ने आलू गैर प्रांतों में भेजकर अपन
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ी जेबें भरीं। नतीजा यह हुआ कि जिले के शीतगृहों में मात्र पचास प्रतिशत आलू का भंडारण हुआ है। इसमें से 25 प्रतिशत आलू किसान बीज के रूप में प्रयोग करेंगे। अक्तूबर से प्रारंभ होने वाली बुवाई को देखते हुए किसान शीतगृहों से अभी आलू नहीं निकाल रहे हैं। जिससे जिले में आलू की समस्या गहरा गई है। आलम यह है कि फुटकर बाजार में आलू 35-40 रुपये प्रति किग्रा की दर से बिक रहा है।
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आम आदमी मजबूर होकर खरीद भी रहा है। दरअसल, जिले के शीतगृहों से आलू नहीं निकलने और प्रयागराज से आने के कारण महंगे दाम पर बिक रहा है। जानकारों का कहना है कि आलू के दाम नियंत्रित होने की उम्मीद नहीं दिख रही है। अगर शासन इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं करता है तो आलू के दामों में और भी उछाल आ सकता है।
शीतगृहों की वसूली पर शासन का नहीं है नियंत्रण
शीतगृहों की वसूली पर शासन का नियंत्रण नहीं रह गया है। वर्ष 2014 में शासन ने एसोसिएशन को यह अधिकार प्रदान कर दिया है कि वह अपने हिसाब से दाम तय करेंगे। यही वजह है कि शीतगृहों की मनमानी देखकर आम किसान अब वहां आलू रखने को तैयार नहीं हैं।
250 रुपये क्विंटल शुल्क, उसमें भी वजन का होता है खेल
शीतगृहों में आलू रखने वाले किसानों को 250 रुपये प्रति क्विंटल शु्ल्क अदा करना पड़ता है। शुल्क देने के बाद भी शीतगृहों से निकालते समय किसानों के आलू का वजन नहीं किया जाता है। किसानों की मानें तो जमा करते समय बोरियां भरी होती हैं, जबकि निकालने पर बोरी में आधी मात्रा ही बचती है। इससे बचने के लिए किसानों ने इस बार आलू का भंडारण अपनी आवश्यकता के अनुरूप ही किया है।

जिले में इस बार 50 प्रतिशत ही आलू का भंडारण हुआ था। शीतगृहों में जो आलू है उसे किसान निकाल नहीं रहे हैं। इससे दाम में इजाफा होता जा रहा है। शासन को अवगत कराया गया है। जल्द ही दाम नियंत्रित होने की संभावना है।
अनिल कुमार दुबे, जिला उद्यान अधिकारी
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