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Pratapgarh News: जिले के 217 गांवों का पानी पीने लायक नहीं
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जल निगम ने जिले के 217 ऐसे गांवों को चिह्नित किया है, जहां का पानी पीने लायक नहीं है। जुलाई-अगस्त माह में हुई जांच में इन क्षेत्रों में पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई थी, जो नुकसानदेह है। इन गांवों में आरओ प्लांट लगाकर पानी की सप्लाई करने की सलाह दी गई है।
जीवन मिशन योजना के तहत गांव-गांव पाइपलाइन बिछाने और ओवरहेड टैंक बनाने से पहले पानी की गुणवत्ता की जांच की गई थी, जिसमें यह रिपोर्ट निकलकर सामने आई है।
फ्लोराइड की अधिकता वाले गांव संडवा चंद्रिका, शिवगढ़, सदर, मंगरौरा, मानधाता, गौरा और सांगीपुर में हैं। इन गांवों में 65 से 120 फिट तक पानी पीने योग्य नहीं है। अब यहा आरओ प्लांट लगाने की तैयारी चल रही है।
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जिन गांवों में फ्लोराइड अधिक मिला है, उनमें से अधिकांश गांव नदी से तीन से पांच किमी की दूरी पर हैं। जलजीवन मिशन के तहत इन गांवों में स्थापित होने वाली पानी की टंकी के साथ ही आरओ प्लांट लगाया जा रहा है। इन गांवों में 600-800 मीटर गहरी बोरिंग की जा रही है। फ्लोराइड अधिक होने से अभी तक 86 गांवों में बोरिंग नष्ट की जा चुकी है। इससे विभाग को लगभग 32 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
बोरिंग कराने की तैयारी
जल निगम के अफसरों का कहना है कि फ्लोराइड की समस्या 120 फीट तक ही है। गहरी बोरिंग करने पर सामान्य पानी मिल सकता है। इसके बाद भी दिक्कत आने पर दूसरों गांवों के वाटर हेड टैंक से पानी की आपूर्ति की जाएगी। हर घर को नल से जल पहुंचाने के लिए इन दिनों पूरे जिले में सर्वे हो रहा है।
तीन क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा खराब
लैब टेक्नीशियन विवेक कुमार ने बताया कि फ्लोराइड की मात्रा प्वाइंट 1.5 पीपीएम से अधिक है तो पानी पीने योग्य नहीं रहता। नुकसानदेह होता है। प्रतापगढ़ जनपद के सदर ब्लॉक के भुवालपुर डोमीपुर और मोहनगंज में सर्वाधिक 2.8 पीपीएम तक फ्लोराइड की मात्रा रिकॉर्ड की गई है।
हड्डियां कमजोर करता है फ्लोराइड
मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनोज खत्री का कहना है कि फ्लोराइड युक्त पानी पीने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और दांत समय से पहले गिर जाते हैं। लिवर और किडनी पर भी बुरा असर पड़ता है। इसलिए प्रयास करना चाहिए कि फ्लोराइड युक्त पानी का प्रयोग न किया जाय।
फ्लोराइड युक्त पानी का दायरा बढ़ता जा रहा है। पानी की जांच में खुलासा हुआ है कि जिन गांवों में पहले सामान्य पानी था, वहां भी अब फ्लोराइड युक्त पानी मिल रहा है।
- अजय कुमार उपाध्याय, अधिशाषी अभियंता,जलनिगम
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जीवन मिशन योजना के तहत गांव-गांव पाइपलाइन बिछाने और ओवरहेड टैंक बनाने से पहले पानी की गुणवत्ता की जांच की गई थी, जिसमें यह रिपोर्ट निकलकर सामने आई है।
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फ्लोराइड की अधिकता वाले गांव संडवा चंद्रिका, शिवगढ़, सदर, मंगरौरा, मानधाता, गौरा और सांगीपुर में हैं। इन गांवों में 65 से 120 फिट तक पानी पीने योग्य नहीं है। अब यहा आरओ प्लांट लगाने की तैयारी चल रही है।
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जिन गांवों में फ्लोराइड अधिक मिला है, उनमें से अधिकांश गांव नदी से तीन से पांच किमी की दूरी पर हैं। जलजीवन मिशन के तहत इन गांवों में स्थापित होने वाली पानी की टंकी के साथ ही आरओ प्लांट लगाया जा रहा है। इन गांवों में 600-800 मीटर गहरी बोरिंग की जा रही है। फ्लोराइड अधिक होने से अभी तक 86 गांवों में बोरिंग नष्ट की जा चुकी है। इससे विभाग को लगभग 32 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
बोरिंग कराने की तैयारी
जल निगम के अफसरों का कहना है कि फ्लोराइड की समस्या 120 फीट तक ही है। गहरी बोरिंग करने पर सामान्य पानी मिल सकता है। इसके बाद भी दिक्कत आने पर दूसरों गांवों के वाटर हेड टैंक से पानी की आपूर्ति की जाएगी। हर घर को नल से जल पहुंचाने के लिए इन दिनों पूरे जिले में सर्वे हो रहा है।
तीन क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा खराब
लैब टेक्नीशियन विवेक कुमार ने बताया कि फ्लोराइड की मात्रा प्वाइंट 1.5 पीपीएम से अधिक है तो पानी पीने योग्य नहीं रहता। नुकसानदेह होता है। प्रतापगढ़ जनपद के सदर ब्लॉक के भुवालपुर डोमीपुर और मोहनगंज में सर्वाधिक 2.8 पीपीएम तक फ्लोराइड की मात्रा रिकॉर्ड की गई है।
हड्डियां कमजोर करता है फ्लोराइड
मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनोज खत्री का कहना है कि फ्लोराइड युक्त पानी पीने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और दांत समय से पहले गिर जाते हैं। लिवर और किडनी पर भी बुरा असर पड़ता है। इसलिए प्रयास करना चाहिए कि फ्लोराइड युक्त पानी का प्रयोग न किया जाय।
फ्लोराइड युक्त पानी का दायरा बढ़ता जा रहा है। पानी की जांच में खुलासा हुआ है कि जिन गांवों में पहले सामान्य पानी था, वहां भी अब फ्लोराइड युक्त पानी मिल रहा है।
- अजय कुमार उपाध्याय, अधिशाषी अभियंता,जलनिगम