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अनुमोदन किसी का, पढ़ा रहा कोई और

Tue, 23 Feb 2016 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Tue, 23 Feb 2016 11:44 PM IST
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महाविद्यालय प्रशासन छात्र-छात्राओं के शैक्षिक भविष्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। उसके बाद भी मामले की जांच तक नहीं की जा रही है। छात्र-छात्राओं का भविष्य उज्ज्वल बनाने का दावा करने वाले महाविद्यालय प्रशासन दरअसल, उनके शैक्षिक भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। एक तरफ जहां अनुदानित महाविद्यालयों में शिक्षकों का टोटा है, वहीं स्ववित्त पोषित कॉलेजों में अनुमोदित शिक्षकों की जगह बीए, एमए पास लोग पढ़ा रहे हैं। ऐसे में छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापरक शिक्षा मिलना सपना बनकर रह गया है। विश्वविद्यालय मानक के अनुसार महाविद्यालयों में वही शिक्षक पढ़ा सकते हैं, जो विश्वविद्यालय द्वारा अनुमोदित हैं।
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अनुमोदन के लिए शिक्षकों का संबंधित विषय में नेट या पीएचडी होना अनिवार्य होता है। अनुमोदित शिक्षकों को हर माह मानदेय दिया जाता है। ऐसे में महाविद्यालय प्रशासन ने अपने यहां मान्यता प्राप्त विषयों के शिक्षकों का अनुमोदन कराया है, लेकिन उनकी जगह औने-पौने दाम पर शिक्षक रखे गए हैं। जबकि अनुमोदित शिक्षक अधिक कमाई करने के लिए किसी दूसरे काम में व्यस्त रहते हैं। वह महाविद्यालय आना जरूरी नहीं समझते हैं। वह सिर्फ अपने अभिलेखों को महाविद्यालय में जमा कर देते हैं। जिससे जांच में वह पकड़े न जाएं। वहीं विश्वविद्यालय द्वारा जांच न होने से महाविद्यालय प्रशासन मनमानी कर रहे हैं। योग्य शिक्षकों द्वारा न पढ़ाए जाने के कारण शिक्षा का स्तर दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। जिससे गुणवत्तापरक शिक्षा पाना अब सपना बनकर रह गया है।
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