{"_id":"4d042487ba064f26baf3ed611f1baaa8","slug":"pratapgarh-news-hindi-news-848","type":"story","status":"publish","title_hn":"केमिकल से बदल दी जाती है केरोसिन की गंध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केमिकल से बदल दी जाती है केरोसिन की गंध
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 21 Feb 2016 11:24 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केरोसिन से पेट्रोल और डीजल तैयार करने के लिए केमिकल से उसकी गंध को बदल दिया जाता है। इस केमिकल को मिलाने के लिए फूलमती देवी धाम में ही प्लांट लगाया गया है। इस प्लांट में पांच हजार लीटर डीजल, पेट्रोल प्रतिदिन बनाया जा सकता है। आम आदमी इसकी जांच तो कर सकता है लेकिन इसमें 24 से 48 घंटे का समय लग सकता है। हां यदि सरकारी महकमा इसकी उच्च स्तरीय जांच कराए तो यह भेद खुल सकता है।
हथिगवां थाना क्षेत्र के फूलमती धाम के पास प्लांट लगाकर केरोसिन से डीजल और पेट्रोल बनाने का काम किया जा रहा है। रात में किए जाने वाले इस कार्य में जिस केमिकल का प्रयोग किया जाता है वह केरोसिन में डीजल और पेट्रोल जैसी गंध पैदा कर देता है। हालांकि सरकारी नीले केरोसिन को टंकियों के माध्यम से पहले सफेद किया जाता है। इसके बाद इसमें केमिकल मिलाने पर पेट्रोल और डीजल जैसी गंध आने लगती है और इसका रंग बदल जाता है। आम आदमी की समस्या है कि इसे पेट्रोल पंप पर मौजूद संसाधन से चेक नहीं किया जा सकता।
इसके लिए या तो 24 से 48 घंटे इसे डिब्बे में रखा जाए तो इसका असर नीचे दिखने लगेगा। लोगों को इतना समय ही नहीं है कि वह इसकी जांच कर सकें। इसके चलते यह गोरखधंधा लगातार चल रहा है। लोगों का मानना है कि यदि इसकी जांच उच्चस्तरीय प्रयोगशाला में कराई जाए तो इसका भेद खुल सकता है लेकिन किसी को इस तरफ ध्यान देने की फुर्सत नहीं है। इस गोदाम में ही इस तरह का प्लांट लगा है कि इसे देखने के बाद ही इसका खुलासा हो सकता है लेकिन अधिकारी पता नहीं क्यों इस तरफ से आंख मूंदे बैठे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
हथिगवां थाना क्षेत्र के फूलमती धाम के पास प्लांट लगाकर केरोसिन से डीजल और पेट्रोल बनाने का काम किया जा रहा है। रात में किए जाने वाले इस कार्य में जिस केमिकल का प्रयोग किया जाता है वह केरोसिन में डीजल और पेट्रोल जैसी गंध पैदा कर देता है। हालांकि सरकारी नीले केरोसिन को टंकियों के माध्यम से पहले सफेद किया जाता है। इसके बाद इसमें केमिकल मिलाने पर पेट्रोल और डीजल जैसी गंध आने लगती है और इसका रंग बदल जाता है। आम आदमी की समस्या है कि इसे पेट्रोल पंप पर मौजूद संसाधन से चेक नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
इसके लिए या तो 24 से 48 घंटे इसे डिब्बे में रखा जाए तो इसका असर नीचे दिखने लगेगा। लोगों को इतना समय ही नहीं है कि वह इसकी जांच कर सकें। इसके चलते यह गोरखधंधा लगातार चल रहा है। लोगों का मानना है कि यदि इसकी जांच उच्चस्तरीय प्रयोगशाला में कराई जाए तो इसका भेद खुल सकता है लेकिन किसी को इस तरफ ध्यान देने की फुर्सत नहीं है। इस गोदाम में ही इस तरह का प्लांट लगा है कि इसे देखने के बाद ही इसका खुलासा हो सकता है लेकिन अधिकारी पता नहीं क्यों इस तरफ से आंख मूंदे बैठे हैं।
विज्ञापन