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यूजीसी पर दिखा स्वच्छ भारत मिशन का असर
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Mon, 28 Dec 2015 11:26 PM IST
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स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिए खतरा बनी पॉलीथिन के खिलाफ चल रही जंग में यूजीसी ने भी भागीदारी दर्ज कराई है। रविवार को संपन्न हुई नेट/जेआरएफ परीक्षा में पहली बार टेस्ट बुकलेट सीरीज खुली आई। यह देख सभी परीक्षार्थी अचंभित रह गए। इस पर यूजीसी के लोगों ने कहा स्वच्छ भारत मिशन की वजह से ऐसा किया गया है।
सूबे की सपा सरकार ने पॉलीथिन व कैरी बैग पर रोक लगा दी है।
साथ ही लोगों को जागरुक करने के लिए विभिन्न संस्थाओं द्वारा पहल भी की जा रही है। इस बार से यूजीसी भी इस मुहिम में जुड़ गया। रविवार को यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) ने नेशनल इलिजबिलिटी टेस्ट परीक्षा कराई। इस दौरान परीक्षा कक्ष में परीक्षार्थियों को देेने के लिए लाई गई टेस्ट बुकलेट पन्नी में सील नहीं थी। बल्कि खुली हुई बुकलेट का बंडल परीक्षा में लाया गया।
यह देख परीक्षार्थियों ने परीक्षा की विश्वनियता पर सवाल खड़ा कर दिया। इस पर यूजीसी के लोगों ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन की वजह से यह किया गया है। पॉलीथिन बैन होने की वजह से बुकलेट का बंडल खुला हुआ है। इसे पालीथिन के अंदर पैक कर नहीं लाया गया। यूजीसी की इस पहल पर प्रतियोगी परीक्षार्थियों ने भी गंदगी न फैलाने और पालीथिन का प्रयोग न करने का संकल्प लेते हुए परीक्षा दी।
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पहली बार यूजीसी ने अपनी कलम से परीक्षा कराई। अभी तक किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में भर्ती आयोग द्वारा पेन उपलब्ध नहीं कराई जाती थी। यह पहली बार है जब परीक्षार्थियों से उनकी कलम जमा करा ली गई और उन्हें अपनी ओर से काली बाल प्वाइंट पेन परीक्षा देने के लिए उपलब्ध कराई गई। जिस पर यूजीसी नेट दिसंबर 2015 लिखा हुआ था। खास बात यह भी रही है कि परीक्षा में हाथ घड़ी पर भी बैन लगा दिया गया। परीक्षार्थी घड़ी लगाकर परीक्षा कक्ष में प्रवेश नहीं कर सके। जबकि सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्र-छात्राएं टाइम मैनेजमेंट के लिए घड़ी लगाकर जाते हैं।
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सूबे की सपा सरकार ने पॉलीथिन व कैरी बैग पर रोक लगा दी है।
साथ ही लोगों को जागरुक करने के लिए विभिन्न संस्थाओं द्वारा पहल भी की जा रही है। इस बार से यूजीसी भी इस मुहिम में जुड़ गया। रविवार को यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) ने नेशनल इलिजबिलिटी टेस्ट परीक्षा कराई। इस दौरान परीक्षा कक्ष में परीक्षार्थियों को देेने के लिए लाई गई टेस्ट बुकलेट पन्नी में सील नहीं थी। बल्कि खुली हुई बुकलेट का बंडल परीक्षा में लाया गया।
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यह देख परीक्षार्थियों ने परीक्षा की विश्वनियता पर सवाल खड़ा कर दिया। इस पर यूजीसी के लोगों ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन की वजह से यह किया गया है। पॉलीथिन बैन होने की वजह से बुकलेट का बंडल खुला हुआ है। इसे पालीथिन के अंदर पैक कर नहीं लाया गया। यूजीसी की इस पहल पर प्रतियोगी परीक्षार्थियों ने भी गंदगी न फैलाने और पालीथिन का प्रयोग न करने का संकल्प लेते हुए परीक्षा दी।
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पहली बार यूजीसी ने अपनी कलम से परीक्षा कराई। अभी तक किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में भर्ती आयोग द्वारा पेन उपलब्ध नहीं कराई जाती थी। यह पहली बार है जब परीक्षार्थियों से उनकी कलम जमा करा ली गई और उन्हें अपनी ओर से काली बाल प्वाइंट पेन परीक्षा देने के लिए उपलब्ध कराई गई। जिस पर यूजीसी नेट दिसंबर 2015 लिखा हुआ था। खास बात यह भी रही है कि परीक्षा में हाथ घड़ी पर भी बैन लगा दिया गया। परीक्षार्थी घड़ी लगाकर परीक्षा कक्ष में प्रवेश नहीं कर सके। जबकि सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्र-छात्राएं टाइम मैनेजमेंट के लिए घड़ी लगाकर जाते हैं।