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बेल्हा में एनआरएचएम घोटाले की आंच
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Thu, 24 Dec 2015 11:23 PM IST
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राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की आंच बेल्हा तक पहुंची गई है। जिले में दवाओं और उपकरणों की खरीद में जो अनियमितता सामने आई है, उसमें खुलासा हुआ है कि जो दवाएं सीएचसी और पीएचसी को भेजी गई हैं वे अस्पताल तक पहुंची ही नहीं है। ऐसे में सीबीआई की जांच में कई अफसरों की गर्दन फंस सकती है।
बसपा कार्यकाल में हुए एनएचआरएम घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है। अभी तक बड़े जिलों में हुए खेल पर नजर रखने वाले सीबीआई अफसरों ने अब जिले में भी जांच शूरू कर दी है। वर्ष 2005-2011 के बीच एनएचआरएम योजना के तहत जिले में हुई खरीद-फरोख्त का ब्यौरा जुटाया जा रहा है। जिले में सीबीआई का फोन घनघनाते ही अफसर सीएचसी और पीएचसी को भेजी गई और खरीदी गई दवाओं का मिलान करने में जुट गए हैं। विभागीय खोजबीन में यह मामला उजागर हुआ है कि जिले में दवाएं और उपकरण खरीदे तो गए, मगर वह सीएचसी और पीएचसी में अभी तक नहीं पहुंचे हैं। मुख्यालय और सीएचसी और पीएचसी में स्टॉक रजिस्टर से मिलान करने पर इसका खुलासा हुआ है।
अफसरों के माध्यम से इस बात की भनक जब लखनऊ में विभागीय अधिकारियों को हुई तो वे सत्यापन करने के लिए जिले में तीन दिन से डेरा डालकर अभिलेखों को दुरुस्त कराने में लगे हुए हैं। चीफ फार्मेसिस्ट आरके मिश्रा के मुताबिक दर्जनों मंहगी दवाएं ऐसी हैं जो मुख्यालय के रजिस्टर में तो दर्ज हैं, मगर सीएचसी और पीएचसी के रिकार्ड में नहीं हैं। अगर यह बात सच साबित हुई तो जिले का सबसे बड़ा घोटाला होगा और दर्जनों अफसरों और कर्मचारियों की गर्दन फंस सकती है। वहीं सीएमओ वीके पांडेय का कहना ह्र्र्र्र्र्रै कि जांच तो पूरे प्रदेश में चल रही है। मगर हमारे यहां ऐसी कोई गड़बड़ी नहीं है।
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बसपा कार्यकाल में हुए एनएचआरएम घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है। अभी तक बड़े जिलों में हुए खेल पर नजर रखने वाले सीबीआई अफसरों ने अब जिले में भी जांच शूरू कर दी है। वर्ष 2005-2011 के बीच एनएचआरएम योजना के तहत जिले में हुई खरीद-फरोख्त का ब्यौरा जुटाया जा रहा है। जिले में सीबीआई का फोन घनघनाते ही अफसर सीएचसी और पीएचसी को भेजी गई और खरीदी गई दवाओं का मिलान करने में जुट गए हैं। विभागीय खोजबीन में यह मामला उजागर हुआ है कि जिले में दवाएं और उपकरण खरीदे तो गए, मगर वह सीएचसी और पीएचसी में अभी तक नहीं पहुंचे हैं। मुख्यालय और सीएचसी और पीएचसी में स्टॉक रजिस्टर से मिलान करने पर इसका खुलासा हुआ है।
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अफसरों के माध्यम से इस बात की भनक जब लखनऊ में विभागीय अधिकारियों को हुई तो वे सत्यापन करने के लिए जिले में तीन दिन से डेरा डालकर अभिलेखों को दुरुस्त कराने में लगे हुए हैं। चीफ फार्मेसिस्ट आरके मिश्रा के मुताबिक दर्जनों मंहगी दवाएं ऐसी हैं जो मुख्यालय के रजिस्टर में तो दर्ज हैं, मगर सीएचसी और पीएचसी के रिकार्ड में नहीं हैं। अगर यह बात सच साबित हुई तो जिले का सबसे बड़ा घोटाला होगा और दर्जनों अफसरों और कर्मचारियों की गर्दन फंस सकती है। वहीं सीएमओ वीके पांडेय का कहना ह्र्र्र्र्र्रै कि जांच तो पूरे प्रदेश में चल रही है। मगर हमारे यहां ऐसी कोई गड़बड़ी नहीं है।
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