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प्रतापगढ़: 1,557 बूूथों पर बुनियादी सुविधाओं का टोटा
Wed, 13 Mar 2019 11:32 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 13 Mar 2019 11:32 PM IST
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लोकसभा चुनाव में जिले के 23,48,602 मतदाताओं के लिए 2616 बूथ बनाए गए हैं। इनमें 1557 बूथ ऐसेे हैं, जहां पानी, बिजली और शौचालय की व्यवस्था नहीं है। अधिकांश प्राइमरी स्कूल ऐसे हैं, जिनमें शौचालय तो बने हुए हैं, मगर टूटे होने के कारण मतदान कार्मिक उसे प्रयोग नहीं कर पाएंगे। बिजली का आलम यह है कि विधानसभा चुनाव में जिन बूथों पर लाइट चल रही थी, इस वक्त वहां भी अंधेरा है।
लोकसभा चुनाव की तैयारियों में लगे जिला प्रशासन को बूथों पर मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने में पसीना छूट रहा है। जिले के आधे से अधिक बूथों पर मूलभूत सुविधाओं का ही टोटा है। हालांकि डीपीआरओ और बिजली विभाग इस पर पर्दा डालने में जुटे हैं। डीएम के निर्देश पर बीएसए ने बूथों की सूचना एकत्रित की है। उसके मुताबिक 2616 बूथों में 1557 बूथ ऐेसे हैं, जहां न तो बिजली है और न ही अभी तक बिजली पहुंची है। शौचालयों का हाल यह है कि अधिकांश बूथों पर टूटे और आधे-अधूरे पड़े हैं।
इधर, बेसिक शिक्षा विभाग ने जो सूचनाएं एकत्रित की हैं, उसे बिजली विभाग और पंचायती राज विभाग झूठा करार देने में लगे हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने जो सूचना एकत्रित की हैं, वह स्कूलों में तैनात अध्यापकों से जुटाई हैं। जबकि
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अन्य विभाग झूठी सूचना देकर जिला प्रशासन को गुमराह करना चाहते हैं।
रिबोरिंग नहीं हुई तो पानी को तरसेंगे कर्मचारी
जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलोें में लगे हैंडपंपों की अगर अविलंब रिबोरिंग नहीं कराई गई तो बूथों पर मतदाता कार्मिकों के साथ ही मतदाताओं को पानी के लिए तरसना होगा। फिलहाल अभी तक इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई है।
जिले में जो विद्यालय और पंचायत भवन बूथ बनाए गए हैं, उन पर सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। जिन बूथों पर पानी, बिजली, शौचालय नहीं है, वहां 15 दिन के अंदर संबंधित विभाग को व्यवस्था कराने के लिए कहा गया है।
शत्रोहन वैश्य, एडीएम।
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लोकसभा चुनाव की तैयारियों में लगे जिला प्रशासन को बूथों पर मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने में पसीना छूट रहा है। जिले के आधे से अधिक बूथों पर मूलभूत सुविधाओं का ही टोटा है। हालांकि डीपीआरओ और बिजली विभाग इस पर पर्दा डालने में जुटे हैं। डीएम के निर्देश पर बीएसए ने बूथों की सूचना एकत्रित की है। उसके मुताबिक 2616 बूथों में 1557 बूथ ऐेसे हैं, जहां न तो बिजली है और न ही अभी तक बिजली पहुंची है। शौचालयों का हाल यह है कि अधिकांश बूथों पर टूटे और आधे-अधूरे पड़े हैं।
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इधर, बेसिक शिक्षा विभाग ने जो सूचनाएं एकत्रित की हैं, उसे बिजली विभाग और पंचायती राज विभाग झूठा करार देने में लगे हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने जो सूचना एकत्रित की हैं, वह स्कूलों में तैनात अध्यापकों से जुटाई हैं। जबकि
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अन्य विभाग झूठी सूचना देकर जिला प्रशासन को गुमराह करना चाहते हैं।
रिबोरिंग नहीं हुई तो पानी को तरसेंगे कर्मचारी
जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलोें में लगे हैंडपंपों की अगर अविलंब रिबोरिंग नहीं कराई गई तो बूथों पर मतदाता कार्मिकों के साथ ही मतदाताओं को पानी के लिए तरसना होगा। फिलहाल अभी तक इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई है।
जिले में जो विद्यालय और पंचायत भवन बूथ बनाए गए हैं, उन पर सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। जिन बूथों पर पानी, बिजली, शौचालय नहीं है, वहां 15 दिन के अंदर संबंधित विभाग को व्यवस्था कराने के लिए कहा गया है।
शत्रोहन वैश्य, एडीएम।