प्रतापगढ़ : बिकरू कांड में शहीद दरोगा अनूप सिंह की पत्नी को मिली ओएसडी की नौकरी
जिले के मानधाता थाना क्षेत्र के ग्राम बेलखरी निवासी अनूप सिंह बिठूर थाना क्षेत्र की मंधना चौकी के इंचार्ज थे। गैंगस्टर विकास दुबे के घर दो जुलाई की रात दबिश के दौरान मुठभेड़ में अनूप शहीद हो गए थे। अनूप सिंह की शहादत के बाद परिवार के लोग नीतू की नौकरी के लिए दो साल से संघर्ष कर रहे थे।
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बिकरू कांड में शहीद दरोगा अनूप सिंह की पत्नी नीतू को आखिरकार दो साल बाद विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) की नौकरी मिल गई है। उन्हें लखनऊ पुलिस हेड क्वार्टर में तैनाती दी गई है। पति की शहादत के बाद नौकरी को लेकर अनूप के परिजन दो बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिल चुके थे। दरोगा की शहादत के बाद सरकार की ओर से पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद भी दी जा चुकी है।
जिले के मानधाता थाना क्षेत्र के ग्राम बेलखरी निवासी अनूप सिंह बिठूर थाना क्षेत्र की मंधना चौकी के इंचार्ज थे। गैंगस्टर विकास दुबे के घर दो जुलाई की रात दबिश के दौरान मुठभेड़ में अनूप शहीद हो गए थे। अनूप सिंह की शहादत के बाद परिवार के लोग नीतू की नौकरी के लिए दो साल से संघर्ष कर रहे थे। पुलिस हेडक्वार्टर से लेकर सीएम दरबार में भी चक्कर लगाए। दो बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बच्चों को लेकर नीतू भी मिलीं। आश्वासन मिला था कि उन्हें जल्द ओएसडी की नौकरी मिलेगी।
सोमवार को पुलिस हेडक्वार्टर लखनऊ में नीतू को ओएसडी के पद पर ज्वाइन कराया गया। नीतू सिंह की बेटी गौरी सिंह कक्षा छह व बेटा सूर्यांश यूकेजी में पढ़ता है। उनके परिवार में ससुर, देवर, जेठ व जेठानी हैं। नीतू सिंह का कहना है कि नौकरी से उनको व परिवार के लोगों को बहुत मदद मिलेगी। नीतू ने पुलिस हेडक्वार्टर में ज्वाइनिंग के बाद आवास की मांग की है।
ट्रेनिंग के बाद अनूप की कानपुर में हुई थी पहली तैनाती
शहीद अनूप की पत्नी नीतू ने बताया कि उन्नाव में ट्रेनिंग करने के बाद कानपुर में अनूप की पहली पोस्टिंग हुई थी। अनूप 2004 में कांस्टेबल के पद पर पुलिस में भर्ती हुए थे। अपनी मेहनत के बल पर 2015 में दरोगा बने थे। ट्रेनिंग के बाद दरोगा पद पर 2017 में उनकी पहली पोस्टिंग कानपुर के बाबूपुरवा थाने में हुई। फिर टिकरा चौकी के बाद मंधना चौकी में तैनाती हुई थी।
पहले सीओ की बेटी, फिर दरोगा की पत्नी को मिली नौकरी
बिकरू कांड में बिल्हौर सीओ देवेंद्र मिश्रा (मूल रूप से बांदा निवासी) भी शहीद हुए थे। उनकी बड़ी बेटी वैष्णवी मिश्रा ने ओएसडी पद के लिए आवेदन किया था। एक साल तक चली प्रक्रिया के बाद वैष्णवी को ओएसडी की नौकरी मिल गई थी। वैष्णवी की तैनाती पुलिस मुख्यालय में की गई थी, लेकिन अब उनका तबादला कानपुर कमिश्नरी में कर दिया गया है। दो साल बाद अब शहीद दरोगा अनूप की पत्नी नीतू को ओएसडी की नौकरी दी गई है, जिससे परिवार के लोगों की परेशानी दूर हो गई है।