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संक्रांति के बाद ठंड का कहर, कोहरे संग आई शीतलहर
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 17 Jan 2016 11:43 PM IST
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आम लोगों के साथ मौसम वैज्ञानिक भी यह मानते हैं कि संक्रांति पर सूर्य के उत्तरायण होने के बाद सर्दी का असर कम होने लगता है, लेकिन इस बार इसका उल्टा हो गया है। संक्रांति के बाद कड़ाके की ठंड ने दस्तक दी है। रविवार को इस सीजन में पहली बार लोगों को दिन में भी हाड़ कंपा देने वाली सर्दी का अनुभव हुआ। सुबह कोहरे की चादर और दिनभर धुंध के कारण लोगों को सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। गलन के मारे सबका बुरा हाल था।
पहाड़ों पर हुई बर्फबारी और उत्तर-पश्चिम की ओर से चलने वाली हवाएं लोगों के शरीर में तीर की तरह चुभ रही थीं। हर कोई अलाव ढूंढता नजर आ रहा था। ठंड का आलम यह रहा कि स्वेटर, जैकेट के साथ लोगों के हाथों में दस्ताने भी नजर आने लगे। पूरे दिन लोग कांपते रहे। बाजारों-चौराहों पर रोज की अपेक्षा भीड़ काफी कम रही। शाम होते ही सन्नाटा छा गया। लोग घरों में दुबक गए।
जिले में अचानक कड़ाके की ठंड ने फिर से दस्तक दे दी है। रविवार को दिन भर कोहरे और धुंध की चादर तनी रही। पहाड़ों पर हुई बर्फबारी से ठिठुरन बढ़ गई है। लोग दिन भर आग का इंतजाम करते नजर आए। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसा हो रहा है। हालत यह रही है कि दिनभर सूर्यदेव के दर्शन नहीं हो सके। दोपहर में सवा दो बजे के करीब सूर्यदेव ने बादलों के बीच से झांकने की कोशिश जरूर की, लेकिन दिये की तरह टिमटिमाते ही नजर आए। गलन के कारण लोगों का बुरा हाल था। मौसम में हुए अचानक बदलाव ने आफत खड़ी कर दी है। लोगों ने गर्म कपड़े फिर से निकाल लिए हैं।
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वहीं ठंडे पड़ चुके अलाव एक बार फिर जलने लगे हैं। लोग जरूरी काम से ही बाहर निकलने की हिमाकत कर सके। जो भी बाहर निकले वे गर्म कपड़ाें में लिपटे रहे। गलन भरी सर्दी में चाय-पान की दुकानों पर भी लोग आग से हाथ सेंकते नजर आए। मौसम वैज्ञानिक देशराज मीना ने बताया कि जलवायु परिवर्तन से ऐसा हो रहा है। इस वजह से ठंड का असर बढ़ गया है। पहाड़ों पर बर्फबारी के साथ वहां से चलने वाली पश्चिम-उत्तर हवा ने गलन बढ़ा दी है। उन्होंने बताया कि हालात यही रही तो ठंड अधिक दिनों तक पड़ेगी।
अचानक गलन भरी ठंड के आते ही दुकानों पर गर्म कपड़ों की खरीददारी लोगों ने तेज कर दी है। रविवार को लोगों ने दुकानों पर कई तरह के गर्म कपड़े खरीदे।
जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गेहूं फसल के लिए कड़ाके की ठंड वरदान साबित होगी। गेहूं ऐसी फसल है जिसे शुरू में सर्दी और पकने के लिए गर्मी की जरूरत होती है। अगर ठंड नहीं पड़ती तो उत्पादन मारा जाता। ऐसे में यह ठंड किसानों के लिए राहत भरी साबित होगी। वहीं चना, सरसों, मटर पर भी अच्छा असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इस मौसम में बारिश होने पर सरसों की फसल को नुकसान हो सकता है। बारिश होने से माहू कीट बढ़ जाते हैं जो फसल को बर्बाद कर देते हैं।
एमडीपीजी कालेज के भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद शुक्ल ने बताया कि पहाड़ों पर पश्चिमी विक्षोभ ऊंचाई पर चल रहा है। जिससे गर्म हवाएं मैदानी भागों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। पश्चिमी विक्षोभ के नीचे चलने से गर्म हवाएं जब मैदानी भागों में पहुंचेगी तब ठंड का असर कम होगा।
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पहाड़ों पर हुई बर्फबारी और उत्तर-पश्चिम की ओर से चलने वाली हवाएं लोगों के शरीर में तीर की तरह चुभ रही थीं। हर कोई अलाव ढूंढता नजर आ रहा था। ठंड का आलम यह रहा कि स्वेटर, जैकेट के साथ लोगों के हाथों में दस्ताने भी नजर आने लगे। पूरे दिन लोग कांपते रहे। बाजारों-चौराहों पर रोज की अपेक्षा भीड़ काफी कम रही। शाम होते ही सन्नाटा छा गया। लोग घरों में दुबक गए।
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जिले में अचानक कड़ाके की ठंड ने फिर से दस्तक दे दी है। रविवार को दिन भर कोहरे और धुंध की चादर तनी रही। पहाड़ों पर हुई बर्फबारी से ठिठुरन बढ़ गई है। लोग दिन भर आग का इंतजाम करते नजर आए। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसा हो रहा है। हालत यह रही है कि दिनभर सूर्यदेव के दर्शन नहीं हो सके। दोपहर में सवा दो बजे के करीब सूर्यदेव ने बादलों के बीच से झांकने की कोशिश जरूर की, लेकिन दिये की तरह टिमटिमाते ही नजर आए। गलन के कारण लोगों का बुरा हाल था। मौसम में हुए अचानक बदलाव ने आफत खड़ी कर दी है। लोगों ने गर्म कपड़े फिर से निकाल लिए हैं।
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वहीं ठंडे पड़ चुके अलाव एक बार फिर जलने लगे हैं। लोग जरूरी काम से ही बाहर निकलने की हिमाकत कर सके। जो भी बाहर निकले वे गर्म कपड़ाें में लिपटे रहे। गलन भरी सर्दी में चाय-पान की दुकानों पर भी लोग आग से हाथ सेंकते नजर आए। मौसम वैज्ञानिक देशराज मीना ने बताया कि जलवायु परिवर्तन से ऐसा हो रहा है। इस वजह से ठंड का असर बढ़ गया है। पहाड़ों पर बर्फबारी के साथ वहां से चलने वाली पश्चिम-उत्तर हवा ने गलन बढ़ा दी है। उन्होंने बताया कि हालात यही रही तो ठंड अधिक दिनों तक पड़ेगी।
अचानक गलन भरी ठंड के आते ही दुकानों पर गर्म कपड़ों की खरीददारी लोगों ने तेज कर दी है। रविवार को लोगों ने दुकानों पर कई तरह के गर्म कपड़े खरीदे।
जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गेहूं फसल के लिए कड़ाके की ठंड वरदान साबित होगी। गेहूं ऐसी फसल है जिसे शुरू में सर्दी और पकने के लिए गर्मी की जरूरत होती है। अगर ठंड नहीं पड़ती तो उत्पादन मारा जाता। ऐसे में यह ठंड किसानों के लिए राहत भरी साबित होगी। वहीं चना, सरसों, मटर पर भी अच्छा असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इस मौसम में बारिश होने पर सरसों की फसल को नुकसान हो सकता है। बारिश होने से माहू कीट बढ़ जाते हैं जो फसल को बर्बाद कर देते हैं।
एमडीपीजी कालेज के भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद शुक्ल ने बताया कि पहाड़ों पर पश्चिमी विक्षोभ ऊंचाई पर चल रहा है। जिससे गर्म हवाएं मैदानी भागों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। पश्चिमी विक्षोभ के नीचे चलने से गर्म हवाएं जब मैदानी भागों में पहुंचेगी तब ठंड का असर कम होगा।