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प्रतापगढ़: कांग्रेस ने रत्ना पर फिर जताया भरोसा
Fri, 15 Mar 2019 12:05 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 15 Mar 2019 12:05 AM IST
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कांग्रेस ने एक बार फिर पूर्व सांसद रत्ना सिंह पर अपना भरोसा जताया है। बुधवार की शाम कांग्रेस प्रत्याशियों की जारी की गई सूची में पार्टी ने उन्हें प्रतापगढ़ से अपना उम्मीदवार बनाया है। यह सातवां मौका होगा, जब रत्ना सिंह चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमाएंगी। वह तीन बार जिले की सांसद रह चुकी हैं।
कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची में पूर्व सांसद रत्ना सिंह का नाम होने के साथ ही लंबे समय से चल रहीं तमाम अटकलों पर विराम लग गया है। सातवीं बार चुनाव मैदान में कूदने वाली रत्ना सिंह इसके पूर्व तीन बार सांसद रह चुकी हैं। पूर्व विदेश मंत्री राजा दिनेश सिंह की विरासत को संभालने के लिए 1996 में पहला चुनाव लड़ने वाली रत्ना सिंह को भारी मतों से जीत मिली थी।
दो साल बाद 1998 में हुए मध्यावधि चुनाव में रामविलास वेदांती से हार का सामना करना पड़ा। 1999 में हुए चुनाव में वह फिर सांसद बनीं। 2004 के चुनाव में उन्हें सपा प्रत्याशी अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
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वर्ष 2009 में हुए चुनाव में रत्ना सिंह जनता का विश्वास जीतने में एक बार फिर कामयाब रहीं। सातवीं बार चुनाव मैदान में कूदने वाली रत्ना सिंह के टिकट को लेकर कांग्रेस में कभी भी असमंजस की स्थिति नहीं उत्पन्न हुई थी।
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कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची में पूर्व सांसद रत्ना सिंह का नाम होने के साथ ही लंबे समय से चल रहीं तमाम अटकलों पर विराम लग गया है। सातवीं बार चुनाव मैदान में कूदने वाली रत्ना सिंह इसके पूर्व तीन बार सांसद रह चुकी हैं। पूर्व विदेश मंत्री राजा दिनेश सिंह की विरासत को संभालने के लिए 1996 में पहला चुनाव लड़ने वाली रत्ना सिंह को भारी मतों से जीत मिली थी।
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दो साल बाद 1998 में हुए मध्यावधि चुनाव में रामविलास वेदांती से हार का सामना करना पड़ा। 1999 में हुए चुनाव में वह फिर सांसद बनीं। 2004 के चुनाव में उन्हें सपा प्रत्याशी अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
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वर्ष 2009 में हुए चुनाव में रत्ना सिंह जनता का विश्वास जीतने में एक बार फिर कामयाब रहीं। सातवीं बार चुनाव मैदान में कूदने वाली रत्ना सिंह के टिकट को लेकर कांग्रेस में कभी भी असमंजस की स्थिति नहीं उत्पन्न हुई थी।