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Pratapgarh: सफर के दौरान मिली एक प्लेट खिचड़ी और आम की चटनी
Wed, 06 May 2020 11:55 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 06 May 2020 11:55 PM IST
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pratapgarh
- फोटो : pratapgarh
गुजरात के साबरमती से 22 घंटे में स्पेशल ट्रेन से प्रतापगढ़ पहुंचे प्रवासी मजदूरों को रेलवे की तरफ से रास्ते में एक बार मुफ्त खाना और पानी दिया गया। श्रमिकों ने बताया कि कटनी में ट्रेन रुकने के बाद किसी को बाहर नहीं निकलने दिया गया। यहां ट्रेन में सवार लोगों को खाने के लिए खिचड़ी और आम की चटनी दी गई।
ट्रेन मंगलवार शाम 6.55 बजे साबरमती स्टेशन से छूटी। अहमदाबाद, सूरत के साथ गुजरात के अन्य इलाकों में रहने वाले यूपी के 50 जिलों के 1172 लोगों को लेकर ट्रेन प्रतापगढ़ के लिए रवाना हुई। ट्रेन में सवार मिर्जापुर जनपद के लालगंज हलिया मतवार निवासी रविशंकर, बुधिराम, दाऊ ने बताया कि वे दिहाड़ी मजदूर हैं। सूरत में रहते थे।
लॉकडाउन के चलते फंस गए थे। उनकी जेब में किराया तक नहीं था। मकान मालिक ने किराया देकर सभी को घर जाने की अनुमति दे दी। रविशंकर ने बताया कि उसके साथ चार साल का बेटा उजाला, छह साल का शनि और सात साल का शिवम के साथ पत्नी थी। मंगलवार शाम छह बजे उन्हें स्टेशन पर बुलाया गया।
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थर्मल स्क्रीनिंग के बाद बारी-बारी सभी को ट्रेन में बैठाया गया। ट्रेन में बैठते समय एक-एक बोतल पानी दिया गया था। सुबह ट्रेन कटनी पहुंची। यहां दो मिनट के लिए रोका गया। गेट को बाहर से लॉक कर दिया गया था। एक-एक बोतल पानी के साथ खिचड़ी और आम की चटनी खाने के लिए दी गई। ट्रेन के प्रतापगढ़ पहुंचने के बाद ढंग का खाना नसीब होने पर मजदूरों के चेहरे खिल गए।
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ट्रेन मंगलवार शाम 6.55 बजे साबरमती स्टेशन से छूटी। अहमदाबाद, सूरत के साथ गुजरात के अन्य इलाकों में रहने वाले यूपी के 50 जिलों के 1172 लोगों को लेकर ट्रेन प्रतापगढ़ के लिए रवाना हुई। ट्रेन में सवार मिर्जापुर जनपद के लालगंज हलिया मतवार निवासी रविशंकर, बुधिराम, दाऊ ने बताया कि वे दिहाड़ी मजदूर हैं। सूरत में रहते थे।
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लॉकडाउन के चलते फंस गए थे। उनकी जेब में किराया तक नहीं था। मकान मालिक ने किराया देकर सभी को घर जाने की अनुमति दे दी। रविशंकर ने बताया कि उसके साथ चार साल का बेटा उजाला, छह साल का शनि और सात साल का शिवम के साथ पत्नी थी। मंगलवार शाम छह बजे उन्हें स्टेशन पर बुलाया गया।
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थर्मल स्क्रीनिंग के बाद बारी-बारी सभी को ट्रेन में बैठाया गया। ट्रेन में बैठते समय एक-एक बोतल पानी दिया गया था। सुबह ट्रेन कटनी पहुंची। यहां दो मिनट के लिए रोका गया। गेट को बाहर से लॉक कर दिया गया था। एक-एक बोतल पानी के साथ खिचड़ी और आम की चटनी खाने के लिए दी गई। ट्रेन के प्रतापगढ़ पहुंचने के बाद ढंग का खाना नसीब होने पर मजदूरों के चेहरे खिल गए।