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पीसीएफ गोदाम प्रभारी प्राइवेट दुकानों में 1055 मीट्रिकटन डीएपी बेचकर फरार
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fertilizer
पीसीएफ का भंडार नायक साधन सहकारी समितियों से किसानों को वितरित करने के लिए आई 1055 मीट्रिक टन डीएपी को खुले बाजार में बेचकर फरार हो गया। अफसरों की जांच के बाद मामला डीएम के संज्ञान में आने पर पीसीएफ जिला प्रबंधक ने अपने करीबी भंडार नायक के खिलाफ नगर कोतवाली में धोखाधड़ी और अमानत में खयानत सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। इधर, भंडार नायक 13 नवंबर से मोबाइल बंद कर फरार है।
जिला प्रबंधक पीसीएफ ने अपने चहेते संतोष कुमार को बड़नपुर और खजोहरी के साथ ही प्रतापगढ़ बफर गोदाम का इंचार्ज बना रखा था। जिले की साधन सहकारी समितियों को डीएपी का आवंटन होेने पर भंडार नायक ही भेजने का कार्य करता था। जिले में जब डीएपी की किल्लत हुई, तो अफसरों ने खोजबीन करनी प्रारंभ कर दी। आनलाइन जांच में खुलासा हुआ कि 16,500 मीट्रिकटन डीएपी उपलब्ध है।
पीसीएफ के बफर गोदामों को खंगाला गया, तो पता चला कि एक दाना डीएपी नहीं है। भंडार नायक से जब पूछताछ होने लगी, तो उसने बताया कि खाद समितियों को भेज दी गई है। मगर जब समितियों के सचिवों से बात की गई, तो जानकारी हुई कि खाद नहीं पहुंची है। इसके बाद भंडार नायक मोबाइल बंदकर फरार हो गया।
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मामले की जानकारी होने पर डीएम डॉ. नितिन बंसल ने जिला प्रबंधक धीरेंद्र तिवारी से भंडार नायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए कहा। पहले तो जिला प्रबंधक आनाकानी करते रहे, मगर बाद में उन्होंने भंडार नायक संतोष कुमार के खिलाफ 1055 मीट्रिक टन डीएपी के गबन, धोखाधड़ी और अमानत में खयानत की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके पहले गेहूं और धान खरीद में फर्जीवाड़ा करने में संतोष कुमार का नाम आया था, मगर अफसरों का चहेता होने के कारण मामले को दबा दिया गया था।
नौ साल से तीन गोदामों का बना हुआ था प्रभारी
भंडार नायक संतोष कुमार नौ साल से प्रतापगढ़ शहर, बड़नपुर और खजोहरी के बफर गोदाम का इंचार्ज था। जिलेभर की समितियों पर इन गोदामों से ही खाद की सप्लाई की जाती है। स्थानीय राजनीति में पैठ जमाने और अफसरों को खुश रखने के कारण उसके हर खेल को गलती मानकर अधिकारी मामले को दबा देते थे।
अंतिम समय तक बचाव की मुद्रा में थे अधिकारी
किसानों के हिस्से की खाद को खुले बाजार में बेचकर मोटी रकम की कमाई करने वाले भंडार नायक के खिलाफ अधिकारी मुकदमा दर्ज कराने को तैयार नहीं थे, मगर जिले में डीएपी के संकट को देखते हुए अधिकारियों के पास जवाब देने का कोई विकल्प नहीं था। इधर, डीएम की सख्ती के चलते अधिकारियों को अपने मातहतों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराना पड़ा।
जांच में खुलासा हुआ है कि पीसीएफ के भंडार नायक ने 1055 मीट्रिक टन डीएपी गायब कर दी है। बफर गोदाम से डीएपी का उठान किया गया, लेकिन समितियों पर खाद नहीं पहुंची। इसका मतलब साफ है कि मुनाफा कमाने के लिए खाद प्राइवेट दुकानों पर बेची गई। पीसीएफ जिला प्रबंधक ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है। अरविंद प्रकाश, सहायक निबंधक, सहकारिता
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जिला प्रबंधक पीसीएफ ने अपने चहेते संतोष कुमार को बड़नपुर और खजोहरी के साथ ही प्रतापगढ़ बफर गोदाम का इंचार्ज बना रखा था। जिले की साधन सहकारी समितियों को डीएपी का आवंटन होेने पर भंडार नायक ही भेजने का कार्य करता था। जिले में जब डीएपी की किल्लत हुई, तो अफसरों ने खोजबीन करनी प्रारंभ कर दी। आनलाइन जांच में खुलासा हुआ कि 16,500 मीट्रिकटन डीएपी उपलब्ध है।
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पीसीएफ के बफर गोदामों को खंगाला गया, तो पता चला कि एक दाना डीएपी नहीं है। भंडार नायक से जब पूछताछ होने लगी, तो उसने बताया कि खाद समितियों को भेज दी गई है। मगर जब समितियों के सचिवों से बात की गई, तो जानकारी हुई कि खाद नहीं पहुंची है। इसके बाद भंडार नायक मोबाइल बंदकर फरार हो गया।
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मामले की जानकारी होने पर डीएम डॉ. नितिन बंसल ने जिला प्रबंधक धीरेंद्र तिवारी से भंडार नायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए कहा। पहले तो जिला प्रबंधक आनाकानी करते रहे, मगर बाद में उन्होंने भंडार नायक संतोष कुमार के खिलाफ 1055 मीट्रिक टन डीएपी के गबन, धोखाधड़ी और अमानत में खयानत की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके पहले गेहूं और धान खरीद में फर्जीवाड़ा करने में संतोष कुमार का नाम आया था, मगर अफसरों का चहेता होने के कारण मामले को दबा दिया गया था।
नौ साल से तीन गोदामों का बना हुआ था प्रभारी
भंडार नायक संतोष कुमार नौ साल से प्रतापगढ़ शहर, बड़नपुर और खजोहरी के बफर गोदाम का इंचार्ज था। जिलेभर की समितियों पर इन गोदामों से ही खाद की सप्लाई की जाती है। स्थानीय राजनीति में पैठ जमाने और अफसरों को खुश रखने के कारण उसके हर खेल को गलती मानकर अधिकारी मामले को दबा देते थे।
अंतिम समय तक बचाव की मुद्रा में थे अधिकारी
किसानों के हिस्से की खाद को खुले बाजार में बेचकर मोटी रकम की कमाई करने वाले भंडार नायक के खिलाफ अधिकारी मुकदमा दर्ज कराने को तैयार नहीं थे, मगर जिले में डीएपी के संकट को देखते हुए अधिकारियों के पास जवाब देने का कोई विकल्प नहीं था। इधर, डीएम की सख्ती के चलते अधिकारियों को अपने मातहतों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराना पड़ा।
जांच में खुलासा हुआ है कि पीसीएफ के भंडार नायक ने 1055 मीट्रिक टन डीएपी गायब कर दी है। बफर गोदाम से डीएपी का उठान किया गया, लेकिन समितियों पर खाद नहीं पहुंची। इसका मतलब साफ है कि मुनाफा कमाने के लिए खाद प्राइवेट दुकानों पर बेची गई। पीसीएफ जिला प्रबंधक ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है। अरविंद प्रकाश, सहायक निबंधक, सहकारिता