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अस्पताल में बिना चादर के बेड पर लिटाए जा रहे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Sat, 24 Sep 2016 11:42 PM IST
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जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में शासन के आदेश की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां मरीजों को बिना चादर के ही बेड पर लिटा दिया जा रहा है। इसे लेकर आए दिन तीमारदार हंगामा भी करते हैं। शिकायत के बाद भी उनकी कोई सुनवाई नहीं होती।सरकारी अस्पतालों को साफ-सुथरा बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों को हर दिन नया और धुला चादर मुहैया कराने का निर्देश दिया है। आदेश तो हर दिन नए रंग के चादर बिछाने के हैं। हालांकि जिले में इसका पालन नहीं हो रहा है। हर दिन चादर बदलने की बात तो दूर यहां बेड पर मरीज को बगैर चादर बिछाए ही लिटा दिया जा रहा है। जिला अस्पताल में ही कई बेडों पर सप्ताह भर से चादर नहीं बदली गई है। कुछ बेड पर चादर ही नहीं बिछाई गई हैं। मरीजों का आरोप है कि मांगने के बाद भी चादर नहीं बदली जाती। जिला महिला अस्पताल का भी यही हाल है। यहां सर्जिकल वार्ड में तीसरे दिन चादर बदला जाता है तो जनरल वार्ड में कुछ बेड पर ही चादर दिखाई पड़ते हैं।
पृथ्वीगंज निवासी सरोजा को शनिवार को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। परिजन उसे लेकर जिला महिला अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष पहुंच गए। यहां इमरजेंसी कक्ष में चादर नहीं था। गंदगी के चलते मक्खियां भिनभिना रही थीं। इसके चलते वह प्राइवेट अस्पताल चली गई। सैफाबाद निवासी अनुराग क्रिकेट खेलने के दौरान चोटिल हो गया था। परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे और भर्ती करवा दिया। इलाज शुरू हो गया, मगर चादर नहीं मिला। इस पर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया।
इसके बाद चादर बिछाई गई। लालगंज के सांगीपुर निवासी मुन्नू तिवारी सड़क हादसे में जख्मी हो गया। परिजनों ने उसे इमरजेंसी कक्ष में भर्ती कराया, मगर नर्स उसे चादर नहीं दी। मुन्नू के परिजनों की मानी जाए तो कई बार इसकी शिकायत सीएमएस से की गई मगर कुछ नहीं हुआ।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरडी द्विवेदी कहते हैं कि प्रतिदिन अलग-अलग कलर का चादर देने के लिए अभी कोई पत्र नहीं मिला है। मान रहा हूं कि किसी किसी बेड पर चादर नहीं पड़ा होगा। चादर डाल दिया जाता है तो मरीज के तीमारदार उस पर बैठ जाते हैं। मरीज के आने के बाद उसे भर्ती करके तत्काल चादर दिया जाता है। उधर जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुलभा पाठक ने बताया कि मरीजो को चादर दी जा रही है। कु छ मरीज के तीमारदार हर चार घंटे पर नए चादर की मांग करते हैं। न मिलने पर फर्जी तरीके से हो-हल्ला करते हैं। जबकि अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को चादर दिया जाता है।
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पृथ्वीगंज निवासी सरोजा को शनिवार को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। परिजन उसे लेकर जिला महिला अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष पहुंच गए। यहां इमरजेंसी कक्ष में चादर नहीं था। गंदगी के चलते मक्खियां भिनभिना रही थीं। इसके चलते वह प्राइवेट अस्पताल चली गई। सैफाबाद निवासी अनुराग क्रिकेट खेलने के दौरान चोटिल हो गया था। परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे और भर्ती करवा दिया। इलाज शुरू हो गया, मगर चादर नहीं मिला। इस पर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया।
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इसके बाद चादर बिछाई गई। लालगंज के सांगीपुर निवासी मुन्नू तिवारी सड़क हादसे में जख्मी हो गया। परिजनों ने उसे इमरजेंसी कक्ष में भर्ती कराया, मगर नर्स उसे चादर नहीं दी। मुन्नू के परिजनों की मानी जाए तो कई बार इसकी शिकायत सीएमएस से की गई मगर कुछ नहीं हुआ।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरडी द्विवेदी कहते हैं कि प्रतिदिन अलग-अलग कलर का चादर देने के लिए अभी कोई पत्र नहीं मिला है। मान रहा हूं कि किसी किसी बेड पर चादर नहीं पड़ा होगा। चादर डाल दिया जाता है तो मरीज के तीमारदार उस पर बैठ जाते हैं। मरीज के आने के बाद उसे भर्ती करके तत्काल चादर दिया जाता है। उधर जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुलभा पाठक ने बताया कि मरीजो को चादर दी जा रही है। कु छ मरीज के तीमारदार हर चार घंटे पर नए चादर की मांग करते हैं। न मिलने पर फर्जी तरीके से हो-हल्ला करते हैं। जबकि अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को चादर दिया जाता है।