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Pratapgarh News: जिले के गौरव थे पं. मुनीश्वरदत्त उपाध्याय
Wed, 02 Aug 2023 09:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
Updated Wed, 02 Aug 2023 09:40 PM IST
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मुनीश्वरदत्त उपाध्याय।
जिले के पहले सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पर विशेष-
आज शिक्षण संस्थाओं में मनाई जाएगी जयंती
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। जिले से राजनीतिक क्षितिज पर तमाम सितारे निकले, लेकिन सबसे अधिक प्रकाशमान नक्षत्र के रूप में प. मुनीश्वरदत्त उपाध्याय रहे। जिले के पहले सांसद, पहले जिला पंचायत अध्यक्ष रहे पंडित मुनीश्वरदत्त ने 22 शिक्षण संस्थाओं की स्थापना करके शिक्षा की अलख जगाई। आज तीन अगस्त को उनकी जयंती मनाई जाएगी
जिले के महामना कहे जाने वाले पं. मुनीश्वर दत्त उपाध्याय ने शिक्षण संस्थाओं की स्थापना उस समय की, जब जिले में स्कूल-कॉलेज नहीं थे। स्वतंत्रता आंदोलन के समय महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन को मुनीश्वर दत्त ने गांव-गांव तक पहुंचाकर बापू के सपनों को साकार किया। आजादी के बाद दिल्ली में उन्होंने पं. जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, डाॅ. राजेंद्र प्रसाद के बीच सफलता पूर्व कार्य करते हुए अपनी एक अलग पहचान बनाई। भारत के संविधान में पं. मुनीश्वरदत्त उपाध्याय का हस्ताक्षर है।
वर्ष 1966 में स्थानीय निकायों से उन्होंने राज्य विधान परिषद का चुनाव लड़ा और सफलता हासिल की। यूपी में चंद्रभानु गुप्त के मंत्रिमंडल में उनको राजस्व मंत्री बनाया गया। वर्ष 1931 को जिले के कहला में किसानों पर गोली कांड के बाद उपाध्याय ने राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन व लाल बहादुर शास्त्री के साथ जाकर किसानों को ढांढस बंधाया। बेल्हा के लोग आज भी उन्हें नहीं भूले हैं।
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उनकी संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए वर्ष 1955 में उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। वह वर्ष 1952 व 1957 में प्रतापगढ़ से दो बार सांसद चुने गए। उनकी प्रतिभा के सभी कायल थे। यही कारण रहा कि उन्हें संविधान निर्माता सभा का सदस्य बनाया गया था। प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी आज तीन अगस्त को उनके द्वारा स्थापित शिक्षण-संस्थाओं में पं.मुनीश्वरदत्त उपाध्याय की जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी।
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आज शिक्षण संस्थाओं में मनाई जाएगी जयंती
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। जिले से राजनीतिक क्षितिज पर तमाम सितारे निकले, लेकिन सबसे अधिक प्रकाशमान नक्षत्र के रूप में प. मुनीश्वरदत्त उपाध्याय रहे। जिले के पहले सांसद, पहले जिला पंचायत अध्यक्ष रहे पंडित मुनीश्वरदत्त ने 22 शिक्षण संस्थाओं की स्थापना करके शिक्षा की अलख जगाई। आज तीन अगस्त को उनकी जयंती मनाई जाएगी
जिले के महामना कहे जाने वाले पं. मुनीश्वर दत्त उपाध्याय ने शिक्षण संस्थाओं की स्थापना उस समय की, जब जिले में स्कूल-कॉलेज नहीं थे। स्वतंत्रता आंदोलन के समय महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन को मुनीश्वर दत्त ने गांव-गांव तक पहुंचाकर बापू के सपनों को साकार किया। आजादी के बाद दिल्ली में उन्होंने पं. जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, डाॅ. राजेंद्र प्रसाद के बीच सफलता पूर्व कार्य करते हुए अपनी एक अलग पहचान बनाई। भारत के संविधान में पं. मुनीश्वरदत्त उपाध्याय का हस्ताक्षर है।
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वर्ष 1966 में स्थानीय निकायों से उन्होंने राज्य विधान परिषद का चुनाव लड़ा और सफलता हासिल की। यूपी में चंद्रभानु गुप्त के मंत्रिमंडल में उनको राजस्व मंत्री बनाया गया। वर्ष 1931 को जिले के कहला में किसानों पर गोली कांड के बाद उपाध्याय ने राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन व लाल बहादुर शास्त्री के साथ जाकर किसानों को ढांढस बंधाया। बेल्हा के लोग आज भी उन्हें नहीं भूले हैं।
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उनकी संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए वर्ष 1955 में उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। वह वर्ष 1952 व 1957 में प्रतापगढ़ से दो बार सांसद चुने गए। उनकी प्रतिभा के सभी कायल थे। यही कारण रहा कि उन्हें संविधान निर्माता सभा का सदस्य बनाया गया था। प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी आज तीन अगस्त को उनके द्वारा स्थापित शिक्षण-संस्थाओं में पं.मुनीश्वरदत्त उपाध्याय की जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी।