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नागपंचमी पर घर- घर पूजे गए नागदेव, दूध, लावा अर्पित कर मांगी मन्नतें
Sat, 14 Aug 2021 01:10 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 14 Aug 2021 01:10 AM IST
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शुक्रवार को नागपचंमी के पर्व पर घर-घर नागदेवता की पूजा हुई। महिलाओं ने सुबह पारंपरिक पूजन स्थल, मंदिरों में पहुंचकर दूध-लावा सहित पूजन सामाग्री अर्पित कर नागदेवता की विधि-विधान से पूजा की। मंदिरों व नदियों के तट पर पुरोहितों ने कालसर्प योग की शांति कराई। वहीं गांवों में बगीचों में जगह-जगह झूले का आयोजन हुआ। कजरी व पारंपरिक गीतों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।
नागपंचमी के पर्व पर नागदेवता की पूजा होती है। पौराणिक मान्यता है कि नागपंचमी नागदेवता के पूजन का विशेष दिन है। पूजन-अर्चन करने से वह परिवार की रक्षा करते हैं। कभी कोई बला नहीं आती। शुक्रवार को नागपंचमी के दिन महिलाएं नाग देवता की पूजा के लिए पारंपरिक पूजन स्थलों के लिए चल पड़ीं।
शहर के स्टेशन रोड, मां बेल्हादेवीधाम स्थित सई नदी के तट पर, सीताराम धाम, दहिलामऊ स्थित शिवमंदिर सहित शहर के सभी पारंपरिक पूजन स्थलों पर पहुंचकर महिलाओं ने नागदेवता की विधि-विधान से पूजा की। इस दौरान नाग देवता से परिवार की सलामती की दुआएं मांगीं।
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अंचल के रानीगंज क्षेत्र में रामापुर स्थित गुडिय़ा का तालाब, सहिजवार, रस्तीपुर, गौरा, थरिया, सुवंसा, जामतली में भी महिलाओं ने पारंपरिक स्थलों पर नागदेवता की पूजा कर मन्नतें मांगीं। पट्टी, लालगंज, कुंडा व सदर क्षेत्र में भी जगह-जगह महिलाओं ने पारंपरिक स्थानों पर दूध, लावा अर्पित कर नागदेवता की पूजा की। नागपंचमी पर शहर से लेकर गांव तक भक्तिमय वातावरण बना रहा। आचार्य पंडित आलोक मिश्र ने बताया कि नागपंचमी पर नागदेवता की विशेष पूजा की जाती है। वह घर- परिवार की रक्षा करते है।
शिवालयों में हर- हर, बम-बम की गूंज
नागपंचमी के पर्व पर शुक्रवार को पौराणिक शिवालयों में भक्तों का भीड़ रही। धतूर, मदार, बेलपत्र आदि अर्पित कर भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर मत्था टेका। परिवार की सुख-शांति की मन्नतें मांगीं। दिनभर दर्शन-पूजन का दौर चला। बाबा बेलखरनाथ धाम में भोर में महाआरती के बाद दर्शन-पूजन का क्रम शुरू हुआ।
सोशल डिस्टेंसिंग के बीच दर्शन-पूजन हुआ। महिलाओं ने मंदिर परिसर में नागदेवता को दूध-लावा अर्पित किया। हौदेश्वरनाथ में भी दर्शन-पूजन को लेकर भक्तों की भीड़ रही। यही हाल लालगंज क्षेत्र में स्थित घुइसरनाथधाम का भी रहा। भक्तों ने सोशलडिस्टेंसिंग के बीच दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया।
भाइयों ने निभाई गुड़िया पीटने की परंपरा, बहनों की रक्षा का लिया संकल्प
नागपंचमी पर सदियों से चली आ रही गुडिय़ा पीटने की परंपरा इस बार भी भाइयों ने निभाई। रानीगंज, लालगंज, पट्टी, कुंडा व सदर क्षेत्र में तालाबों में भाइयों ने कपड़े से निर्मित गुड़िया फेंकी। भाइयों ने डंडे से उस पर प्रहार करने के साथ परंपरा निभाई और बहनों की रक्षा का संकल्प लिया।
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नागपंचमी के पर्व पर नागदेवता की पूजा होती है। पौराणिक मान्यता है कि नागपंचमी नागदेवता के पूजन का विशेष दिन है। पूजन-अर्चन करने से वह परिवार की रक्षा करते हैं। कभी कोई बला नहीं आती। शुक्रवार को नागपंचमी के दिन महिलाएं नाग देवता की पूजा के लिए पारंपरिक पूजन स्थलों के लिए चल पड़ीं।
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शहर के स्टेशन रोड, मां बेल्हादेवीधाम स्थित सई नदी के तट पर, सीताराम धाम, दहिलामऊ स्थित शिवमंदिर सहित शहर के सभी पारंपरिक पूजन स्थलों पर पहुंचकर महिलाओं ने नागदेवता की विधि-विधान से पूजा की। इस दौरान नाग देवता से परिवार की सलामती की दुआएं मांगीं।
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अंचल के रानीगंज क्षेत्र में रामापुर स्थित गुडिय़ा का तालाब, सहिजवार, रस्तीपुर, गौरा, थरिया, सुवंसा, जामतली में भी महिलाओं ने पारंपरिक स्थलों पर नागदेवता की पूजा कर मन्नतें मांगीं। पट्टी, लालगंज, कुंडा व सदर क्षेत्र में भी जगह-जगह महिलाओं ने पारंपरिक स्थानों पर दूध, लावा अर्पित कर नागदेवता की पूजा की। नागपंचमी पर शहर से लेकर गांव तक भक्तिमय वातावरण बना रहा। आचार्य पंडित आलोक मिश्र ने बताया कि नागपंचमी पर नागदेवता की विशेष पूजा की जाती है। वह घर- परिवार की रक्षा करते है।
शिवालयों में हर- हर, बम-बम की गूंज
नागपंचमी के पर्व पर शुक्रवार को पौराणिक शिवालयों में भक्तों का भीड़ रही। धतूर, मदार, बेलपत्र आदि अर्पित कर भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर मत्था टेका। परिवार की सुख-शांति की मन्नतें मांगीं। दिनभर दर्शन-पूजन का दौर चला। बाबा बेलखरनाथ धाम में भोर में महाआरती के बाद दर्शन-पूजन का क्रम शुरू हुआ।
सोशल डिस्टेंसिंग के बीच दर्शन-पूजन हुआ। महिलाओं ने मंदिर परिसर में नागदेवता को दूध-लावा अर्पित किया। हौदेश्वरनाथ में भी दर्शन-पूजन को लेकर भक्तों की भीड़ रही। यही हाल लालगंज क्षेत्र में स्थित घुइसरनाथधाम का भी रहा। भक्तों ने सोशलडिस्टेंसिंग के बीच दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया।
भाइयों ने निभाई गुड़िया पीटने की परंपरा, बहनों की रक्षा का लिया संकल्प
नागपंचमी पर सदियों से चली आ रही गुडिय़ा पीटने की परंपरा इस बार भी भाइयों ने निभाई। रानीगंज, लालगंज, पट्टी, कुंडा व सदर क्षेत्र में तालाबों में भाइयों ने कपड़े से निर्मित गुड़िया फेंकी। भाइयों ने डंडे से उस पर प्रहार करने के साथ परंपरा निभाई और बहनों की रक्षा का संकल्प लिया।

नाग पंचमी पर बेल्हा देवी धाम शिव मंदिर में जलाभिषेक करते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : PRATAPGARH