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अफसरों ने नलकूपों पर लगाया ताला

Mon, 14 Nov 2016 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Mon, 14 Nov 2016 01:01 AM IST
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लाखों किसानों के खेतों की सिंचाई करने वाले राजकीय नलकूप एक-एक कर तोबा बोलते जा रहे हैं। जिले में स्थापित 244 नलकूपों में सिर्फ 101 से पानी निकल रहा है। 143 नलकूपों के ठप होने से जहां हजारों हेक्टेयर भूमि असिंचित पड़ी हुई है, वहीं इन नलकूपों की मरम्मत में अधिकारी प्रतिवर्ष लाखों रुपये का खेल कर रहे हैं।
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जिले के राजकीय नलकूपों की दशा दिन प्रतिदिन जर्जर होती जा रही है। एक समय था जब जिले के लाखों किसानों के फसलों की सिंचाई के लिए जनपद में 244 नलकूप खेतों तक पानी पहुंचा रहे थे। इससे राजस्व की भारी आमदनी होती थी। मगर वर्तमान में अधिकारियों की लापरवाही के चलते यह विभाग अंतिम सांसे गिन रहा है। विभाग के दावे पर गौर करें तो 244 नलकूपों में 143 इस समय बंद पड़े हैं। 17 नलकूप पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और 16 नलकूप सुधार के  इंतजार में हैं। विभाग की मानें तो 109 नलकूप पूरी ध्वस्त हो चुके हैं। 101 नलकूप ऐसे हैं जो वर्तमान में पानी दे रहे हैं। विभागीय कर्मचारियों की बातों पर यकीन किया जाए तो नलकूपों की मरम्मत के  लिए प्रतिवर्ष लाखों रुपये का बजट आता है।
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विभाग में लंबे समय से कोई स्थाई अधिकारी नहीं होने से सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। बतातें है कि मरम्मत के  नाम पर आने वाली धनराशि सिर्फ कागजों में खर्च हो रही है। यही वजह है कि खराब होने वाले नलकूपों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। डिवीजन में लंबे समय से स्थाई अधिकारी नहीं है। इलाहाबाद के एसडीओ को डिवीजन का प्रभार सौंपा गया है। कर्मचारियों ने बताया कि डिवीजन टूटने से नलकूप की खराब होने वाली मोटरों को इलाहाबाद से ठीक कराया जाता है। इसलिए खराब होने वाली मोटरों को ठीक कराने में समय लगता है।
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18 वर्ष पूर्व टूटा डिवीजन
जिन क्षेत्रों में नहर नहीं है। उन क्षेत्रों में सिंचाई का प्रमुख साधन राजकीय नलकूप ही होते हैं। जिले के 244 नलकूपों के लिए एक डिवीजन बनाया गया था। सोलह वर्ष पूर्व इस डिवीजन को तोड़कर इलाहाबाद मुख्यालय बना दिया गया। जिससे राजकीय नलकूपों का चलन ही बंद होने के कगार पर पहुंच गया।

सिकुड़ता जा रहा है कर्मचारियों का समूह
बारह वर्ष पूर्व विभाग में जहां साढ़े तीन सौ से अधिक कर्मचारियों की तैनाती की गई थी वहीं वर्तमान में एसडीओ, तीन अवर अभियंता, 52 ट्यूबेल आपरेटर बचे हुए हैं। वह भी अपने बचे हुए दिनों को गिन रहे हैं।

जंग खा रहीं मशीनें
राजकीय नलकूप विभाग में मोटर को बनाने के लिए खराद, चेनकुप्पी और मोटर वायरिंग के लिए बड़ी-बड़ी मशीनें लगाई गई थी। जो वर्तमान में पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। कर्मचारियों की मानें तो डिवीजन समाप्त होते ही यह मशीनें निरर्थक साबित हो रही है। फिलहाल अधिकांश मशीनों को जंग लग गई है।


सालों से नहीं खुला स्टोर
नलकूपों की मरम्मत और नालियां निर्माण के लिए सीमेंट सहित अन्य सामानों को रखने के लिए विभाग में विशालकाय स्टोर बनाया गया है। कर्मचारियों की मानें तो बारह साल से स्टोर का ताला नहीं खुला है। सवाल यह उठता है कि स्टोर में सामान आ ही नहीं रहा है तो नालियों की मरम्मत कैसे हो रही है। कर्मचारियों की मानें तो पहले सामान इसी स्टोर में रखा जाता था। उसके बाद सम्बंधित नलकूपों पर भेजा जाता था।
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