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सरकारी स्कूलों में रैली और जनसभा करने पर प्रत्याशियों के खिलाफ दर्ज होगा मुकदमा
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प्रतापगढ़। शिक्षा के मंदिर को राजनीति से दूर रखने के लिए चुनाव मैदान में कूदने वाले प्रत्याशियों को सरकारी स्कूलों में चुनावी जनसभा, रैली और बैठक करने पर रोक लगा दी गई है। अगर कोई प्रत्याशी सरकारी स्कूल में चुनावी मीटिंग करता है, तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के साथ ही स्कूल के प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई होगी।
चुनावी समर में कूदे प्रत्याशी इन दिनों सरकारी स्कूलों को निशाना बना रहे हैं। शिक्षकों को अपने पक्ष में करने और खर्च का जिम्मा उठाने की बात कहकर स्कूलों में मीटिंग कर रहे हैं। नेताओं के दबाव में प्रिंसिपल अपनी कुर्सी बचाने के लिए मूक स्वीकृति दे रहे हैं। प्राय: शाम को बाटी-चोखा के बहाने पर स्कूलों में प्रत्याशी और समर्थकों का जमावड़ा हो रहा है। चुनाव आयोग ने पहले ही कह रखा है कि सरकारी स्कूलों में रैली, जनसभा और बैठकें करने पर प्रत्याशियों के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्ल्घंन का मुकदमा दर्ज होने के साथ ही स्कूल के प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई होगी
। जिले के सरकारी स्कूलों में इन दिनों चुनावी मीटिंग होने की तमाम शिकायतें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को मिल रही हैं। सरकारी स्कूलों में शैक्षिक कार्यक्रमों के अलावा किसी भी प्रकार का आयोजन किया जाना प्रतिबंधित है। कोरोना संक्रमण काल के चलते जिले के कक्षा एक से आठ तक स्कूल बंद होने से प्रत्याशी इसका लाभ उठाने से नहीं चूक रहे हैं।
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नेताओं के प्रचार में जुटे शिक्षक
स्थानीय नेताओं में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापक प्रत्याशियों के प्रचार में उतर आएं हैं। कुछ अध्यापक ऐसे हैं, जो प्रत्याशियों के प्रचार-प्रसार का जिम्मा संभाल लिए हैं। विभागीय अधिकारी भी इस पर ध्यान देने से कतरा रहे हैं।
किसी भी सरकारी स्कूल में शैक्षिक कार्यक्रम के अलावा अगर कोई प्रत्याशी बैठक या जनसभा करता है, तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करके स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल ऐसे स्कूलों को चिंहित करने के लिए उड़नदस्ते का गठन किया गया है।
सुनील शुक्ला, एडीएम
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चुनावी समर में कूदे प्रत्याशी इन दिनों सरकारी स्कूलों को निशाना बना रहे हैं। शिक्षकों को अपने पक्ष में करने और खर्च का जिम्मा उठाने की बात कहकर स्कूलों में मीटिंग कर रहे हैं। नेताओं के दबाव में प्रिंसिपल अपनी कुर्सी बचाने के लिए मूक स्वीकृति दे रहे हैं। प्राय: शाम को बाटी-चोखा के बहाने पर स्कूलों में प्रत्याशी और समर्थकों का जमावड़ा हो रहा है। चुनाव आयोग ने पहले ही कह रखा है कि सरकारी स्कूलों में रैली, जनसभा और बैठकें करने पर प्रत्याशियों के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्ल्घंन का मुकदमा दर्ज होने के साथ ही स्कूल के प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई होगी
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। जिले के सरकारी स्कूलों में इन दिनों चुनावी मीटिंग होने की तमाम शिकायतें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को मिल रही हैं। सरकारी स्कूलों में शैक्षिक कार्यक्रमों के अलावा किसी भी प्रकार का आयोजन किया जाना प्रतिबंधित है। कोरोना संक्रमण काल के चलते जिले के कक्षा एक से आठ तक स्कूल बंद होने से प्रत्याशी इसका लाभ उठाने से नहीं चूक रहे हैं।
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नेताओं के प्रचार में जुटे शिक्षक
स्थानीय नेताओं में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापक प्रत्याशियों के प्रचार में उतर आएं हैं। कुछ अध्यापक ऐसे हैं, जो प्रत्याशियों के प्रचार-प्रसार का जिम्मा संभाल लिए हैं। विभागीय अधिकारी भी इस पर ध्यान देने से कतरा रहे हैं।
किसी भी सरकारी स्कूल में शैक्षिक कार्यक्रम के अलावा अगर कोई प्रत्याशी बैठक या जनसभा करता है, तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करके स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल ऐसे स्कूलों को चिंहित करने के लिए उड़नदस्ते का गठन किया गया है।
सुनील शुक्ला, एडीएम