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फिर अस्पताल पहुंचे गबन के आरोपी बैंक प्रबंधक
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Tue, 18 Apr 2017 12:21 AM IST
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crime news
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जिला अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में दस महीने तक भर्ती रहे गबन के आरोपी बैंक मैनेजर सोमवार को फिर अस्पताल पहुंच गए। हालांकि चिकित्सकों ने उन्हें भर्ती करने से इनकार कर दिया। सूत्रों का कहना है कि सोमवार को फिर एक नेता ने उन्हें भर्ती करने या फिर एसआरएन रेफर करने के लिए दबाव बनाया, लेकिन डाक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। इस पर उन्हें जेल ले जाया गया।
जिला जेल में निरुद्ध लखनऊ के आशियाना के रहने वाले सुनील चतुर्वेदी प्रतापगढ़ जिले के कुंडा में पंजाब नेशनल बैंक में शाखा प्रबंधक के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने फर्जी नाम-पते पर 25 लोगों के नाम एक करोड़ 30 लाख का लोन पास करा दिया। इस बीच सुनील का ट्रांसफर किसी दूसरी शाखा में हो गया। नए बैंक मैनेजर ने ऋण लेने वाले 25 लोगों के बारे में पड़ताल कराई, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। इस पर उन्होंने कुंडा कोतवाली में सुनील के खिलाफ एक करोड़ 30 लाख रुपये के गबन का मुकदमा दर्ज करा दिया। इस मामले में पुलिस ने सुनील को जेल भेज दिया। कुछ ही दिनों तक वह जेल में रहे और फिर जेल प्रशासन के साथ स्वास्थ्य विभाग के एक फार्मासिस्ट से सेटिंग करके जिला अस्पताल पहुंच गए। यहां दस माह से प्राइवेट वार्ड में भर्ती थे। यहां कभी चिकित्सक उन्हें देखने के लिए नहीं जा रहे थे। सप्ताह में एक दिन उनकी जांच रिपोर्ट भी तैयार हो जा रही थी। बताते हैं कि फीजिशीयन डॉक्टर मनोज खत्री जब अस्पताल में आए तो उन्होंने उनका इलाज करने से मना कर दिया। बाद में सत्ता पक्ष के एक नेता के दबाव पर उन्होंने इलाज शुरू कर दिया। ‘अमर उजाला’ में यह मामला प्रमुखता से उठने के बाद आननफानन में सुनील को अस्पताल से जेल भेज दिया गया। डाक्टरों ने उन्हें फिट घोषित कर दिया। सोमवार को सुनील फिर अस्पताल पहुंचे। हालांकि डाक्टरों का कहना था कि उन्हें जांच के लिए बुलाया गया है। अस्पताल सूत्रों की मानें तो उनको फिर से भर्ती करने या एसआरएन रेफर करने के लिए फिर एक नेता का फोन आया, लेकिन डाक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। इस पर उन्हें फिर जेल भेजना पड़ा।
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जिला जेल में निरुद्ध लखनऊ के आशियाना के रहने वाले सुनील चतुर्वेदी प्रतापगढ़ जिले के कुंडा में पंजाब नेशनल बैंक में शाखा प्रबंधक के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने फर्जी नाम-पते पर 25 लोगों के नाम एक करोड़ 30 लाख का लोन पास करा दिया। इस बीच सुनील का ट्रांसफर किसी दूसरी शाखा में हो गया। नए बैंक मैनेजर ने ऋण लेने वाले 25 लोगों के बारे में पड़ताल कराई, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। इस पर उन्होंने कुंडा कोतवाली में सुनील के खिलाफ एक करोड़ 30 लाख रुपये के गबन का मुकदमा दर्ज करा दिया। इस मामले में पुलिस ने सुनील को जेल भेज दिया। कुछ ही दिनों तक वह जेल में रहे और फिर जेल प्रशासन के साथ स्वास्थ्य विभाग के एक फार्मासिस्ट से सेटिंग करके जिला अस्पताल पहुंच गए। यहां दस माह से प्राइवेट वार्ड में भर्ती थे। यहां कभी चिकित्सक उन्हें देखने के लिए नहीं जा रहे थे। सप्ताह में एक दिन उनकी जांच रिपोर्ट भी तैयार हो जा रही थी। बताते हैं कि फीजिशीयन डॉक्टर मनोज खत्री जब अस्पताल में आए तो उन्होंने उनका इलाज करने से मना कर दिया। बाद में सत्ता पक्ष के एक नेता के दबाव पर उन्होंने इलाज शुरू कर दिया। ‘अमर उजाला’ में यह मामला प्रमुखता से उठने के बाद आननफानन में सुनील को अस्पताल से जेल भेज दिया गया। डाक्टरों ने उन्हें फिट घोषित कर दिया। सोमवार को सुनील फिर अस्पताल पहुंचे। हालांकि डाक्टरों का कहना था कि उन्हें जांच के लिए बुलाया गया है। अस्पताल सूत्रों की मानें तो उनको फिर से भर्ती करने या एसआरएन रेफर करने के लिए फिर एक नेता का फोन आया, लेकिन डाक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। इस पर उन्हें फिर जेल भेजना पड़ा।
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