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कुपोषित बच्चों के सर्वे में दो परियोजनाएं संदिग्ध
ब्यूरो।अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Sat, 23 May 2015 12:45 AM IST
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प्रतापगढ़। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी राज्य पोषण मिशन योजना की बाल विकास के जिम्मेदार ही वॉट लगाने पर तुले हैं। डीएम और सीडीओ के जरिए रात दिन की गई मेहनत पर बिहार व लक्ष्मणपुर परियोजना ने पानी फेर दिया। इन दोनों ही परियोजनाओं से अति कुपोषित बच्चों की शून्य रिपोर्ट को शासन ने गंभीरता से लिया है। दोनों परियोजनाओं में अति कुपोषित बच्चों की तलाश के लिए फिर से सर्वे कराए जाने का निर्देश अफसरों को मिला है।
बच्चों की सेहत को लेकर डीएम और सीडीओ जितने गंभीर हैं, बाल विकास का रुख उतना ही उदासीन है। डीएम अमृत त्रिपाठी व सीडीओ मनीष कुमार वर्मा ने सर्वे टीम का गठन किया। सर्वे के दौरान खुद भी गांवों की धूल फांकते रहे। इसके बावजूद दो ब्लाकों से प्राप्त रिपोर्ट संदिग्ध बनी हुई है।
बिहार और लक्ष्मणपुर ब्लाक से भेजी गई अति कुपोषित बच्चों की रिपोर्ट निल (शून्य) है। जिले से रिपोर्ट शासन को भेजी गई तो वहां बैठे अधिकारियों का माथा ठनक गया। सभी इस सोच में पड़ गए कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है कि दोनों ब्लाकों में एक भी बच्चा अति कुपोषित या कुपाषित न हो। रिपोर्ट को संदिग्ध मानते हुए उन अधिकारियों ने जिले के अफसरों को दोनों ब्लाकों में दुबारा सर्वे कराने का निर्देश दिया। यह निर्देश पत्र जिले में पहुंचा तो बालविकास में हड़कंप मच गया।
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...तो जिम्मेदारों पर गिरेगी डीएम की गाज
दोनों परियोजनाओं में दोबारा कराए गए सर्वे के दौरान यदि एक भी बच्चा अति कुपोषित मिला तो योजना को लेकर बेहद गंभीर जिलाधिकारी की गाज फेंक आंकड़े देने वालों पर गिरनी तय है। इस खौफ को लेकर बालविकास के अधिकारियों में अभी से ही हड़कंप है।
बाबागंज की रिपोर्ट भी शक के दायरे में
बाबागंज परियोजना की रिपोर्ट भी शक के दायरे में हैं। विभागीय सूत्र कहते हैं कि अति कुपोषित बच्चों की इस परियोजना से दी गई रिपोर्ट में ज्यादातर फेंक आंकड़ों का इस्तेमाल हुआ है। यदि डीएम या सीडीओ की नजर इस परियोजना से मिले आंकड़ों पर घूमी और जांच की गई तो चौंकाने वाली बात सामने आ सकती है।
दोनों परियोजनाओं से निल रिपोर्ट आई है। अधिकारी दोनों परियोजनाओं में दोबारा सर्वे कराने जा रहे हैं। अपने आप स्थितियां सामने आ जाएंगी। हमने पूरी सतर्कता बरती है। यदि परियोजना स्तर से गड़बड़ी की गई तो इसके जिम्मेदार भी वही हाेंगे।
डॉ. आरती सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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बच्चों की सेहत को लेकर डीएम और सीडीओ जितने गंभीर हैं, बाल विकास का रुख उतना ही उदासीन है। डीएम अमृत त्रिपाठी व सीडीओ मनीष कुमार वर्मा ने सर्वे टीम का गठन किया। सर्वे के दौरान खुद भी गांवों की धूल फांकते रहे। इसके बावजूद दो ब्लाकों से प्राप्त रिपोर्ट संदिग्ध बनी हुई है।
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बिहार और लक्ष्मणपुर ब्लाक से भेजी गई अति कुपोषित बच्चों की रिपोर्ट निल (शून्य) है। जिले से रिपोर्ट शासन को भेजी गई तो वहां बैठे अधिकारियों का माथा ठनक गया। सभी इस सोच में पड़ गए कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है कि दोनों ब्लाकों में एक भी बच्चा अति कुपोषित या कुपाषित न हो। रिपोर्ट को संदिग्ध मानते हुए उन अधिकारियों ने जिले के अफसरों को दोनों ब्लाकों में दुबारा सर्वे कराने का निर्देश दिया। यह निर्देश पत्र जिले में पहुंचा तो बालविकास में हड़कंप मच गया।
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...तो जिम्मेदारों पर गिरेगी डीएम की गाज
दोनों परियोजनाओं में दोबारा कराए गए सर्वे के दौरान यदि एक भी बच्चा अति कुपोषित मिला तो योजना को लेकर बेहद गंभीर जिलाधिकारी की गाज फेंक आंकड़े देने वालों पर गिरनी तय है। इस खौफ को लेकर बालविकास के अधिकारियों में अभी से ही हड़कंप है।
बाबागंज की रिपोर्ट भी शक के दायरे में
बाबागंज परियोजना की रिपोर्ट भी शक के दायरे में हैं। विभागीय सूत्र कहते हैं कि अति कुपोषित बच्चों की इस परियोजना से दी गई रिपोर्ट में ज्यादातर फेंक आंकड़ों का इस्तेमाल हुआ है। यदि डीएम या सीडीओ की नजर इस परियोजना से मिले आंकड़ों पर घूमी और जांच की गई तो चौंकाने वाली बात सामने आ सकती है।
दोनों परियोजनाओं से निल रिपोर्ट आई है। अधिकारी दोनों परियोजनाओं में दोबारा सर्वे कराने जा रहे हैं। अपने आप स्थितियां सामने आ जाएंगी। हमने पूरी सतर्कता बरती है। यदि परियोजना स्तर से गड़बड़ी की गई तो इसके जिम्मेदार भी वही हाेंगे।
डॉ. आरती सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी