प्रतापगढ़ : लाखों के स्वास्थ्य उपकरण भेज दिए पूर्व मंत्री के घर, अब कहां पता नहीं, जांच में खुली पोल
स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी पैसे से खरीदे गए महंगे स्वास्थ्य उपकरणों जैसे अस्पताल का एक बेड, गद्दा, ऑक्सीजन जांच मशीन, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, ऑक्सीजन सिलिंडर, डिजिटल वेइंग मशीन, डिजिटल बीपी मशीन को नियमों को ताक पर रखकर पूर्व मंत्री के घर भेज दिया। अब इन सामानों का कहीं पता नहीं चल रहा है।
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आम लोगों के लिए स्वास्थ्य विभाग सचेत हो या न हो लेकिन रसूखदारों के लिए नियम तोड़ने से भी गुरेज नहीं करता। इसकी बानगी प्रदेश के एक पूर्व मंत्री की मां के उपचार में देखने को मिली। मंत्री जी की मां की सेहत बिगड़ी तो स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी बजट से मशीनें-उपकरण खरीद कर उनके घर पहुंचा दीं।
मामले की पोल तब खुली जब डिप्टी सीएमओ डॉ. संदीप सक्सेना बेलखरनाथ सीएचसी का निरीक्षण करने पहुंचे। अब यह सामान कहां है, इसका कोई अता-पता नहीं है। दूसरी ओर पूर्व मंत्री के करीबी इन उपकरणों के घर आनेे की बात से इन्कार कर रहे हैं।
डिप्टी सीएमओ डॉ. संदीप सक्सेना ने निरीक्षण के दौरान सीएचसी बेलखरनाथ के स्टाक रजिस्टर के दर्ज सामग्री का मिलान कराया तो पता चला कि जो सामान पूर्व मंत्री की मां के उपचार के लिए भेजा गया था, वह लौटकर नहीं आया। डॉ. संदीप सक्सेना ने सीएमओ डॉ. जीएम शुक्ल को एक रिपोर्ट तैयार कर भेजी है। इसमें बताया है कि 16 जून को सीएचसी का औचक निरीक्षण करने गए थे।
नियम विरुध भेजे गए थे सामान
जांच के दौरान जब स्टाॅक रजिस्टर देखा गया तो पता चला कि नियम विरुद्ध सीएचसी अधीक्षक डॉ. आरिफ ने क्षेत्र निवासी एक पूर्व मंत्री की बीमार मां के लिए अस्पताल का एक बेड, गद्दा, ऑक्सीजन जांच मशीन, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, ऑक्सीजन सिलिंडर, डिजिटल वेइंग मशीन, डिजिटल बीपी मशीन उनके घर भेजे हैं। उनकी मां के निधन को सालभर हो गए हैं, लेकिन अभी तक सामान लौटकर नहीं आया है।
इस बाबत सीएचसी अधीक्षक आरिफ ने कहा कि पूर्व मंत्री की मां के निधन के बाद मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का कार्यक्रम लगा था। इसलिए गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में अलग से एक वार्ड तैयार किया गया था। जहां पर बेड, गद्दा सहित अन्य उपकरणों को सीएमओ के निर्देेश पर रखा गया था। चिकित्सकों की ड्यूटी भी लगाई गई थी।
उन्होंने बताया कि पूर्व मंत्री की मां के तेरहवीं के दूसरे दिन ही सामान को वापस सीएचसी उठा लाया गया था। कर्मचारी स्टाॅक रजिस्टर में दर्ज करना भूल गए थे। इस मामले में पूर्व मंत्री से बात करने की कोशिश की गई तो उनके प्रतिनिधि दिनेश ने बताया कि जब मां बीमार थीं तो उस समय मैं साथ था। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई उपकरण नहीं मंगाए गए थे। गलत रिपोर्ट तैयार कर कोई यदि सीएमओ को दे रहा है तो मुझे नहीं पता है।
मैं जरूरी कार्य से लखनऊ चला आया हूं। डिप्टी सीएमओ ने अभी इस तरह की रिपोर्ट मुझे नहीं दी है। मेरे हाथ में पत्र जब आएगा तब ही मैं कुछ बोल सकता हूं। - डॉ. जीएम शुक्ल, सीएमओ