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नहीं स्पष्ट हो सका झोलाछाप डॉक्टर के इंजेक्शन लगाने से हुई बच्ची के मौत का कारण

Sun, 01 Dec 2019 12:51 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 01 Dec 2019 12:51 AM IST
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invalid clinic
फतनपुर थाने के गीतानगर में झोलाछाप डाक्टर का क्लीनिक सील करते स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी। - फोटो : PRATAPGARH
अवैध तरीके से चल रहा क्लीनिक सीज, पुलिस ने डॉक्टर को छोड़ा
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परिजनों ने इंजेक्शन लगाने से बच्ची की मौत होने का लगाया था आरोप
बीरापुर। झोलाछाप के इंजेक्शन लगाने से बच्ची की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने अवैध तरीके से चल रहे क्लीनिक को सीज कर दिया। उधर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। इस पर डाक्टरों ने विसरा प्रिजर्व कर लिया। दूसरी ओर झोलाछाप चिकित्सक को हिरासत में लेने वाली पुलिस ने बगैर किसी लिखापढ़ी के उसे छोड़ दिया।
फतनपुर थाना क्षेत्र के सिलौधी गांव निवासी रामकुमार बिंद की नौ वर्षीय पुत्री रोशनी को बुखार आ रहा था। उसके परिवार के सदस्य रोशनी को लेकर फतनपुर थाना के गीता नगर बाजार स्थित ललिता मेडिकेयर सेंटर पर इलाज कराने पहुंचे। झोलाछाप डॉ आरके बिंद ने तेज बुखार बताकर उसे दो इंजेक्शन लगा दिए। आरोप है कि इसके कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। इसे लेकर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची। झोलाछाप डॉक्टर को प्रभारी एसओ ने हिरासत में लेकर थाने भेज दिया। वहीं रोशनी के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। रातभर डॉक्टर को थाने पर रखने के बाद सुबह पुलिस ने छोड़ दिया। प्रभारी फतनपुर एसओ ने बताया कि रोशनी का पोस्टमार्टम कराया गया। रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। इसलिए विसरा प्रिर्जव कर जांच के लिए भेजा गया है। मौत का कारण स्पष्ट न होने के कारण डॉक्टर को छोड़ दिया गया। उधर, सीएमओ एके श्रीवास्तव ने डिप्टी सीएमओ सीपी शर्मा, अपर शोध अधिकारी आरपी चौधरी और आरजी चौधरी को भेजकर ललिता मेडिकेयर को सीज करवा दिया। डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए थाने में तहरीर दी गई है।
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बच्ची की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि मुकदमा दर्ज करने के लिए पुलिस को तहरीर दी गई है, वहीं फतनपुर एसओ ने तहरीर मिलने से इनकार कर दिया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कौन झूठ बोल रहा है। स्वास्थ्य विभाग या फिर पुलिस। झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की ओर से थाने पर तहरीर भेजी जाती है, लेकिन मुकदमा दर्ज हुआ या फिर नहीं इसकी जांच कभी नहीं की जाती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से तहरीर मिलने के बाद पुलिस जांच करने झोलाछाप डॉक्टर के पास पहुंच जाती है। सेटिंग कर मुकदमा दर्ज नहीं करती है। सीएमओ व उनके कर्मचारी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग की ओर से नोटिस मिलने के बाद झोलाछाप डॉक्टर सीएमओ कार्यालय पहुंच जाते हैं। यहां प्रैक्टिस न करने का शपथ पत्र देकर विधिक कार्रवाई से बच जाते हैं।
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मैं अपर शोध अधिकारी आरपी चौधरी के साथ गीता नगर गया था। ललिता मेडिकेयर सेंटर को सीज कर दिया गया है। जानकारी मिली है कि डॉक्टर आरके विंद ने होम्योपैथ की डिग्री ले रखी है, लेकिन एलोपैथ की प्रैक्टिस कर रहा था। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने के लिए फतनपुर थाने में तहरीर दी गई है।
सीपी शर्मा, डिप्टी सीएमओ।
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