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महंगाई बढ़ी, मगर नहीं बढ़ा एमडीएम का कनवर्जनकास्ट
Tue, 14 Sep 2021 02:56 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 14 Sep 2021 02:56 PM IST
सार
दाल, सब्जी, तेल, मसाला, फल और दूध पर महंगाई छाने के बाद भी परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को मिल डे मील देने के लिए पुरानी दर से ही भुगतान हो रहा है।
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mid day meal (symbolic)
विस्तार
दाल, सब्जी, तेल, मसाला, फल और दूध पर महंगाई छाने के बाद भी परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को मिल डे मील देने के लिए पुरानी दर से ही भुगतान हो रहा है। मिड डे मील में प्रति बच्चे पर आने वाले खर्च को बढ़ाया नहीं गया। इससे स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तायुक्त भोजन परोसने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिले के 2364 स्कूलों में पढ़ने वाले 2,85,896 बच्चों को मिड डे मील योजना के तहत दोपहर का भोजन दिया जा रहा है। विभागीय अधिकारी अपने निरीक्षण में एमडीएम की गुणवत्ता परखने पर भी खूब जोर देते हैं, लेकिन बच्चों के भोजन के लिए मिलने वाली धनराशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। एक अप्रैल 2020 से प्राइमरी स्कूलों में 4.97 रुपये और मिडिल स्कूलों में 7.45 रुपये प्रति बच्चे की दर से भुगतान किया जा रहा है।
जबकि महंगाई का आलम यह है कि जो अरहर की दाल पहले 90 रुपये प्रति किग्रा की दर से बिक रही थी, वह अब 110 रुपये पहुंच गई है। सरसों का तेल 110 रुपये से बढ़कर दोगुने दाम पर 210 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। सब्जियों में आलू पिछले वर्ष दस रुपये प्रति किग्रा बिक रहा था। अब वह 17 रुपये प्रति किग्रा की दर से बिक रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस महंगाई में स्कूलों के हेडमास्टर बच्चों को गुणवत्तायुक्त भोजन कैसे परोस रहे हैं।
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उपस्थिति शत-प्रतिशत, मगर भुगतान 80 प्रतिशत
स्कूलों में इन दिनों शत-प्रतिशत बच्चे आ रहे हैं, मगर एमडीएम में 80 प्रतिशत बच्चों के सापेक्ष ही भुगतान किया जाता है। दरअसल, शासन ने यह व्यवस्था बनाई है कि किसी भी स्कूल में शत-प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति के बावजूद 80 प्रतिशत के सापेक्ष ही भुगतान किया जाएगा। इससे साफ है कि महंगी सब्जी और खाद्य पदार्थ खरीदने वाले हेडमास्टर किसी भी दशा में अपने नुकसान की भरपाई नहीं कर सकते हैं।
कनवर्जनकास्ट का निर्धारण प्रतिवर्ष होता है, मगर इस वर्ष शासन ने अभी तक नहीं किया है। शासन स्तर पर बात चल रही है, जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। कनवर्जनकास्ट के निर्धारण में हमें कोई अधिकार नहीं है।
इजहार अहमद, डीसी, एमडीएम
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जिले के 2364 स्कूलों में पढ़ने वाले 2,85,896 बच्चों को मिड डे मील योजना के तहत दोपहर का भोजन दिया जा रहा है। विभागीय अधिकारी अपने निरीक्षण में एमडीएम की गुणवत्ता परखने पर भी खूब जोर देते हैं, लेकिन बच्चों के भोजन के लिए मिलने वाली धनराशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। एक अप्रैल 2020 से प्राइमरी स्कूलों में 4.97 रुपये और मिडिल स्कूलों में 7.45 रुपये प्रति बच्चे की दर से भुगतान किया जा रहा है।
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जबकि महंगाई का आलम यह है कि जो अरहर की दाल पहले 90 रुपये प्रति किग्रा की दर से बिक रही थी, वह अब 110 रुपये पहुंच गई है। सरसों का तेल 110 रुपये से बढ़कर दोगुने दाम पर 210 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। सब्जियों में आलू पिछले वर्ष दस रुपये प्रति किग्रा बिक रहा था। अब वह 17 रुपये प्रति किग्रा की दर से बिक रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस महंगाई में स्कूलों के हेडमास्टर बच्चों को गुणवत्तायुक्त भोजन कैसे परोस रहे हैं।
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उपस्थिति शत-प्रतिशत, मगर भुगतान 80 प्रतिशत
स्कूलों में इन दिनों शत-प्रतिशत बच्चे आ रहे हैं, मगर एमडीएम में 80 प्रतिशत बच्चों के सापेक्ष ही भुगतान किया जाता है। दरअसल, शासन ने यह व्यवस्था बनाई है कि किसी भी स्कूल में शत-प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति के बावजूद 80 प्रतिशत के सापेक्ष ही भुगतान किया जाएगा। इससे साफ है कि महंगी सब्जी और खाद्य पदार्थ खरीदने वाले हेडमास्टर किसी भी दशा में अपने नुकसान की भरपाई नहीं कर सकते हैं।
कनवर्जनकास्ट का निर्धारण प्रतिवर्ष होता है, मगर इस वर्ष शासन ने अभी तक नहीं किया है। शासन स्तर पर बात चल रही है, जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। कनवर्जनकास्ट के निर्धारण में हमें कोई अधिकार नहीं है।
इजहार अहमद, डीसी, एमडीएम

mid day meal (symbolic)