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Pratapgarh News: डेंगू निकले तो अस्पताल के बजाय खुद के इंतजामों पर करें भरोसा
Mon, 16 Oct 2023 10:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
Updated Mon, 16 Oct 2023 10:00 AM IST
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दीपक दुबे।
मेडिकल कॉलेज को छोड़ दिया जाए तो जिले के सरकारी अस्पतालों में डेंगू के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। जांच में डेंगू पॉजिटिव पाए जाने पर मरीजों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज या फिर प्रयागराज और लखनऊ जाना पड़ता है।
डेंगू की पुष्टि को लेकर भले ही स्वास्थ्य विभाग का अपना तर्क हो, लेकिन हकीकत में मरीजों की जान पर बन आ रही है। कई मरीज हालत गंभीर होने के चलते प्रयागराज, लखनऊ के निजी अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग कम प्लेटलेट्स को डेंगू नहीं मानता, लेकिन इससे मरीजों की मुश्किलें बढ़ रहीं हैं।
मेडिकल कॉलेज में डेंगू बुखार से निपटने के लिए दस बेड का डेंगू वार्ड तैयार किया गया है। यहां भी प्राथमिक उपचार की ही व्यवस्था है। गंभीर मरीजों को प्रयागराज या फिर लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। इसी वजह से तीमारदार प्लेटलेट्स कम मिलने पर मरीज को जिला अस्पताल के बजाय निजी अस्पताल में भर्ती करवा रहे हैं।
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क्या बोले मरीज
गौरा सीएचसी में महज एक जनरल वार्ड है। उसी में सभी मरीजों को भर्ती किया जाता है। डेंगू वार्ड तैयार नहीं किया गया है।
मोहित गुप्ता, रामापुर
............
संडवाचंद्रिका सीएचसी के समीप रहने वाले तीन लोगों को डेंगू हो गया है, मगर इन्हें भर्ती कर इलाज करने के लिए अलग से अस्पताल में वार्ड नहीं तैयार किया गया है।
दीपक दुबे, अंतू
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डेंगू जांच तो दूर भर्ती कर इलाज करने के लिए अलग से वार्ड तक तैयार नहीं किया गया है। कोई इस ओर ध्यान तक नहीं दे रहा है।
धवल दूबे, कोहड़ौर
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पहली बार मुफ्त, दूसरी बार डेंगू जांच का लगता है शुल्क
मेडिकल कॉलेज में डेंगू जांच कराने आने वाले मरीजों को पहली बार छूट दिया जा रहा है, लेकिन दूसरी बार शुल्क लगता है। इससे मरीज जांच कराने में भी आनाकानी करते हैं। जिला मलेरिया अधिकारी केपी द्विवेदी ने बताया कि डेंगू व मलेरिया बुखार की पुष्टि के लिए बुखार आने के दो दिन बाद जांच कराएं। इस दौरान सिर्फ पैरासिटामॉल टेबलेट का सेवन करें। दो-तीन दिन तक राहत न मिलने पर अस्पताल जाकर जांच कराएं। एलाइजा जांच से डेंगू बुखार की पुष्टि होती है।
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डेंगू की पुष्टि को लेकर भले ही स्वास्थ्य विभाग का अपना तर्क हो, लेकिन हकीकत में मरीजों की जान पर बन आ रही है। कई मरीज हालत गंभीर होने के चलते प्रयागराज, लखनऊ के निजी अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग कम प्लेटलेट्स को डेंगू नहीं मानता, लेकिन इससे मरीजों की मुश्किलें बढ़ रहीं हैं।
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मेडिकल कॉलेज में डेंगू बुखार से निपटने के लिए दस बेड का डेंगू वार्ड तैयार किया गया है। यहां भी प्राथमिक उपचार की ही व्यवस्था है। गंभीर मरीजों को प्रयागराज या फिर लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। इसी वजह से तीमारदार प्लेटलेट्स कम मिलने पर मरीज को जिला अस्पताल के बजाय निजी अस्पताल में भर्ती करवा रहे हैं।
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क्या बोले मरीज
गौरा सीएचसी में महज एक जनरल वार्ड है। उसी में सभी मरीजों को भर्ती किया जाता है। डेंगू वार्ड तैयार नहीं किया गया है।
मोहित गुप्ता, रामापुर
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संडवाचंद्रिका सीएचसी के समीप रहने वाले तीन लोगों को डेंगू हो गया है, मगर इन्हें भर्ती कर इलाज करने के लिए अलग से अस्पताल में वार्ड नहीं तैयार किया गया है।
दीपक दुबे, अंतू
डेंगू जांच तो दूर भर्ती कर इलाज करने के लिए अलग से वार्ड तक तैयार नहीं किया गया है। कोई इस ओर ध्यान तक नहीं दे रहा है।
धवल दूबे, कोहड़ौर
पहली बार मुफ्त, दूसरी बार डेंगू जांच का लगता है शुल्क
मेडिकल कॉलेज में डेंगू जांच कराने आने वाले मरीजों को पहली बार छूट दिया जा रहा है, लेकिन दूसरी बार शुल्क लगता है। इससे मरीज जांच कराने में भी आनाकानी करते हैं। जिला मलेरिया अधिकारी केपी द्विवेदी ने बताया कि डेंगू व मलेरिया बुखार की पुष्टि के लिए बुखार आने के दो दिन बाद जांच कराएं। इस दौरान सिर्फ पैरासिटामॉल टेबलेट का सेवन करें। दो-तीन दिन तक राहत न मिलने पर अस्पताल जाकर जांच कराएं। एलाइजा जांच से डेंगू बुखार की पुष्टि होती है।

दीपक दुबे।

दीपक दुबे।