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घर वापसी करने वालों को दिया जा रहा लालच : नरेंद्रानंद

Thu, 18 Dec 2014 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Thu, 18 Dec 2014 11:48 PM IST
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काशी सुमेरुपीठ के शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा है कि घर वापसी करने वालों को प्रदेश सरकार कुछ मंत्री, विधायक और अन्य सपाई लालच देकर हिन्दू संगठनों के खिलाफ बयान दिला रहे हैं। जब तक बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाशिम अंसारी ने मुकदमे से हटने का बयान नहीं दिया था तब तक उनके परिवार की याद किसी सपाई को नहीं आई। उनकी यह भूमिका साफ तौर से हिंदू विरोधी है। शहर के हादी हाल में गुरुवार को आयोजित हिंदू सम्मेलन में भाग लेेने आए शंकराचार्य ने बाद में पत्रकारों से बातचीत में इस बात से इंकार किया कि हिंदू संगठन किसी को लालच देकर धर्म पविर्तन करा रहे हैं। आगरा की नजीर दिए जाने पर उन्होंने कहाकि वे लोग जो भी बयान दे रहे हैं वे सरकार और सपाइयों की ओर से दिए गए लालच में ऐसा कर रहे हैं। जिन लोगों ने घर वापसी की है वे छोटे बच्चे तो थे नहीं। हवन हिंदू धर्म में ही होता है। यह सभी को मालूम है। उन्होंने जब हवन की तो क्या उन्हें नहीं पता था कि वे क्या कर रहे हैं।
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उन्होंने कहाकि कथित सेक्युलर नेताओं का शगल बन गया है हिंदुओं का विरोध। राम मंदिर पर जब बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाशिम अंसारी ने बयान दिया कि वह अब हटेंगे। वहां वह रामलला का मंदिर देखना चाहते हैं। इससे सपा और अन्य तथाकथित सेक्युलर नेताओं में हड़कंप पहुंच गया। लोग उनके घर पहुंच मदद करने, बच्चों को नौकरी दिलाने आदि की बात करने लगे। उनसे पूछिए कि अब तक उन्हें हाशिम अंसारी की याद क्यों नहीं आई। एक सवाल के जवाब में शंकराचार्य ने कहाकि हिंदू कोई धर्म नहीं बल्कि विचारधारा है। धर्म तो सनातन है। हिंदू लालच देकर कोई काम नहीं करता। ऐसा करना गलत है। उन्होंने कहाकि सिक्किम, केरल, नागालैंड में लालच देकर धर्मांतरण कराए जा रहे हैं। इसके लिए कोई नहीं आवाज उठा रहा है।
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राम मंदिर के संबंध में कहकि  2016 तक केंद्र सरकार को राज्यसभा में बहुमत हासिल होेने की उम्मीद है। उसके बाद भी अगर सरकार राम मंदिर निर्माण की दिशा में पहल नहीं करती तो संत आंदोलन की रणनीति बनाएंगे। गंगा रक्षा के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहाकि सरकार अलग मंत्रालय बनाया है। इससे उसकी नीयत साफ लगती है। अविरल गंगा और निर्मल गंगा संतों का लक्ष्य है। अगर माघ मेला में साफ पानी नहीं मिला तो संत आंदोलन करेंगे।
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