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मैहर से पैदल ही बलरामपुर के लिए निकल पड़े चौदह युवक
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मैहर में सीमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले 14 युवक कंपनी बंद होने के बाद पैदल ही अपने घर बलरामपुर के लिए निकल पड़े। तीन दिन का सफर तय करने के बाद गुरुवार को सभी प्रतापगढ़ पहुंचे। लगातार चलने के कारण उनके पैरों में छाले पड़ गए थे। पेट की आग बुझाने के लिए चिलबिला में रुके तो आसपास के लोगों ने उन्हें भोजन का पैकेट थमाया।
बलरामपुर के मनघटा मथुरा के रहने वाले ननकू, इब्राहिम, अजीज, मैनुद्दीन, हैदर अली, मोहम्मद शरीफ, सोहराब, शाहिद समेत 14 लोग मैहर में रहकर सीमेंट फैक्ट्री में काम करते थे। कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए लागू हुए लॉकडाउन के बाद कंपनी बंद हो गई और उनका मकान से बाहर निकलना भी बंद हो गया। सभी लोग वहीं रुके रहे। लाकडाउन बढ़ने के बाद परिवार के लोगों को उनकी चिंता सताने लगी। परिजनों की जिद के आगे सभी घर के लिए निकल पड़े। मंगलवार की शाम को सभी घर के लिए निकले।
पुलिस से बचने के लिए उन्होंने रेलवे लाइन पकड़कर सफर किया। ताकि वह सुरक्षित घर पहुंच सकें। रास्ते में खाने के लिए बिस्किट व पानी के साथ सूखी रोटी भी ले रखी थी। जिसे खाते-पीते घर पहुंचने के लिए कदम आगे बढ़ाते रहे। उनके पैरों में छाले तक पड़ गए थे, लेकिन चलना बंद नहीं किया। गुरुवार को चिलबिला बाजार से गुजर रहे थे। सभी को जोरों की भूख लगी थी। किसी की नजर पड़ी तो रोककर पूछताछ करने के बाद उन्हें खाने की व्यवस्था कराई। इसके बाद सभी घरों के लिए रवाना हो गए।
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मध्य प्रदेश की सीमा पार करने के दौरान सभी की थर्मल स्क्रीनिंग हुई। सभी के हाथ पर फिट होने का ठप्पा भी लगा। जिसे दिखाते हुए सभी आगे बढ़ते चले जा रहे थे। अधिकांश सफर सभी ने रेलवे लाइन के सहारे ही किया।
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बलरामपुर के मनघटा मथुरा के रहने वाले ननकू, इब्राहिम, अजीज, मैनुद्दीन, हैदर अली, मोहम्मद शरीफ, सोहराब, शाहिद समेत 14 लोग मैहर में रहकर सीमेंट फैक्ट्री में काम करते थे। कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए लागू हुए लॉकडाउन के बाद कंपनी बंद हो गई और उनका मकान से बाहर निकलना भी बंद हो गया। सभी लोग वहीं रुके रहे। लाकडाउन बढ़ने के बाद परिवार के लोगों को उनकी चिंता सताने लगी। परिजनों की जिद के आगे सभी घर के लिए निकल पड़े। मंगलवार की शाम को सभी घर के लिए निकले।
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पुलिस से बचने के लिए उन्होंने रेलवे लाइन पकड़कर सफर किया। ताकि वह सुरक्षित घर पहुंच सकें। रास्ते में खाने के लिए बिस्किट व पानी के साथ सूखी रोटी भी ले रखी थी। जिसे खाते-पीते घर पहुंचने के लिए कदम आगे बढ़ाते रहे। उनके पैरों में छाले तक पड़ गए थे, लेकिन चलना बंद नहीं किया। गुरुवार को चिलबिला बाजार से गुजर रहे थे। सभी को जोरों की भूख लगी थी। किसी की नजर पड़ी तो रोककर पूछताछ करने के बाद उन्हें खाने की व्यवस्था कराई। इसके बाद सभी घरों के लिए रवाना हो गए।
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मध्य प्रदेश की सीमा पार करने के दौरान सभी की थर्मल स्क्रीनिंग हुई। सभी के हाथ पर फिट होने का ठप्पा भी लगा। जिसे दिखाते हुए सभी आगे बढ़ते चले जा रहे थे। अधिकांश सफर सभी ने रेलवे लाइन के सहारे ही किया।