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एक तरफ सरकार को बेचा अनाज, दूसरी तरफ लेते रहे मुफ्त राशन
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rashan
जिले में एकतरफ किसान खरीद केंद्रों पर जहां अपनी उपज बेचकर मुनाफा कमाते रहे, वहीं दूसरी तरफ सरकार की तरफ से मिलने वाला मुफ्त राशन भी लेते रहे। सरकारी खरीद केंद्रों पर उन्होंने अपना गेहूं 1975 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचा। इसके बाद कोटेदारों के यहां से फ्री राशन भी उठाते रहे। आधारकार्ड से हुए इस खेल का खुलासा होने के बाद अब जिले के 738 किसानों के राशनकार्ड निरस्त किए जाएंगे।
जिले में बड़ी संख्या में अपात्रों के राशनकार्ड बनाए गए हैं। इस बात को विभागीय अधिकारी भी स्वीकार करते हैं, लेकिन जांचकर अपात्रों के राशनकार्ड निरस्त करने की जहमत नहीं उठाना चाहते। इस बीच खाद्य विपणन विभाग की जांच में यह सामने आया है कि जिले में 738 किसान ऐसे हैं जो सैकड़ों क्विंटल गेहूं सरकारी खरीद केंद्रों पर बेचते हैं। इसके साथ ही वे जिला आपू र्ति विभाग से राशनकार्ड बनवाकर कोरोना काल में मुफ्त राशन का भी लाभ ले रहे हैं।
जबकि यह योजना उन गरीबों के लिए है, जिन्हें दो वक्त की रोटी नसीब नहीं होती है। वास्तव में राशनकार्ड के लिए वही परिवार पात्र होता है जिसकी शहरी इलाकों की आमदनी प्रतिवर्ष तीन लाख और ग्रामीण इलाकों में दो लाख रुपये वार्षिक से कम है। मुख्यालय में जब विपणन विभाग से डाटा लेकर आपूर्ति विभाग में मिलान किया गया तो खुलासा हुआ कि जिले में 738 काश्तकार ऐेसे हैं जो राशनकार्ड बनवाकर सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से राशन ले रहे हैं। उन्होंने खरीद केंद्रों पर गेहूं भी बेचा है। शासन ने इन काश्तकारों का राशनकार्ड निरस्त करने के लिए कहा है।
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किसने कितना गेहूं बेचा, एकत्रित किया जा रहा डाटा
जिले के 738 किसानों में किसने कितना गेहूं बेचा है, इसका आंकड़ा जुटाया जा रहा है। दरअसल, गेहूं की खरीद करने के लिए पीसीेेएफ और अन्य इकाइयों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब विभागीय अधिकारी इसकी पड़ताल में जुटे हैं।
जिले के उन किसानों के राशनकार्ड निरस्त होंगे, जिन्होंने राशन लेने के साथ ही गेहूं की बिक्री की है। ऐसे लोगों का डाटा जिला आपूर्ति कार्यालय भेजा गया है।
अजीत कुमार त्रिपाठी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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जिले में बड़ी संख्या में अपात्रों के राशनकार्ड बनाए गए हैं। इस बात को विभागीय अधिकारी भी स्वीकार करते हैं, लेकिन जांचकर अपात्रों के राशनकार्ड निरस्त करने की जहमत नहीं उठाना चाहते। इस बीच खाद्य विपणन विभाग की जांच में यह सामने आया है कि जिले में 738 किसान ऐसे हैं जो सैकड़ों क्विंटल गेहूं सरकारी खरीद केंद्रों पर बेचते हैं। इसके साथ ही वे जिला आपू र्ति विभाग से राशनकार्ड बनवाकर कोरोना काल में मुफ्त राशन का भी लाभ ले रहे हैं।
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जबकि यह योजना उन गरीबों के लिए है, जिन्हें दो वक्त की रोटी नसीब नहीं होती है। वास्तव में राशनकार्ड के लिए वही परिवार पात्र होता है जिसकी शहरी इलाकों की आमदनी प्रतिवर्ष तीन लाख और ग्रामीण इलाकों में दो लाख रुपये वार्षिक से कम है। मुख्यालय में जब विपणन विभाग से डाटा लेकर आपूर्ति विभाग में मिलान किया गया तो खुलासा हुआ कि जिले में 738 काश्तकार ऐेसे हैं जो राशनकार्ड बनवाकर सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से राशन ले रहे हैं। उन्होंने खरीद केंद्रों पर गेहूं भी बेचा है। शासन ने इन काश्तकारों का राशनकार्ड निरस्त करने के लिए कहा है।
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किसने कितना गेहूं बेचा, एकत्रित किया जा रहा डाटा
जिले के 738 किसानों में किसने कितना गेहूं बेचा है, इसका आंकड़ा जुटाया जा रहा है। दरअसल, गेहूं की खरीद करने के लिए पीसीेेएफ और अन्य इकाइयों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब विभागीय अधिकारी इसकी पड़ताल में जुटे हैं।
जिले के उन किसानों के राशनकार्ड निरस्त होंगे, जिन्होंने राशन लेने के साथ ही गेहूं की बिक्री की है। ऐसे लोगों का डाटा जिला आपूर्ति कार्यालय भेजा गया है।
अजीत कुमार त्रिपाठी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी