Pratapgarh : बेल्हा के 117 और गांवों के पानी में मिला फ्लोराइड, जल निगम के सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा
जलनिगम ने पहले जिले के 314 गांव चिह्नित किए थे, जहां पानी में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा थी। वहां का पानी पीने लायक नहीं था। अब जल जीवन मिशन के तहत सर्वे में चार ब्लॉकों के 117 और गांवों के पानी में फ्लोराइड मिला है।
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जिले के 117 और गांवों के पानी में फ्लोराइड मिला है। जलजीवन मिशन के तहत जलनिगम की तरफ से कराए गए सर्वे में इसका खुलासा हुआ है। संडवाचंद्रिका, शिवगढ़, गौरा और सांगीपुर में नए गांव चिह्नित किए गए हैं। इन गांवों में 45 से 85 फिट तक पानी पीने योग्य नहीं है।
जलनिगम ने पहले जिले के 314 गांव चिह्नित किए थे, जहां पानी में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा थी। वहां का पानी पीने लायक नहीं था। अब जल जीवन मिशन के तहत सर्वे में चार ब्लॉकों के 117 और गांवों के पानी में फ्लोराइड मिला है। जिससे अब ऐसे गांवों की संख्या बढ़कर 431 पहुंच गई है। ज्यादातर गांव नदी से तीन से पांच किमी की दूर पर हैं, जहां ये समस्या है।
नदी से दूर स्थित गांवों के पानी में यह दिक्कत नहीं है। जल जीवन मिशन योजना के तहत गांव-गांव वाटर हेड टैंक स्थापित करने के लिए महाराष्ट्र की निर्माण इकाई जेएमसी इन दिनों सर्वे कर रही है। कार्यदायी संस्था के सर्वे में यह बात सामने आई है कि नदी के किनारे बसे गांवों में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा है।
150 फिट से अधिक गहरी बोरिंग कराने की तैयारी
जलनिगम के अफसरों का कहना है कि जिन गांवों के पानी में फ्लोराइड की समस्या है वहां 150 फिट से अधिक गहरी बोरिंग कराई जाएगी। फ्लोराइड की समस्या 45 से 85 फिट तक ही है। गहरी बोरिंग करने पर सामान्य पानी मिल सकता है। इसके बाद भी दिक्कत आने पर दूसरों गांवों के वाटर हेड टैंक से पानी की आपूर्ति की जाएगी। हर घर को नल से जल पहुंचाने के लिए इन दिनों पूरे जिले में सर्वे हो रहा है।
फ्लोराइड युक्त पानी पीने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और दांत समय से पहले गिर जाते हैं। लिवर और किडनी पर भी बुरा असर पड़ता है। - डॉ. मनोत्र खत्री, एसोसिएट प्रोफेसर, मेडिकल कॉलेज
फ्लोराइड युक्त पानी का दायरा बढ़ता जा रहा है। जेएमसी के सर्वे में खुलासा हो रहा है कि जिन गांवों में अभी तक सामान्य पानी था वहां भी अब फ्लोराइड युक्त पानी मिल रहा है। कार्यदायी संस्था अभी तक खारा पानी मिलने से 11 राजस्व गांवों में बोरिंग का स्थान बदल चुकी है। - सुरेंद्र कुमार, अधिशाषी अभियंता, जलनिगम