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Pratapgarh News: समितियों के चक्कर लगाकर थक चुके किसान
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समय पर खाद न मिलने से किसान परेशान हैं। उनका कहना है कि समितियों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं लेकिन खाद नसीब नहीं हो रही है। समितियों पर घंटे भर में ही खाद खत्म हो जा रही है। मांग के मुताबिक आपूर्ति नहीं होने से परेशानी बढ़ी है और खेती पिछड़ रही है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले की 170 समितियों पर अब तक 1700 मीट्रिक टन डीएपी और 600 मीट्रिक टन एनपीके खाद का वितरण किया जा चुका है। जबकि पिछले साल अक्तूबर तक 2821 मीट्रिक टन डीएपी और 2205 मीट्रिक टन एनपीके खाद बांटी गई थी। वर्तमान में समितियों पर 1200 मीट्रिक टन डीएपी और 200 मीट्रिक टन एनपीके की उपलब्धता है।
शहर के मीराभवन और कटरामेदनीगंज स्थित पीसीएफ गोदामों में 12 हजार मीट्रिक टन फास्फेटिक खाद (डीएपी, एनपीके) उपलब्ध है। प्रतिदिन समितियों पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है। समितियों पर पहुंचने के घंटेभर बाद ही खाद खत्म हो जा रही है। कुछ समितियों पर तो ताले लटक रहे हैं।
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रानीगंज के सुखदेव प्रसाद ने बताया कि क्षेत्र की समितियों पर एक सप्ताह से खाद नहीं मिल पा रही है। आलू बोआई के लिए खेत तैयार है। खाद न मिलने पर खेत की नमी कम हो रही है। अगर सिंचाई कराई तो समय और पैसा सब बर्बाद होगा। आलू की बोआई भी पिछड़ जाएगी। पट्टी के अशोक तिवारी ने बताया कि किसानों की मांग के सापेक्ष खाद उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
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विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले की 170 समितियों पर अब तक 1700 मीट्रिक टन डीएपी और 600 मीट्रिक टन एनपीके खाद का वितरण किया जा चुका है। जबकि पिछले साल अक्तूबर तक 2821 मीट्रिक टन डीएपी और 2205 मीट्रिक टन एनपीके खाद बांटी गई थी। वर्तमान में समितियों पर 1200 मीट्रिक टन डीएपी और 200 मीट्रिक टन एनपीके की उपलब्धता है।
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शहर के मीराभवन और कटरामेदनीगंज स्थित पीसीएफ गोदामों में 12 हजार मीट्रिक टन फास्फेटिक खाद (डीएपी, एनपीके) उपलब्ध है। प्रतिदिन समितियों पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है। समितियों पर पहुंचने के घंटेभर बाद ही खाद खत्म हो जा रही है। कुछ समितियों पर तो ताले लटक रहे हैं।
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रानीगंज के सुखदेव प्रसाद ने बताया कि क्षेत्र की समितियों पर एक सप्ताह से खाद नहीं मिल पा रही है। आलू बोआई के लिए खेत तैयार है। खाद न मिलने पर खेत की नमी कम हो रही है। अगर सिंचाई कराई तो समय और पैसा सब बर्बाद होगा। आलू की बोआई भी पिछड़ जाएगी। पट्टी के अशोक तिवारी ने बताया कि किसानों की मांग के सापेक्ष खाद उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।