फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   farmer stop paying loan instalment

कर्जमाफी की आशा में बकाएदारों ने बांधी मूठी

Mon, 29 Nov 2021 11:58 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 29 Nov 2021 11:58 PM IST
विज्ञापन
farmer stop paying loan instalment
प्रतापगढ़। विधानसभा चुनाव नजदीक आने के बाद जिले में बैंकों से कर्ज लेने वाले हजारों लोगों ने किस्त का भुगतान बंद कर दिया है। कर्जदार यह सोचकर किस्त की अदायगी नहीं कर रहे हैं, विधानसभा चुनाव के दौरान या बाद में एक बार फिर कर्जमाफी का लाभ मिल सकता है। जिले में 4,87,569 लोगों ने केसीसी, होमलोन, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की स्थापना के लिए बैंकों से 5234 करोड़ रुपये का कर्ज ले रखा है। कोरोना काल के बाद बैंकों से कर्ज लेने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। अब नियमित किस्त न मिलने के बाद बैंकों के करोड़ों रुपये फंसे हुए हैं।
विज्ञापन

विधानसभा चुनाव नजदीक आने के बाद कर्जदारों की नजरें राजनैतिक दलों की घोषणाओं पर टिक गई हैं। खेती-किसानी, घर बनवाने और व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए बैंकों से कर्ज लेने वाले लोग इसी उम्मीद में बैठे हैं कि किसी भी दिन कर्जमाफी की घोषणा हो सकती है। पूर्व में चुनावों में इस तरह की घोषणाएं हुई हैं और अधिकांश लोगों ने इसका लाभ भी उठाया है। इसे देखते हुए अब खासतौर से किसान क्रेडिट कार्ड लेने वाले किसानों ने किस्त जमा करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। आलम यह है कि खाते में जो रुपये थे, उसे रबी की बुवाई के लिए निकाल ले रहे हैं। इसमें अधिकांश लोग ऐसे हैं, जो अगस्त माह तक नियमित रूप से किस्त का भुगतान कर रहे थे।
विज्ञापन

मगर विधानसभा चुनाव निकट आते ही कर्जमाफी की उम्मीद में किस्त का भुगतान करना बंद कर दिया है। जो किसान अभी तक धान बेचकर धनराशि लोन एकाउंट में जमा करने की बात कर रहे थे, अब वे अपने निजी खर्च में लगा रहे हैं। वर्ष 2020 में 41,596 लोगों को कर्ज दिया गया था। वहीं वर्ष 2021 में 2,58,456 लोगों को बैंकों से कर्ज दिया गया। विभागीय जानकारों का कहना है कि कोरोना काल के बाद कर्ज लेने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

आयकर चुकता करने वालों को ही मिलता है कर्ज
बैंकों ने कर्ज लेने के नियम को सख्त कर दिया है। आधारकार्ड, पैन कार्ड के साथ ही तीन वर्ष का आयकर रिटर्न देखने के बाद ही बैंककर्मी ऋण देते हैं। किसानों को उनकी जमीन के आधार पर केसीसी दिया जाता है। यह फसली ऋण होता है और न्यूनतम चार प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज दिया जाता है।
वर्ष 2017 में 1,14,115 कर्जदारों को मिला था माफी का लाभ
वर्ष 2017 में सूबे में भाजपा की सरकार बनने पर कर्जदारों का एक-एक लाख रुपये का ऋण माफ किया गया था। इससे जिले के 1,14,115 कर्जदारों का लाभ मिला था। अब एक बार फिर लोग कर्जमाफी की घोषणाओं के इंतजार में हैं।
मैसेज के बाद फोन करके बैंक बना रहे दबाव
किस्त का भुगतान बंद करने वाले कर्जदारों को बैंककर्मी मैसेज और फोन कर किस्त जमा करने के लिए दबाव बना रहे हैं। मगर वे सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। बैंक किस्त जमा करने के लिए कर्जदारों को मैसेज भेज रहे हैं। मैसेज के जरिए यह बताया जा रहा है कि आपको किस तारीख को किस्त जमा करनी है, मगर कर्जदारों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।

कोरोना काल के बाद बाहर से आने वाले लोगों ने व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए बड़ी तादाद में बैंकों से ऋण लिया। इन दिनों किस्त अदा करने में ढिलाई बरत रहे हैं। बैंकों में जो लोग डिफाल्टर हैं, उनकी संपत्ति कुर्क करने की तैयारी चल रही है।
-अनिल कुमार, एलडीएम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed